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'लोकतंत्र को रूस को पैसा नहीं देना चाहिए': जर्मन मंत्री के बयान पर रूस का पलटवार- भारत से संबंधों पर दें ध्यान

Thu, 20 Jul 2023 08:21 PM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 20 Jul 2023 08:21 PM IST
सार

जर्मन वाइस चांसलर और आर्थिक मामलों एवं जलवायु कार्रवाई मंत्री रॉबर्ट हेबेक भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने सात देशों के समूह (जी-7) और उनके सहयोगियों द्वारा समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी कच्चे तेल पर मूल्य सीमा लगाने की पृष्ठभूमि में यह बात कही।

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German minister Says Democracies should not put money into Russia hands, Russian envoy hits back
जर्मनी के आर्थिक मामलों और जलवायु कार्रवाई मंत्री रॉबर्ट हेबेक। - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के दौरे पर आए जर्मनी के मंत्री रॉबर्ट हेक (Robert Haeck) ने दुनियाभर के लोकतांत्रिक देशों से रूसी आक्रामकता की निंदा करने पर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह करते हुए गुरुवार को कहा कि उन्हें रूस को अधिक श्रेय और धन देने के लिए प्रतिबंध प्रणाली का उपयोग करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध को बढ़ावा मिलेगा।

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जर्मन वाइस चांसलर और आर्थिक मामलों एवं जलवायु कार्रवाई मंत्री रॉबर्ट हेबेक भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने सात देशों के समूह (जी-7) और उनके सहयोगियों द्वारा समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी कच्चे तेल पर मूल्य सीमा लगाने की पृष्ठभूमि में यह बात कही।
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आज सुबह नई दिल्ली में इंडो-जर्मन बिजनेस फोरम (Indo-German Business Forum) से इतर पत्रकारों से बात करते हुए जर्मन मंत्री ने कहा, "यह जाहिर है कि यूरोपीय पक्ष यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता को अभूतपूर्व मानता है। इसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी यूरोपीय शांति व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। यह एक ऐसी घटना है जिसने यूरोप में सब कुछ बदल दिया है। मैं जानता हूं कि बेशक यूरोप एशिया से थोड़ा दूर है। फिर भी, दूसरी ओर यह इतना महत्वपूर्ण है कि मैं दुनियाभर के सभी लोकतंत्रों से अपनी भाषा और राजनीतिक स्थिति में स्पष्ट करने का आग्रह करता हूं कि यह स्वीकार्य नहीं है।"
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हेबेक ने कहा, यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। हमने इसके खिलाफ प्रतिबंधों और यूक्रेन के लिए सैन्य समर्थन के साथ जवाब दिया। प्रतिबंध प्रणाली का मतलब है कि हमने तेल के व्यापार पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन इस पर मूल्य की एक सीमा है। इसका मतलब है कि आपको कच्चा तेल खरीदने की अनुमति है... ठीक है। यह प्रतिबंध प्रणाली के अंतर्गत है। लेकिन इससे पैसा कमाना, रूस में और अधिक पैसा लाना, इससे लाभ उठाने के लिए इस प्रतिबंध प्रणाली का उपयोग करना, इसका विचार नहीं है।
 
मूल्य सीमा (Price Cap) पांच दिसंबर, 2022 को जी-7 देशों और उनके सहयोगियों द्वारा लगाई गई थी। सात देशों के समूह ने रूसी समुद्री कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल तय करने पर सहमति व्यक्त की थी। इस मूल्य सीमा के माध्यम से उन्होंने रूस के राजस्व को सीमित करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने की मांग की कि वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति बनी रहे।

रूसी दूत अलीपोव ने दिया यह जवाब
इस बीच भारत में रूसी दूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि जर्मन मंत्री भारत-जर्मनी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बेहतर प्रयास करेंगे। अलीपोव ने ट्वीट किया, कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जर्मन वाइस चांसलर रॉबर्ट हैबेक की भारत यात्रा का एक लक्ष्य रूस-भारत सहयोग पर चर्चा करना है। बेहतर होगा कि वह भारत-जर्मनी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करें, इसके बजाय जैसा कि उन्होंने सोच रखा है। रूसी दूत ने ट्वीट किया, दुर्भाग्य से जर्मनी ने यूरोप में सुरक्षा मुद्दों पर स्वतंत्र स्थिति छोड़ दी है, जिससे यूक्रेनी संघर्ष में उसकी आवाज़ अप्रासंगिक हो गई है।


जर्मन दूतावास ने पहले कहा था, अपने प्रवास के दौरान वाइस चांसलर हेबेक के भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ-साथ विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करने की उम्मीद है। हेबेक दिल्ली और मुंबई में कई भारत-जर्मन संयुक्त उद्यमों का दौरा करेंगे। अपनी यात्रा के अंतिम चरण में हेबेक गोवा में जी-20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।

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