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अंधेरे, धुंध और कोहरे में नहीं छिप पाएगा दुश्मन: BEL ने स्वदेशी जर्मेनियम लेंस के लिए दिया 29.8 करोड़ का ऑर्डर

Fri, 22 May 2026 05:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 22 May 2026 05:35 AM IST
सार

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने गोवा की निजी कंपनी आरआरपी डिफेंस को 29.8 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर अत्याधुनिक 'जर्मेनियम लेंस' बनाने के लिए है। इस लेंस का इस्तेमाल थर्मल इमेजिंग सिस्टम में होगा। इससे भारतीय सैनिक घने कोहरे, बारिश और घुप अंधेरे में भी दुश्मन की हर हरकत को आसानी से देख सकेंगे।

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Germanium lens BEL defence order RRP Goa Thermal imaging system Indian Army night vision Sniper technology
स्वदेशी तकनीक से भारतीय सेना के लिए बनेगा जादुई लेंस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की ताकत अब और बढ़ने वाली है। भारतीय सेना को जल्द ही एक ऐसी हाईटेक आंख मिलने जा रही है, जिससे वह घने कोहरे, धुंध और घुप अंधेरे में भी दुश्मन को आसानी से देख सकेगी। भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। वैश्विक स्तर पर जहां ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनकी सेना अत्याधुनिक है, वहीं अब भारतीय सेना भी तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत हो रही है। इस तकनीक के आने से सीमा पर चौकसी और भी ज्यादा सख्त और सटीक हो जाएगी।
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इस बड़ी खबर को आसान भाषा में समझें तो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने थर्मल इमेजिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक 'जर्मेनियम लेंस' के लिए एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। बीईएल ने गोवा में स्थित एक निजी रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनी 'आरआरपी डिफेंस' को इसके लिए लगभग 29.8 करोड़ रुपए का भारी-भरकम ऑर्डर दिया है। यह लेंस सेना के उन विशेष कैमरों में लगेगा जो शरीर की गर्मी (थर्मल) को पकड़कर तस्वीर बनाते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सैनिक रात के अंधेरे, भारी बारिश या खराब मौसम में भी बिना किसी रुकावट के सीमा पार की हर हरकत पर पैनी नजर रख सकेंगे।
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जर्मेनियम लेंस क्या है और यह सेना के लिए कैसे काम करेगा?
यह खास लेंस 'जर्मेनियम' धातु से बना होता है जो अवरक्त विकिरणों (इन्फ्रारेड) को बहुत अच्छे से अपने आर-पार जाने देता है। इसी लेंस की मदद से थर्मल कैमरे, निगरानी उपकरण और लक्ष्य को पहचानने वाली आधुनिक मशीनें काम करती हैं। जब इस लेंस को थर्मल इमेजिंग सिस्टम में लगाया जाता है, तो यह अंधेरे में छिपे दुश्मन के शरीर की गर्मी को दूर से ही पकड़ लेता है। इसका सीधा मतलब यह है कि दुश्मन चाहे रात के अंधेरे में छिपा हो, धुंध में हो, या तेज बारिश हो रही हो, वह भारतीय सेना की तेज नजरों से बिल्कुल भी बच नहीं पाएगा।

आधुनिक युद्ध में इस नई तकनीक का क्या फायदा होगा?
आज के समय में होने वाले युद्ध बहुत ही आधुनिक हो गए हैं। ऐसे हालात में थर्मल इमेजिंग सिस्टम को सेना की 'रात की आंख' (नाइट आई) कहा जाता है। सैन्य स्तर के नाइट-विजन (रात में देखने वाले) कैमरों में जर्मेनियम लेंस का कोई दूसरा मजबूत विकल्प पूरी दुनिया में मौजूद नहीं है। यह लेंस सीमा पर गश्त करने, दूर से सटीक निशाना लगाने वाले स्नाइपर साइट्स, ड्रोन चलाने और मिसाइल को सही रास्ता दिखाने (गाइडेंस सिस्टम) में सैनिकों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। यह सैन्य अभियानों के लिए सबसे जरूरी और संवेदनशील हिस्सा माना जाता है।


आरआरपी डिफेंस कंपनी क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
आरआरपी डिफेंस गोवा में स्थित एक निजी कंपनी है जो खास तौर पर रक्षा उपकरण बनाती है। यह कंपनी थर्मल कैमरे, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और निगरानी प्रणालियों के क्षेत्र में बहुत ही बेहतरीन काम करती है। बीईएल की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से आरआरपी डिफेंस ही इन जर्मेनियम लेंसों को डिजाइन करेगी और बनाएगी। हाल के वर्षों में इस कंपनी ने स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने में बहुत मदद की है। बीईएल और आरआरपी के बीच पहले भी कई अहम रक्षा तकनीकों और मानवरहित प्रणालियों पर एक साथ काम करने के लिए बड़े समझौते हो चुके हैं।

यह नया रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता यानी देश में ही हथियार और उपकरण बनाने पर बहुत जोर दे रही है। यह 29.8 करोड़ रुपये का सौदा भारतीय सेना की मौजूदा नाइट विजन और थर्मल इमेजिंग क्षमता को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे भारतीय सेना को उच्च तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और देश की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से स्वदेशी, अचूक और मजबूत बन सकेगी।
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