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बदलाव: जाम होते दिमाग को बचाने का जेन-जी इंतजाम, राहत के लिए अपनाए टेक कर्फ्यू और डिजिटल डिटॉक्स जैसे नए तरीके

Sun, 22 Mar 2026 05:18 AM IST
Shivam Garg अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Sun, 22 Mar 2026 05:18 AM IST
सार

लगातार स्क्रीन टाइम और डोपामिन की लत से जूझ रही जेन-जी अब डिजिटल डिटॉक्स और टेक कर्फ्यू अपनाकर मानसिक स्पष्टता पाने की कोशिश कर रही है। जानिए नया ट्रेंड...

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Gen Z Turns to Digital Detox and Tech Curfew to Combat Brain Fog
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी

विस्तार

लगातार स्क्रॉलिंग, शॉर्ट वीडियो और इंस्टेंट डोपामिन(तत्काल खुशी) के दौर में जेन-जी अब अपने ही डिजिटल व्यवहार के दुष्प्रभावों को पहचानकर उससे बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। न्यूरोसाइंस जहां चेतावनी दे रहा है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम दिमाग की कार्यक्षमता को कमजोर कर सकता है, वहीं युवा अब एनालॉग गतिविधियों, टेक कर्फ्यू, डिजिटल डिटॉक्स और ‘डोपामिन मैनेजमेंट’ जैसे वैज्ञानिक तरीकों के जरिये मानसिक स्पष्टता वापस पाने के प्रयोग कर रहे हैं।

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नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 1997 से 2012 के बीच जन्मी जेन-जी, जिसकी वैश्विक आबादी करोड़ों में है, तकनीक के साथ सबसे गहराई से जुड़ी पीढ़ी मानी जाती है। अमेरिका में औसतन एक जेन-जी युवा रोजाना 6 घंटे से अधिक समय टिकटॉक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बिताता है। इसी से जुड़ा शब्द ब्रेन रॉट अब सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका मतलब है लगातार डिजिटल खपत के कारण दिमाग में सुस्ती, ध्यान की कमी और मानसिक धुंधलापन। बर्लिन की 19 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर तिजियाना बुसेक का एक वीडियो, जिसे 2.9 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया, इस प्रवृत्ति का प्रतीक बन चुका है। वह अपने फॉलोअर्स से कहती हैं, आप सस्ते डोपामिन के आदी हो गए हैं।
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टेक-फ्री दुनिया  जब रेस्टोरेंट भी बन गए नो-फोन जोन
डिजिटल डिटॉक्स अब केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक ट्रेंड बनता जा रहा है। वॉशिंगटन डी.सी. का हश हार्बर रेस्टोरेंट ग्राहकों को प्रवेश से पहले फोन लॉक बैग में रखने को कहता है। रेस्टोरेंट के मालिक रॉक हार्पर कहते हैं, यहां फोन नहीं, इंसान पहले आते हैं। इस माहौल में लोग बोर्ड गेम्स खेलते हैं, बातचीत करते हैं और बिना किसी डिजिटल व्यवधान के समय बिताते हैं। इसी तरह यूरोप का ऑफलाइन क्लब और सिडनी का बिस्तेका जैसे स्थान भी लोगों को टेक-फ्री अनुभव दे रहे हैं।
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ऑफलाइन गतिविधियां बन रहीं दिमाग की दवा
विशेषज्ञों का मानना है कि दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए ऑफलाइन संतुलन जरूरी है। अर्ल मिलर के अनुसार सामाजिक संपर्क खासकर परिवार से बाहर के लोगों के साथ दिमाग को सक्रिय और संतुलित बनाए रखता है। लगातार मल्टीटास्किंग, जैसे एक साथ सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और टीवी देखना, दिमाग की कार्यक्षमता को कमजोर करता है। हैकेंसैक मेरिडियन स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर गैरी स्मॉल के अनुसार नई चीजें सीखना और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रशिक्षित करना, दिमाग को तेज बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है। लक्ष्य तय करना जैसे मासिक करिकुलम बनाना दिमाग में मजबूत न्यूरल नेटवर्क तैयार करता है, जो निष्क्रिय स्क्रॉलिंग के विपरीत सक्रिय सोच को बढ़ावा देता है।

अन्य वीडियो:-

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