Global Warming: अब दक्षिण में भी नजर आएगा गर्मी का प्रकोप! इन वजहों से आ रहे हैं भारत के मौसम में बदलाव
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विस्तार
इस साल गर्मी के शुरुआती के दो माह मार्च और अप्रैल लगातार पश्चिमी विक्षोभ का कारण ठंडे रहे हैं। लेकिन आने वाले दिनों में प्रचंड गर्मी लोगों का हाल बेहाल कर देगी। आने वाले एक या दिन के बाद मौसम पूरी तरह से खुल जाएगा। तापमान बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। मौसम का बदलता मिजाज और मार्च-अप्रैल में बारिश होने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि गर्मी के सीजन में बारिश क्यों हो रही है। आइए जानते है कि आखिरी किन कारणों का असर भारत के मौसम पर नजर आ रहा है।
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दरअसल, मौसम विभाग ने हाल ही में जानकारी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिछले 30 वर्षों में देश के गर्मी वाले क्षेत्रों में हीटवेव की आवृत्ति और अवधि लगभग 2.5 दिन बढ़ गई है। जबकि इसी दौरान शीत लहर की अवधि और आवृत्ति कम हुई है। सामान्य शब्दों में कहें तो साल दर साल धरती गर्म होती जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के हालिया शोध पत्र से पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते पिछले 30 वर्ष में देश में गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में भीषण गर्मी और लू की लपट और इनकी अवधि में लगभग 2.5 दिनों की वृद्धि हुई है। जबकि इसी दौरान न्यूनतम तापमान में वृद्धि के कारण शीत लहरों की आवृत्ति और अवधि में कमी देखी जा रही है।
'मेटियोरोलॉजिकल मोनोग्राफ: हीट एंड कोल्ड वेव्स इन इंडियाः प्रोसेस एंड प्रिडिक्टिबिलिटी' नाम शोध पत्र में विस्तार से बताया गया है कि लू की लपट, उनकी अवधि और उनकी अधिकतम अवधि बढ़ रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग के कारण हैं।’ गर्मी की लहरें, आमतौर पर मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत और आंध्र प्रदेश-ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में मार्च से जून की अवधि में महसूस की जाती हैं। लेकिन अभी तटीय क्षेत्रों में गर्मी की लहरों की आवृत्ति, उत्तरी भारत की तुलना में थोड़ी कम है। लेकिन शोध पत्र में यह भी कहा गया कि गर्मी की लहरें दक्षिण भारत में भी फैल सकती हैं, जहां फिलहाल गर्मी की लहरें नहीं हैं।
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इस रिसर्च में मौसम विज्ञान विभाग ने भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से तापमान और आर्द्रता में वृद्धि के चलते इसके स्वास्थ्य प्रभावों पर व्यवस्थित तरीके से शोध शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसमें कहा गया है, हमें गर्मी और शीत लहरों के लिहाज से विभिन्न तैयारी को सक्रियता से लागू करने के लिए साक्ष्य-आधारित सीमा स्थापित करने की आवश्यकता है। भीषण गर्मी और लू के प्रभाव और अनुकूलन पर विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने की मांग करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सही समय है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग भारतीय परिस्थितियों के लिए तापमान और आर्द्रता में वृद्धि से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए व्यवस्थित शोध शुरू करे।