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राजीव रंजन बोले: 19 दिसंबर को शक्ति प्रदर्शन करेगा कायस्थ समाज, तालकटोरा स्टेडियम में होगा कार्यक्रम

Mon, 13 Dec 2021 08:40 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 13 Dec 2021 08:40 PM IST
सार

राजीव रंजन ने कहा कि संसदीय मूल्यों में गिरावट, बिगड़ता सामाजिक तानाबाना और असंतोष की भावना को देखते हुए तंत्र के शिखर पर काबिज होने के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना बहुत जरूरी हो गया है, जिससे देश में गिरती हुई व्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके।

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Global Kayastha Conference chief Rajiv Ranjan says power demonstration event to be held on 19 December at Talkatora stadium 
कार्यक्रम की जानकारी देते राजीव रंजन व अन्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने सोमवार को कहा कि कायस्थ वर्ग 19 दिसंबर को तालकटोरा स्टेडियम में सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों को अपनी ताकत का एहसास दिलाने के लिए शक्ति प्रदर्शन करेगा। उन्होंने यहां दि फॉरेन करेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कायस्थ समाज के लिए अपने गौरवशाली इतिहास को फिर से दोहराने का वक्त आ गया है। 

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प्रसाद ने ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का नारा देते हुए कहा कि देश और विदेश से लाखों की संख्या में कायस्थ अपनी एकजुटता और ताकत का एहसास दिलाने के लिए 19 दिसंबर को राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कूच करेंगे। उन्होंने इस अवसर पर जीकेसी का नेशनल एंथम भी लॉन्च किया और कहा कि राजनीति अस्पृश्य नहीं है, देश और समाज का भविष्य यही तय करेगी, इसलिए जरूरी है कि कायस्थ समाज राजनीति में भी सक्रिय हो।
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उन्होंने कहा कि देश के पिछले पांच हजार साल का इतिहास देखा जाए तो कायस्थ समाज की हर काल के शासन और प्रशासन में महत्वपूर्ण और विश्वसनीय भूमिका के उदाहरण देखने को मिल जाते हैं।कायस्थ समाज ने जरूरत पड़ी तो राष्ट्र की रक्षा में तलवारें भी उठाई हैं। स्वाधीनता संग्राम से लेकर आजाद भारत में भी समाज के हस्ताक्षरों ने देश के अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन, आज समाज कहीं न कहीं खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। 
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प्रसाद ने कहा कि इसीलिए समाज को अपनी एकजुटता दिखाने के लिए एक मंच पर आना पड़ा है। उन्होंने कहा कि देश और विदेशों में कायस्थों की ओर से नेतृत्व करने का इतिहास किसी से छुपा नहीं है। स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस या फिर देश में संपूर्ण क्रांति के अगुआ जयप्रकाश नारायण, राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री सहित अन्य कई विभूतियों ने देश का न सिर्फ नेतृत्व किया, बल्कि अध्याय को बदलने का काम बखूबी किया है। 


उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसी बाधा को युवाओं ने अपनी प्रतिभा से पार कर लिया है। वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं, लेकिन देश में ही अवसरों के लिए देश की राजनीति और प्रशासन में भी समाज की भागीदारी आवश्यक है। समाज को अब व्यापार क्षेत्र के लिए भी तैयार होना होगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कायस्थ समाज के कितने विधायक हैं, राजनीतिक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए साथ आने की जरूरत है।

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