मौसम में हो रही वैश्विक उथल-पुथल का असर पड़ रहा है फसलों पर, कम हो रहा उत्पादन
- चीन के कई हिस्सों में बीते 60 साल में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है।
- दक्षिण भारत के कई हिस्से भीषण सूखे का सामना कर रहे हैं।
- सूखे की स्थिति ने थाईलैंड और इंडोनेशिया में चावल के खेतों को बर्बाद कर दिया है।
- भारत में गन्ने और तिलहन की फसलों को प्रभावित किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक तरफ यूरोप में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अमेरिका के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज हुई है, वहीं दूसरी ओर एशिया के लोग भी मौसम के कारण कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं। एशिया के देशों में कहीं सूखा पड़ रहा है तो कहीं बाढ़ आ रही है। जिससे हजारों लोगों का जीवन तो तबाह हो ही रहा है, साथ ही फसलों को भी भारी मात्रा में नुकसान पहुंच रहा है। मौसम से वो क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं, जहां देश के अधिकांश ताड़ के तेल, प्राकृतिक रबड़, चावल और बड़ी मात्रा में चीनी का उत्पादन होता है।
चीन के कई हिस्सों में बीते 60 साल में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं एशिया के सबसे बड़े नदी प्रणाली में से एक मेकोंग का जल स्तर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। दक्षिण भारत के कई हिस्से भीषण सूखे का सामना कर रहे हैं।
अमेरिका में मौसम सलाहकार मैक्सार के वरिष्ठ कृषि मौसम विज्ञानी डोनाल्ड कीने का कहना है, "पिछले कई वर्षों में हम इस क्षेत्र में पहले की तुलना में अधिक सूखापन देख रहे हैं। इन स्थितियों के कारण मुख्य फसलों के उत्पादन में इस साल और बाद में गिरावट आएगी।" सूखे की स्थिति ने थाईलैंड और इंडोनेशिया में चावल के खेतों को बर्बाद कर दिया है और भारत में गन्ने और तिलहन की फसलों को प्रभावित किया है।
चीन
यहां उत्तरी क्षेत्रों में कम बारिश और सूखे से कई फसलें प्रभावित हुई हैं। हालांकि सिंचाई से इसका प्रभाव कम हो जाता है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ दक्षिणी प्रांतों में जुलाई के शुरुआती हफ्तों में 1961 के बाद से सबसे भारी बारिश हुई है। इससे चावल के शुरुआती उत्पादन में कमी आई है और कीटों की समस्या बढ़ रही है। चीन गेहूं और चावल का सबसे बड़ा उत्पादक है। वहीं चीन दुनिया में मक्के का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भी है। ये बात अमेरिका के कृषि विभाग के डाटा में कही गई है।
भारत
भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कई स्थानों पर सूखा होने के कारण उत्पादन बीते तीन सालों में सबसे कम रहा है। जिसके चलते निर्यात भी प्रभावित हुआ है। वार्षिक मानसून से होने वाली खराब वर्षा से तिलहनी फसलों को भी खतरा है। जो ताड़ के तेल सहित खाद्य तेलों की विदेशी खरीद को बढ़ावा दे सकता है, जिसका देश सबसे बड़ा आयातक है। अभी तक मुंबई भी भारी बारिश से जूझ रहा है।
इंडोनेशिया, मलयेशिया
इंडोनेशिया और मलयेशिया दुनिया के सबसे बड़े ताड़ के तेल के उत्पादक हैं। प्लांटेशन कंस्लटेंट गैनलिंग सडन के निदेशक लिंग होंग का कहना है कि अगले तीन महीने यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि अगले साल उत्पादन कैसा होगा। साथ ही बोर्नियो द्वीप के कई क्षेत्रों में सूखे की नजदीकी से निगरानी की जाएगी। बता दें होंग बीते चार दशकों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। जावा द्वीप पर चावल की खेती सूखे मौसम के कारण प्रभावित हो रही है, जहां कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां बीते 60 दिनों से बारिश ही नहीं हुई है।
थाईलैंड
थाईलैंड दुनिया में रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक है। साथ ही चीनी और चावल का भी सबसे निर्यातक है। यहां कई वर्षों का सबसे अधिक सूखा पड़ा है, जिससे फसलें प्रभावित हुई हैं। जिसके चलते अधिकारियों को गन्ना उत्पादन और चावल शिपमेंट के अनुमानों में कटौती करनी पड़ी है। क्लाउड-सीडिंग विमानों को तैनात किया गया है, और उत्तर और उत्तर-पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में पानी के लिए पंप और ट्रकों का इस्तेमाल किया गया है।
वियतनाम
वियतनाम के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और सूखे के कारण चावल और रबड़ की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि केंद्रीय हाइलैंड्स, जहां अधिकांश कॉफी उगाई जाती है, अब तक बड़े नुकसान से बच गए हैं। वियतनाम रोबस्टा किस्म का सबसे बड़ा उत्पादक है।
ऑस्ट्रेलिया
यहां पूर्वी तट का अधिकांश भाग अभी भी सूखे की चपेट में है, जो दो साल पहले शुरू हुआ था। सूखे के कारण सबसे अधिक क्वींसलैंड की स्थिति खराब है। ये राज्य सबसे बड़ा बीफ उत्पादक है। हालांकि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में स्थिति अच्छी है, यहां गेहूं की फसल को देरी से ही सही लेकिन अच्छी बारिश मिली है और बीते साल की तरह अच्छा उत्पादन होने की संभावना है।