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भोपाल में साध्वी के इतिहास के मुकाबले दिग्विजय की सोशल इंजीनियरिंग

Wed, 24 Apr 2019 11:08 PM IST
अमर शर्मा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 24 Apr 2019 11:08 PM IST
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general election 2019 Digvijay singh social engineering versus sadhvi pragya singh history in Bhopal
दिग्विजय सिंह-साध्वी प्रज्ञा (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
भोपाल जो भाजपा का गढ़ है वहां इस बार पार्टी के सामने कांग्रेस की कड़ी चुनौती है। इतिहास की विद्यार्थी रही भोपाल की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का इतिहास मध्य प्रदेश (म.प्र.) के पूर्व बी.टेक. मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल इंजीनियरिंग का क्या सामना कर पाएगा यह बड़ा सवाल है। बताते हैं इसके कारण पूरे देश में तीन चरण के मतदान के बाद भाजपा को यहां खास पसीना बहाना पड़ रहा है। भाजपा मुख्यालय के एक सूत्र का मानना है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर के हेमंत करकरे पर दिए बयान ने पूरे देश में भाजपा को बैक फुट पर ला दिया। राममंदिर आंदोलन से जुड़े एक पूर्व सांसद को भी इसमें खोट नजर आ रहा है। इलाहाबाद के संघ से जुड़े सूत्र का कहना है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर का एक के बाद एक बयान परेशानी बढ़ा रहा है।
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प्रज्ञा सिंह ठाकुर का अयोध्या में बाबरी मस्जिद को लेकर दिया गया बयान भी भाजपा की मुसीबत बढ़ा रहा है। तकनीकी रूप से समस्या बढ़ रही है। यह स्थिति प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कई बार समझाने, बताने के बाद आ रही है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बचाव भी सवालों को कम नहीं कर पा रहा है। भोपाल और म.प्र. के भाजपा नेता ही दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं।
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दिग्विजय सिंह की इंजीनियरिंग

इसके समानांतर कांग्रेस के भोपाल से प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने राजनीतिक अंदाज में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हालांकि दिग्विजय का मंच पर एक युवक को बुलाकर उसके खाते में 15 लाख रुपये आने का सवाल पूछना काफी मंहगा पड़ गया।
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दिग्विजय का पूरा कार्यक्रम इसमें हंसी का पात्र बन गया, लेकिन भोपाल जैसे भाजपा के गढ़ में वह फिर भी मंझे राजनेता की तरह चल रहे हैं। वह शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती से लेकर हर सामाजिक समीकरण को साधने में लगे हैं। वैसे भी म.प्र. में कांग्रेस की सरकार है और सूत्र बताते हैं कि दिग्विजय को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भोपाल सीट को लेकर कांग्रेस की भीतरघात की संभावना बहुत कम हो गई है। 

अब साध्वी न तो उगलते बन रही और निगलते

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हेमंत करकरे, दिग्विजय, साध्वी प्रज्ञा (फाइल) - फोटो : Amar Ujala

अब साध्वी न तो उगलते बन रही और निगलते

भाजपा की समस्या दोहरी है। एक तरफ संजर की उम्मीदवारी रद्द तो दूसरी तरफ साध्वी की उम्मीदवारी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है। बाबरी मस्जिद बयान को जहां जिला निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना है, वहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर के जवाब से संतुष्ट नहीं है। भाजपा के वकीलों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है। 

ऊपर से इसके पूरे आसार हैं कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर के ऊपर धाराएं बढ़ा दी जाएं। ऐसे में भाजपा के सामने आगे कुआं, पीछे खाई है। यदि प्रज्ञा सिंह ठाकुर को लेकर तकनीकी समस्या खड़ी हो जाती है इसका असर पूरे देश में अगले चरणों के भाजपा चुनाव प्रचार पर भी पड़ सकता है। यह एक तरह से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए बीच चुनाव में ही मुंह की खाने वाली जैसी स्थिति हो जाएगी।
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