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राष्ट्रपिता कैसे बने 'मोहन से महात्मा', पढ़ें उनका पूरा सफर और जिंदगी के उतार-चढ़ाव
Fri, 02 Oct 2020 12:24 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 02 Oct 2020 12:24 AM IST
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महात्मा गांधी
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसक विरोध की उनकी सीख को आज भी पूरी दुनिया में सम्मान के साथ न केवल याद किया जाता है, बल्कि उसका व्यापक रूप से पालन भी किया जाता है। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान स्व शुद्धिकरण और सत्याग्रह से शुरू उनके प्रयोग ने दुनिया को अहिंसक विरोध के रूप में प्रतिरोध का सबसे शक्तिशाली और कारगर हथियार दे डाला।
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गुजरात के काठियावाड़ के दीवान परिवार में जन्मे मोहनदास के महात्मा गांधी बन जाने की जीवनयात्रा बड़ी दिलचस्प है और प्रेरणादायी भी। पढ़ाई-लिखाई में औसत दुर्बल शरीर वाले बालक को 'सत्य के साथ प्रयोग' ने महामानव का आभामंडल दे दिया।
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आइए एक नजर राष्ट्रपिता के 'मोहन से महात्मा' तक के सफर पर
2 अक्तूबर, 1869: गुजरात के पोरबंदर में जन्म।
- 1882: कस्तूरबा से विवाह।
- 4 सितंबर 1888: उच्च अध्ययन के लिए इंग्लैंड गए।
- 6 नवंबर 1888: इंग्लैंड के इनर टैंपल में शामिल।
- 14 मई, 1892: काठियावाड़ की अदालत में वकालत शुरू, लेकिन विफल रहे।
- अप्रैल, 1893: दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा, दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी के कानूनी सलाहकार बने।
26 मई, 1893: अदालत में पगड़ी हटाने से इनकार किया, बाहर निकाले गए।
- 7 जून, 1893: पीटरमारित्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे से बाहर फेंके गए। अहिंसक प्रतिरोध का संकल्प लिया।
- 22 अगस्त, 1894: दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंडियन कांग्रेस की स्थापना।
- 1901-1902: कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में शामिल हुए। बंबई में वकालत की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
फरवरी, 1903: जोहानिसबर्ग में कानूनी कार्यालय खोला।
- 4 जून, 1903: इंडियन ओपिनियन का पहला अंक प्रकाशित।
- दिसंबर 1904: फीनिक्स बस्ती की स्थापना।
- जुलाई 1906: ब्रह्मचर्य का संकल्प लिया।
- 11 सितंबर, 1906: जोहानिसबर्ग के एंपायर शियर में सत्याग्रह शुरू, एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट (द ब्लैक एक्ट) का विरोध।
10 जनवरी, 1908: दक्षिण अफ्रीका में दो महीने की कैद।
- 16 अगस्त, 1908: जोहानिसबर्ग में सभाएं कीं, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जलाए गए।
- 14 अक्तूबर 1908: वॉक्सररस्ट में गिरफ्तारी, दो महीने की कारावास।
- 25 फरवरी, 1909: वॉक्सररस्ट में फिर गिरफ्तार, तीन महीने की कैद।
- 24 अक्तूबर, 1909: लंदन में दशहरा उत्सव में शामिल, जिसमें वीर सावरकर भी थे।
- 13-22 नवंबर, 1909: दक्षिण अफ्रीका गए। समुद्री यात्रा के दौरान हिंद स्वराज लिखी, लियो टॉलस्टॉय के 'अ लैटर टु अ हिंदू' का अनुवाद।
- जून, 1910: हर्मन कैलेनबख के साथ मिलकर टॉलस्टॉय फॉर्म की स्थापना।
- अक्तूबर, 1912: गोपालकृष्ण गोखले के साथ दक्षिण अफ्रीका का भ्रमण।
- 13 जनवरी, 1914: जनरल स्मैंट के वार्ता के बाद इंडिया रिलीफ एक्ट पास, सत्याग्रह स्थगित।
- 19 दिसंबर, 1914: लंदन होते हुए हिंदुस्तान लौटे।
17 फरवरी, 1915: रवींद्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन पहुंचे।
- 20 मई, 1915: अहमदाबाद के करीब सत्याग्रह आश्रम की स्थापना।
- 26 जून, 1915: 'कैसर-ए-हिंद' स्वर्ण पदक मिला।
- 26 दिसंबर, 1916: लखनऊ के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार जवाहरलाल नेहरू से मिले।
- अप्रैल, 1917: बिहार के चंपारण में नील पर कर के खिलाफ सत्याग्रह। गिरफ्तारी हुई, फिर रिहा किए गए।
जून, 1917: अहमदाबाद के करीब साबरमती आश्रम की स्थापना।
- 15 मार्च, 1918: गुजरात के मिल मालिकों और मिल कामगारों का विवाद हल करने के लिए पहली बार विश्वास।
- 24 फरवरी, 1919: रॉलेट एक्ट के खिलाफ सत्याग्रह की प्रतिज्ञा।
- 13 अप्रैल, 1919: जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में उपवास।
- 7 सितंबर, 1919: नवजीवन का प्रकाशन शुरू।
- 8 अक्तूबर, 1919: यंग इंडिया का पहला अंक निकला।
- 1 अगस्त, 1920: अंग्रेज सरकार को 'कैसर-ए-हिंद' पुरस्कार वापस लौटाया, असहयोग आंदोलन शुरू।
- 31 जुलाई, 1921: मुंबई में विलायती कपड़ों की होली।
- 22 सितंबर, 1921: देश की गरीबी देखकर सिर्फ आधी धोती पहनने का संकल्प लिया।
- 19 नवंबर, 1921: प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा पर पांच दिन का उपवास।
- 24 दिसंबर, 1921: सामूहिक सविनय अवज्ञा। कांग्रेस ने गांधी जी को फैसले के अधिकार दिए।
29 जनवरी, 1922: गुजरात के बारदोली तालुका में लगान के खिलाफ सविनय अवज्ञा।
- 4 फरवरी, 1922: संयुक्त प्रांत चौरी-चौरा में दंगे के बाद आंदोलन स्थगित।
- 10 मार्च, 1922: यंग इंडिया में प्रकाशित लेख पर गिरफ्तारी। छह साल का कारावास।
- 3 फरवरी, 1928: साइमन कमीशन का बहिष्कार।
- 27-31 दिसंबर, 1929: लाहौर के कांग्रेस अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' और विधान परिषद का बहिष्कार।
- 26 जनवरी, 1930: पूर्व स्वतंत्रता का एलान।
- 6 अप्रैल, 1930: दांडी के समुद्र तट पर नमक कानून तोड़ा।
- 5 मार्च, 1931: गांधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर। सविनय अवज्ञा आंदोलन खत्म।
- सितंबर-दिसंबर, 1931: लंदन में द्वितीय गोलमेज कॉन्फ्रेंस में शामिल।
25 जून, 1934: पूना में गांधी जी की कार पर बम फेंका गया।
- 30 अक्तूबर,1934: कांग्रेस से त्यागपत्र।
- 15 जनवरी, 1942: जवाहरलाल नेहरू को राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया।
- 8 अगस्त, 1942: कांग्रेस द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित। 'करो या मरो' के नारे के साथ सत्याग्रह।
- 10 फरवरी, 1943: वायसराय से वार्ता में गतिरोध दूर करने का दबाव बनाने को आगा खां पैलेस में 21 दिन का उपवास।
- 22 फरवरी, 1944: कस्तूरबा का निधन।
- 2 सितंबर, 1946: जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।
- 2 जून, 1947: देश के विभाजन मंजूर करने के कांग्रेस के फैसले का विरोध।