{"_id":"666b4cc05ffe9bc2d60369b3","slug":"ghatkopar-hoarding-case-mumbai-police-says-grp-leased-land-to-advertising-firm-without-security-deposit-2024-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghatkopar Hoarding Case: 'GRP ने विज्ञापन फर्म को बिना सुरक्षा राशि पट्टे पर दी जमीन', पुलिस जांच में खुलासा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Ghatkopar Hoarding Case: 'GRP ने विज्ञापन फर्म को बिना सुरक्षा राशि पट्टे पर दी जमीन', पुलिस जांच में खुलासा
Fri, 14 Jun 2024 01:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 14 Jun 2024 01:18 AM IST
सार
घाटकोपर में 13 मई को तेज हवा और भारी बारिश के चलते 120X120 फीट का बड़ा होर्डिंग पेट्रोल पंप पर गिर गया था। होर्डिंग के नीचे दबने से पेट्रोल पंप पर खड़े 17 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि, दुर्घटना में 74 लोग घायल हो गए थे। इस मामले की पुलिस जांच कर रही है।
विज्ञापन
मुंबई के घाटकोपर में पेट्रोल पंप पर गिरा होर्डिंग (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
मुंबई के घाटकोपर होर्डिंग मामले में तत्कालीन जीआरपी कमिश्नर कैसर खालिद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बिना सिक्योरिटी डिपॉजिट के जमीन विज्ञापन कंपनी को दी थी। पट्टे पर दी गई जमीन के एवज में विज्ञापन फर्म से जीआरपी को प्रति माह 13 लाख रुपये किराया मिल रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि खालिद ने सुरक्षा राशि जमा कराए बिना ही निजी कंपनी को होर्डिंग लगाने की अनुमति क्यों दी?
विज्ञापन
बता दें कि घाटकोपर में 13 मई को तेज हवा और भारी बारिश के चलते 120X120 फीट का बड़ा होर्डिंग पेट्रोल पंप पर गिर गया था। होर्डिंग के नीचे दबने से पेट्रोल पंप पर खड़े 17 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि, दुर्घटना में 74 लोग घायल हो गए थे। इस मामले की पुलिस जांच कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन फर्म से जीआरपी को हर माह मिल रहा था 13 लाख रुपये किराया
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि जिस जमीन पर होर्डिंग लगाया गया था, वह जमीन सरकारी रेलवे पुलिस के कब्जे में थी। पेट्रोल पंप के पास होर्डिंग लगाने की अनुमति तत्कालीन जीआरपी आयुक्त कैसर खालिद की मंजूरी से 10 साल के लिए मेसर्स ईगो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी। कहा कि होर्डिंग लगाने के लिए पट्टे पर दी गई जमीन के एवज में जीआरपी को विज्ञापन फर्म से प्रति माह 13 लाख रुपये किराया मिल रहा था। मासिक किराये के हिसाब से जीआरपी विज्ञापन फर्म से 40 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूल सकती थी, लेकिन तत्कालीन जीआरपी कमिश्नर कैसर खालिद ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने निजी कंपनी को सुरक्षा राशि जमा किए बिना ही होर्डिंग लगाने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
अन्य तीन होर्डिंग लगाने के लिए भी जीआरपी ने लिए 40 लाख रुपये
अधिकारी ने बताया कि होर्डिंग हादसे से पहले भी जीआरपी ने तीन होर्डिंग्स लगाने के लिए ईगो मीडिया से 40 लाख रुपये एकत्र किए थे, जो उन्हें निविदा नियमों के अनुसार आवंटित किए गए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि खालिद की अध्यक्षता वाली जीआरपी ने विज्ञापन फर्म से सुरक्षा राशि क्यों नहीं ली। वहीं, घटना से संबंधित मुंबई नागरिक अधिकारियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने होर्डिंग ढहने की घटना की जांच के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक अलग समिति का गठन किया है। वहीं, पुलिस ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
इन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी मुंबई क्राइम ब्रांच
इस मामले में अब तक मुंबई क्राइम ब्रांच ने ईगो मीडिया के मालिक भावेश भिंडे, फर्म के पूर्व निदेशक जान्हवी मराठे, बीएमसी अनुमोदित इंजीनियर मनोज सांघू के साथ ही एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर चुकी है। बीएमसी के इंजीनियर सांघू ने कंपनी को होर्डिंग लगाने के लिए स्थिरता प्रमाण पत्र जारी किया था।