वाराणसी में निर्मल गंगा का सपना जल्द होगा साकार, प्रदूषण मुक्त होगी गंगा: केंद्र
देश के अन्य शहरों में गंगा का निर्मल रूप बेशक अभी न देखने को मिले। लेकिन पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लोगों को गंगा का निर्मल स्वरूप जल्द नजर आएगा। केंद्र सरकार के जल संसाधन एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय का कहना है कि सरकार के प्रयास जमीन पर असर कर रहे हैं।
वाराणसी में स्वच्छ घाटों का आनंद उठा रहे लोग अब जल्द ही इस आध्यात्मिक नगरी में गंगा के प्रदूषण मुक्त जल यानि स्वच्छ जल का भी आनंद उठाएंगे।
नमामि गंगे अभियान के दिख रहे सकारात्मक परिणाम
गंगा एवं जल संसाधन मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी को प्रदुषण मुक्त बनाने के लिए वाराणसी में जो कदम उठाए गए थे। उसके सकारात्मक परिणाम नजर आ रहे हैं। जल्द ही वाराणसी के लोग निर्मल गंगा का आनंद उठा सकेंगे।
गंगा को निर्मल बनाने के लिए पीएम के संसदीय क्षेत्र में तमाम बड़े कदम उठाए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार वाराणसी शहर में वर्तमान में अनुमानित 300 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर 390 एमएलडी हो जाने का अनुमान है। तीन मौजूदा सीवेज उपचार संयंत्रों- दीनापुर, भगवानपुर और डीएलडब्ल्यू की वर्तमान क्षमता केवल 102 एमएलडी सीवेज की है जबकि बकाया सीवेज वरुणा और अस्सी नदियों के माध्यम से सीधे गंगा नदी में प्रवाहित हो जाता है।
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इस अंतर को पूरा करने के लिए जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी और सरकार की जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 140 एमएलडी एसटीपी का संयंत्र दीनापुर में और 20 एमएलडी एसटीपी संयंत्र का गोइठा में निर्माण किया जा रहा है।
ये परियोजनाएं निर्माण के अंतिम चरण में हैं और मार्च 2018 से पहले काम करना शुरू कर देंगी। इसके अलावा हाइब्रिड वार्षिकता आधारित पीपीपी मॉडल के तहत 50 एमएलडी एसटीपी का रमना में निर्माण किया जा रहा है। जोकि अस्सी और बीएचयू क्षेत्र की सीवेज शोधन उपचार आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इस प्रकार कुल 412 एमएलडी की सीवेज उपचार क्षमता का सृजन होगा जो 2035 तक शहर की सीवेज प्रबंधन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
तैरते कचरे को दूर करने के लिए चल रहे हैं ट्रेश स्कीमर
गंगा में तैरने वाले कचरे की समस्या को दूर करने के लिए कई शहरों में पहले से ही ट्रेश स्कीमर चलाए गए हैं। वाराणसी में ये स्कीमर अप्रैल 2017 से कार्य कर रहे हैं। तो गंगा के आसपास के क्षेत्रों की सफाई के लिए भारत सरकार ने पिछले वर्ष नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत वाराणसी के 84 प्रतिष्ठित और विरासत घाटों की साफ-सफाई का काम शुरू किया, जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाए दे रहे हैं।
गंदगी दूर करने के लिए 20.07 करोड़ की लागत से 153 सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए विभिन्न एजेंसियों को काम सौंपा गया है जिसमें से 109 शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और 15,000 से 20,000 लोगों द्वारा इनका रोजाना इस्तेमाल किया जा रहा है।
26 स्थानों पर घाट सुधार के लिए मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का द्वावा है कि उसके प्रयासों के बदौलत अगले मार्च के बाद निर्मल गंगा का सपना वाराणसी में हकिकत बन जाएगा।