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अगले साल आम चुनाव है तो अब संसद की किसे पड़ी है

Sat, 07 Apr 2018 10:25 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Sat, 07 Apr 2018 10:25 PM IST
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general elections are due next year, so which party is concerned about running the parliament
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सत्ता पक्ष, सभापति और उपसभापति की काफी मशक्कत के बाद भी बीते बजट सत्र में संसदीय कामकाज न के बराबर हुआ। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का कहना है कि संसद को चलाने की जिम्मेदारी अकेले विपक्ष की नहीं है। सत्ता पक्ष की हमसे ज्यादा और आप उनसे पूछिए कि संसद क्यों नहीं चल रही है? इसी सवाल पर एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि अगले साल देश में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में आप संसद के चलने की बात कर रहे हैं? इसी सवाल के जवाब में शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत का कहना है कि हमने (शिवसेना) कोई हंगामा खड़ा नहीं किया। यह सत्ता पक्ष से पूछिए कि संसद क्यों नहीं चल रही है।
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हालांकि संसद में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हर संभव कोशिश की है। पिछले दो दिन से राज्यसभा के उपसभापति प्रो. पीजे कूरियन ने उच्च स्तर पर प्रयास किया है। संसदीयकार्य राज्यमंत्री अनंत कुमार, विजय गोयल ने फ्लोर प्रबंधन को लेकर कई तरह के राजनीतिक दांव चले।
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इसी तरह से राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने भी सरकार पर विपक्ष को सुनकर सदन चलाने का भरपूर दबाव बनाया। लेकिन टीडीपी, एआईएडीएमके के सांसदों दलों की नारेबाजी तथा विपक्षी दलों की रणनीति के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही। यहां तक कि भ्रष्टाचार निवारण संशोधन बिल को सत्ता पक्ष पारित कराने की पूरी कोशिश करता रहा और आखिरकार उसके हाथ खाली रहे।
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एनडीए के सांसद 23 दिन का वेतन भत्ता न लें

संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा को जानकारी दी कि संसद नहीं चलने के कारण एनडीए के सांसद 23 दिनों का वेतन और भत्ता नहीं लेंगे। हालांकि अनंत कुमार के बयान से न तो शिवसेना सहमत है और न ही भाजपा के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी। स्वामी ने कहा कि इसमें वह तो रोज संसद आते हैं। संसद नहीं चलती है तो उसमें उनकी क्या गलती है। वह मनोनीत सांसद हैं और आखिर वह अपना वेतन, भत्ता क्यों छोड़ देंगे। इस सवाल पर संसदीय कार्यराज्य मंत्री विजय गोयल कुछ नहीं बोले। वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी संसद परिसर में इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे बढ़ गए। 

शिवसेना सांसद अरविंद सांसद भी अनंत कुमार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। अधिक कुरेदने पर एक केन्द्रीय मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब संसद चल रही होती है, तो इस तरह के बयान आते हैं। सूत्र का कहना है कि अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होना है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इसको देखकर संसद में अपना व्यवहार कर रहे हैं। सासंद भी अपना हित देखकर टिप्पणी कर रहे हैं।

तो क्या अभी से लोकसभा चुनाव की तैयारी?

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एनडीए के घटक दल के एक मंत्री ने कहा कि हर बार लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां साइलेंट मूव लेती थी। इसबार 2019 के काफी पहले ऐसा हो गया है। बिहार से आने वाले सूत्र का कहना है कि जुलाई, अगस्त 2018 के बाद तेजी से यह ट्रेंड दिखेगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ही देखिए, वह 2019 के मूड में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपनी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं को काफी पहले से तैयारी करने का आह्वान कर चुके हैं।

टी सुब्बीरामी रेड्डी को भी संसद में टीडीपी और एआईएडीएमके के सांसदों का रुख, चंद्रबाबू नायडू के तेवर अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लग रहा है। कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य और उ.प्र. के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर के अनुसार संसद केवल विपक्ष के चाह लेने से नहीं चलती। संसद को चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष से ज्यादा सरकार की है। केन्द्र की सरकार अपनी नाकामियों से घबरा रही है।

इसके बरक्स कुछ दिन पहले लोजपा के प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान की नाराजगी सामने आई थी। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेन्द्र कुशवाहा राष्ट्रीय जनता दल के करीब जा रहे हैं। शिवसेना के लगातार भाजपा के खिलाफ बयान आ रहे हैं। टीडीपी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देने का आरोप लगाकार भाजपा से नाता तोड़ लिया है औ टीडीपी प्रमुख तथा राज्य के मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं। इसके सामानांतर विपक्ष अपनी एकजुटता के सभी उपाय कर रहा है।

कर्नाटक में जिसके भी हाथ लगे बाजी

कर्नाटक घूमकर भाजपा के एक केन्द्रीय मंत्री को वहां पार्टी के सत्ता में लौटने की पूरी उम्मीद दिखाई दे रही है। कर्नाटक के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने भाजपा को विजय दिलाने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। सूचना है कि 25 अप्रैल से 10 मई तक कर्नाटक में मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस की सरकार सत्ता में लौटती दिखाई दे रही है। सुष्मिता देव का कहना है कि कर्नाटक में जोरदार राजनीतिक घमासान होगा। दोनों पार्टियों के अपने-अपने अलग दावे हैं।

लेकिन दोनों दलों के अगली पंक्ति के नेता कर्नाटक के चुनाव काफी अहम मान रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं के अनुसार कर्नाटक का नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आने के बाद भाजपा की तेजी से उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। इसके बाद भाजपा म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भी फिसलेगी और 2019 में उसकी स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी। वहीं भाजपा के नेताओं के अनुसार कर्नाटक विधानसभा का चुनाव राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद हो रहा है। यह चुनाव भाजपा जीत रही है और इसके बाद कांग्रेस पार्टी की छवि को करारा झटका लगेगा। बस थोड़ा इंतजार कीजिए।
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