फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   General Reservation Bill, 124th Amendment to the Constitution will be passed by the President

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तुरंत मिलेगा सवर्णों को आरक्षण? जानें अब आगे क्या होगा

Thu, 10 Jan 2019 12:07 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अजय सिंह Updated Thu, 10 Jan 2019 12:07 AM IST
विज्ञापन
General Reservation Bill, 124th Amendment to the Constitution will be passed by the President
राज्यसभा

संविधान के 124वें संशोधन के लिए राज्यसभा में जोरदार बहस के बाद बिल पास हो गया है। इस संशोधन के बाद आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा। बुधवार को ही इसे राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास सीधे मंजूरी के लिए जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद राज्य इसके आधार पर आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को शैक्षणिक संस्थानों और नौकरियों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण दे सकेंगे।

विज्ञापन

 

विज्ञापन

 


राष्ट्रपति को भेजा जाएगा बिल


विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही संविधान संशोधन हो जाएगा। संशोधन मूल अधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 15 व 16 में है, इसलिए अनुच्छेद 368 (2) के तहत इसे राज्यों को अनुमोदन के लिए भेजने की जरूरत नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या तुरंत मिलेगा आरक्षण

संविधान संशोधन आरक्षण के लिए आधार है। अब सरकार के पास दो रास्ते हैं। एक कानून बनाकर जो कि इसमें काफी समय लगेगा। दूसरा शासकीय आदेश से तुरंत लागू हो सकता है।

क्या कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी

हां, क्योंकि इसे 9वीं अनुसूची में नहीं रखा। जानकारों के मुताबिक संविधान में आरक्षण का आधार सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ापन हो सकता है आर्थिक नहीं। इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि कोटा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता।
 

क्या हो सकता है सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो कोर्ट इस बात का परीक्षण करेगा कि यह संशोधन संविधान के मूल ढांचे के इतर तो नहीं। ऐसा होगा तो इसे निरस्त कर सकता है। अब तक आर्थिक आधार पर आरक्षण के जो मामले कोर्ट पहुंचे उसे इसी आधार पर निरस्त किया गया कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं था। अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर आर्थिक हालात को आरक्षण का आधार बनाने से सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण का आधार बदल जाएगा।



 

आइए जानते हैं क्या कहा नेताओं ने

केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को लोकसभा बोलते हुए स्पष्ट किया था कि इस संविधान संशोधन को दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद राज्यों के पास मंजूरी के लिए भेजे जाने की आवश्यकता नहीं है। बुधवार 9 जनवरी को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इसे दोहराया।

सिंघवी ने कहा कि इस विधेयक को जीएसटी की तरह राज्यों की मंजूरी के लिए भेजे जाने की जरूरत नहीं है। हालांकि सिंघवी ने माना कि इस बिल में संविधान की मूलभूत संरचना से खिलवाड़ किया गया है।

बिल संविधान के समानता के अधिकार, समान अवसर देने के अधिकार और हर नागरिक को उसके अधिकार के तहत उसे सम्मान देने के अधिकार का उल्लंघन करता है। सिंघवी ने माना कि इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद उच्चतम न्यायालय में चुनौती मिल सकती है और वहां इसके ठहर पाने की संभावना काफी कम है।

अभिषेक मनु सिंघवी की राय का समर्थन करते हुए कपिल सिब्बल ने भी कहा कि यह संविधान की मूल अवधारणा के खिलाफ है। कपिल सिब्बल ने इस तरह से आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान नहीं किया जा सकता।

हालांकि कांग्रेस इस बिल का समर्थन कर रही है। बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा ने भी सदन में चर्चा के दौरान इसे संविधान की मूल भूत संरचना से खिलवाड़ बताया। सतीश चंद्र मिश्रा ने इसे सवर्णों के साथ फ्रॉड बताया।

दोनों विधि वित्ताओं ने भी माना कि राज्य सभा की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक सीधे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए जाएगा। प्रो. राम गोपाल यादव ने भी कहा कि इस विधेयक पर कोई जनहित याचिका दायर होने के बाद सबकुछ धरा का धरा रह जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed