{"_id":"6203da13f7eebb553d0a2c33","slug":"goa-election-2022-goas-youngest-party-takes-on-heavyweights-fields-candidates-in-38-seats","type":"story","status":"publish","title_hn":"Goa Election 2022: गोवा में भाजपा-कांग्रेस को चुनौती दे रही नई पार्टी, जानें सामाजिक संगठन से 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारने तक का सफर ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Goa Election 2022: गोवा में भाजपा-कांग्रेस को चुनौती दे रही नई पार्टी, जानें सामाजिक संगठन से 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारने तक का सफर
Wed, 09 Feb 2022 08:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 09 Feb 2022 08:43 PM IST
सार
चुनावी राजनीति में एक नई टीम होने के बावजूद आप के पूर्व कार्यकर्ता मनोज परब के नेतृत्व में रिवोल्यूशनरी गोवाअंस ने 38 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए हैं। इसमें वे सीटें भी शामिल हैं, जहां से गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (संखालिम) और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे (वालपोई) चुनाव लड़ रहे हैं।
विज्ञापन
मनोज परब (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter
विस्तार
गोवा मूल के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाला एक सामाजिक संगठन विधानसभा चुनावों को लेकर इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, अब यह संगठन गोवा की सबसे युवा राजनीतिक पार्टी बनकर उभर रहा है। पार्टी ने चुनावी मैदान में 40 में से 38 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतारे हैं। रिवोल्यूशनरी गोवाअंस नाम की यह पार्टी 14 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में न केवल कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी स्थापित राजनीतिक संस्थाओं के खिलाफ है, बल्कि आप, तृणमूल कांग्रेस, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी जैसे कई अन्य संगठनों के खिलाफ भी हैं।
विज्ञापन
चुनावी राजनीति में एक नई टीम होने के बावजूद आप के पूर्व कार्यकर्ता मनोज परब के नेतृत्व में रिवोल्यूशनरी गोवाअंस ने 38 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए हैं। इसमें वे सीटें भी शामिल हैं, जहां से गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (संखालिम) और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे (वालपोई) चुनाव लड़ रहे हैं। रिवोल्यूशनरी गोवाअंस को पिछले महीने ही भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के साथ एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया गया था और इसका चुनाव चिन्ह 'फुटबॉल' है।
विज्ञापन
38 उम्मीदवारों में से सिर्फ परब ही हैं, जो दो सीटों से चुनावी मैदान में हैं। ये दोनों सीटें हैं- वालपोई और थिविम। यहां फिलहाल भाजपा विधायक नीलकांत हलारंकर का प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि हमारे उम्मीदवारों को जनता का अपार समर्थन मिल रहा है। लोगों ने महसूस किया है कि स्थापित राजनीतिक दलों को वोट देने से उन्हें कुछ खास हासिल नहीं होगा। यही कारण है कि रिवोल्यूशनरी गोवाअंस एक विकल्प के रूप में सामने आई है।
विज्ञापन
रिवोल्यूशनरी गोवाअंस (आरजी) की शुरुआत युवाओं के एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में हुई थी। इस तटीय राज्य में पड़ोसी कर्नाटक और महाराष्ट्र की बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी है। पार्टी के बारे में बताते हुए परब ने बताया कि हमारा घोषित लक्ष्य गोवा मूल के प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाना और उसके अधिकारों के लिए लड़ना था। हमारा मकसद ऐसे लोगों को जाति और धर्म के बावजूद अपनी पहचान, संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए अपनी मातृभूमि में गोवा के अस्तित्व के लिए लड़ने के लिए एकजुट करना था।
उन्होंने बताया कि संगठन ने शुरुआत में राज्य के विभिन्न बाजारों में अवैध विक्रेताओं के खिलाफ अभियान चलाया। हमने गोवा के युवाओं को सिखाया कि सड़क किनारे बैठकर मछली बेचना कोई शर्मनाक पेशा नहीं है। गोवा की लड़कियों सहित युवाओं के लिए अस्थाई सड़क किनारे मछली के स्टॉल लगाने में मदद करने वाले परब ने कहा कि यह गर्व की बात है। रिवोल्यूशनरी गोवाअंस के लोगों ने धीरे-धीरे पूरे राज्य में अपने पंख फैलाना शुरू कर दिया और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करने में विफलता के लिए भाजपा सरकार की आलोचना करना शुरू किया।
2019 में परब और उनके दोस्तों के समूह ने 'पर्सन ऑफ गोअन ओरिजिन (पोगो) बिल' का मसौदा तैयार किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा केवल उन गोवावासियों के लिए सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मांगी गई, जिनके माता-पिता 19 दिसंबर 1961 से पहले पैदा हुए थे। जब राज्य पुर्तगाली शासन से मुक्त हुआ था।
उन्होंने बताया कि हमने हर विधायक को पोगो बिल पेश किया और उनसे विधानसभा में इसे मंजूरी दिलाने का आग्रह किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं की। परब ने कहा कि यह स्पष्ट था कि वे मूल गोवावासियों के हितों की कीमत पर अपने वोट बैंक की रक्षा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह वह समय था जब आरजी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और पहले कदम के रूप में मतदाता सूची में अवैध रूप से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए अभियान चलाया। परब ने खुद को राज्य के मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में भी प्रोजेक्ट किया है।