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पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा, 'खुशी है भारत का बंटवारा हुआ'
Sun, 09 Feb 2020 09:34 PM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 09 Feb 2020 09:34 PM IST
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नटवर सिंह
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पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह ने कहा है कि उन्हें देश के बंटवारे पर खुशी है। उन्होंने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा, 'मुझे खुशी है कि भारत का बंटवारा हुआ। ऐसा नहीं होता तो मुस्लिम लीग देश को चलने नहीं देती।'
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नटवर सिंह ने राज्यसभा सांसद एमजे अकबर की नई किताब 'गांधी हिंदुइज्म: द स्ट्रगल अगेंस्ट जिन्नाह इस्लाम' की लॉन्चिंग के मौके पर यह बात कही। इस किताब का लोकार्पण पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने निवास स्थान पर किया।
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नटवर सिंह ने कहा, 'मेरे विचार में मुझे खुशी है कि भारत का बंटवारा हुआ क्योंकि अगर भारत का बंटवारा नहीं होता तो हमें कई 'डायरेक्ट एक्शन डेज' देखने पड़ते। ऐसी पहली कार्रवाई हमने जिन्ना के जीवित रहते 16 अगस्त (1946) को देखी थी, उस समय कोलकाता (तब कलकत्ता) में हजारों हिंदुओं को मार दिया गया था। इसके बाद की प्रतिक्रिया में बिहार में हजारों मुस्लिमों को मार दिया गया।'
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उन्होंने कहा, 'बंटवारे के पीछे का एक सीधा सा कारण है कि मुस्लिम लीग देश को सही ढंग से चलने नहीं देती।'
क्या है 'डायरेक्ट एक्शन डे'
मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने अलग देश की मांग करते हुए सीधे कार्रवाई करनी शुरू कर दी थी। 16 अगस्त, 1946 को कलकत्ता में दंगे भड़के थे। इस घटना को कलकत्ता नरसंहार और डायरेक्ट एक्शन डे के नाम से भी जाना जाता है।
मुस्लिम लीग नहीं चलने देती देश:
मुस्लिम लीग पर अपनी सोच को लेकर नटवर सिंह ने दो सितंबर, 1946 को भारत की आतंरिक सरकार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कैसे मुस्लिम लीग ने पहले काउंसिल के उपाध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू के साथ आने से इनकार कर दिया था और बाद में समिति के सदस्य सिर्फ इसलिए बने ताकि सारे प्रस्तावों को खारिज कर सकें।
उन्होंने बताया, 'ऐसे में आप समझ सकते हैं कि अगर भारत का बंटवारा नहीं होता, तो मुस्लिम लीग देश चलाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल कर देते।'
गांधी और जिन्ना के साथ रहना मुश्किल था :
नटवर सिंह ने गांधी और जिन्ना को दो 'महान' और 'मुश्किल' व्यक्ति करार दिया। 88 वर्षीय कांग्रेसी नेता ने कहा, 'उनके साथ रहना मुश्किल हो जाता क्योंकि गांधीजी के मानक बहुत उच्च थे और जिन्ना का स्वभाव काफी अक्खड़ था।'