{"_id":"600f76d58ebc3e08be41775e","slug":"gandhian-maulana-wahiduddin-khan-supporter-of-non-violence-honored-with-padma-vibhushan","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहिंसा के समर्थक गांधीवादी मौलाना वहीदुद्दीन को पद्म विभूषण से किया गया सम्मानित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अहिंसा के समर्थक गांधीवादी मौलाना वहीदुद्दीन को पद्म विभूषण से किया गया सम्मानित
Tue, 26 Jan 2021 07:26 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 26 Jan 2021 07:26 AM IST
विज्ञापन
Wahiduddin Khan
- फोटो : wikipedia.org
केंद्र सरकार गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पद्म अवार्ड का एलान कर दिया है। सरकार की तरफ से जारी की गई लिस्ट के मुताबिक सात लोगों को पद्म विभूषण, 10 लोगों को पद्म भूषण और 102 लोगों के पद्म श्री अवार्ड दिए जाएंगे। इन तीनों कैटेगरी में मुस्लिम चेहरे भी सामने आए हैं। जिनमें सबसे बड़ा नाम मौलाना वहीदुद्दीन खान है। मौलाना वहीदुद्दीन का नाम पद्म विभूषण अवार्ड के चुना गया है।
विज्ञापन
कौन हैं मौलाना वहीदुद्दीन खान
मौलाना वहीदुद्दीन खान को पद्म विभूषण के चुना गया है। मौलाना बर्रे सगीर के मशहूर आलिमे दीन हैं। मौलाना की पहचान शांति के लिए काम करने वाली बड़ी हस्तियों में भी की जाती है। इन्होंने कुरान को आसान अंग्रेजी में अनुवाद किया और कुरान पर एक टिप्पणी भी लिखी। मुसलमानों में मौलाना को बहुत मकबूलियत हासिल है।
विज्ञापन
दिल्ली में रहने वाले मौलाना वहीदुद्दीन खान का जन्म एक जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। वे प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान और शांति कार्यकर्ता हैं। उन्हें सोवियत संघ के दौर में राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उन्होंने कुरान को सरल और समकालीन अंग्रेजी में अनुवाद किया है और कुरान पर एक टिप्पणी भी लिखा है और ये कई टेलीविजन चैनलों पर व्याख्यान देते रहते हैं।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बधारिया गांव में जन्मे मौलाना वहीदुद्दीन को इस्लामी विद्वान और मशहूर शांतिवादी कार्यकर्ता हैं। मौलाना वहीदुद्दीन को साल 2000 में पद्म भूषण से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा पूर्व सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड, मदर टेरेसा और राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार(2009), अबूजहबी में सैयदियाना इमाम अल हसन इब्न अली शांति अवार्ड (2015) से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
उन्हें दुनिया के 500 सबसे ज्यादा प्रभावी मुस्लिमों की सूची में भी शामिल किया जा चुका है। डेमिग्रुस पीस इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके वहीदुद्दीन ‘इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’, ‘कांसेप्ट ऑफ जिहाद’, ‘विमान अपहरण-एक अपराध’ जैसे अपने लेखों के लिए बेहद चर्चित रहे हैं।