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पूरी दुनिया ने सुना, लेकिन गांधीजी ने नहीं सुना था पंडित नेहरू का वो ऐतिहासिक भाषण, ये थी वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 15 Aug 2018 06:46 AM IST
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आज देश स्वतंत्रता दिवस की 72वीं वर्षगांठ मना रहा है। 71 साल पहले आज ही के दिन भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली थी। 14-15 अगस्त की आधी रात को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण के साथ देश की आजादी की घोषणा की थी। उनके इस ऐतिहासिक भाषण को 'ट्रिस्ट विद डेस्टनी' के नाम से जाना जाता है।
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नेहरू के उस भाषण को लगभग देश के हर नागरिक ने सुना था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाकर राष्ट्रपिता की उपाधि पाए महात्मा गांधी ने ही उस भाषण को नहीं सुना था।
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जवाहरलाल नेहरू के भाषण से पहले रात के 11 बजे 'वंदे मातरम्' गाया गया और उसके बाद पंडित नेहरू ने अपने भाषण की शुरुआत की। लेकिन आजादी की लड़ाई में हर वक्त नेहरू के साथ रहे महात्मा गांधी ने ही उनके ऐतिहासिक भाषण को नहीं सुना। दरअसल, इसका कारण ये है कि उस दिन गांधीजी रात 9 बजे ही सोने चले गए थे, जिसकी वजह से वो उस ऐतिहासिक क्षण के गवाह नहीं बन सके।
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पंडित नेहरू ने अपने भाषण में कहा था 'स्वतंत्रता के जन्म से पहले, हमने हाड़तोड़ श्रम के सारे दर्द सहे हैं और हमारे दिल इस दुख की याद से सिहर उठते हैं। उनमें से कुछ दर्द अब भी जारी हैं। फिर भी, भूतकाल खत्म हो चुका है और अब भविष्य ही है जो हमारी ओर देख रहा है। लेकिन ये भविष्य आराम करने या चैन से बैठने का नहीं है, बल्कि सतत प्रयास करने का है ताकि हमारे द्वारा बारम्बार की गई प्रतिज्ञा, जो आज एक बार फिर वही प्रतिज्ञा करेंगे, उसे पूरा कर सकें।'
उन्होंने अपने भाषण में महात्मा गांधी का भी नाम लेते हुए कहा था 'इस दिन हम सर्वप्रथम इस स्वतंत्रता के वास्तुकार, हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करते हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता की मशाल को उठाया और हमारे ऊपर छाये हुए अंधेरे को दूर किया और भारत के पुराने गौरव को स्थापित किया। हम नासमझी में अक्सर उनके संदेश से भटक जाते हैं, लेकिन न केवल हम बल्कि आने वाली पीढियां उनके संदेश को याद रखेंगी और भारत के इस महान सपूत के अद्वितीय विश्वास और शक्ति तथा साहस और विनम्रता को दिल में संजो कर रखेगी। हम कभी भी इस स्वतंत्रता की मशाल बुझने नहीं देंगे, चाहे कितनी ही तेज हवा या तूफानी आंधी आ जाये।'