फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Galwan valley clash India's attitude is tough, China should tell it how to behave now

भारत का रुख सख्त, चीन बताए उसे अब आगे कैसा व्यवहार रखना है

Wed, 17 Jun 2020 09:55 PM IST
Rajeev Rai शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Wed, 17 Jun 2020 09:55 PM IST
सार

  • प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री को चीन की हरकत मंजूर नहीं
  • विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समकक्ष वांग यी से जताया रोष
  • सीडीएस और तीनों सेना प्रमुख नई एसओपी के पक्ष में
  • आईटीबीपी को रक्षा मंत्रालय का हिस्सा बनाने की तैयारी

विज्ञापन
Galwan valley clash India's attitude is tough, China should tell it how to behave now
फाइल फोटो - फोटो : ANI

विस्तार

देश की जनता और सरकार चीन सीमा के पास अकारण शहीद हुए अपने कमांडिंग आफिसर सहित 20 सैनिकों के गम नहीं भूल पा रही है। यह संख्या अभी बढ़ सकती है, क्योंकि कंटीली लाठियों, ब्लंट आब्जेक्ट की मार से अभी कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हैं, उनका इलाज चल रहा है। चार सैनिकों के शव को बुधवार को सुबह हेलीकाप्टर से लाया गया है। इसका गुस्सा जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य में दिखाई दिया, वहीं उसी तरह का तेवर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह के बयान में रहा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बहुत सख्त लहजे में अपने चीन के समकक्ष वांग यी से फोन पर बात की। पूरे घटनाक्रम को चीन द्वारा सुनियोजित बताया।

विज्ञापन


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी समकक्ष वांग यी को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर हुई हिंसक झड़प की जानकारी देते हुए इसे चीन के सैनिकों की एकतरफा और सुनियोजित कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना का दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते पर गंभीर असर पड़ना तय है। विदेश मंत्री ने कहा कि चीन के पक्ष को अपनी कार्रवाई की समीक्षा करके सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए। दोनों पक्षों को ईमानदारी के साथ छह जून को सैन्य कमांडरों की बैठक में बनी सहमति और समझौते को लागू करना चाहिए। इसके अंतर्गत चीन को तत्काल वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपनी सेना को पीछे हटाना चाहिए और वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करते हुए किसी भी तरह की एक पक्षीय कार्रवाई से बचना चाहिए।

विज्ञापन

चीन ने जताई सहमति
विदेश मंत्री के साथ फोन पर वार्ता में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के साथ सीमा पर झड़प के मुद्दे को निष्पक्ष तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि वह समझौते के तहत जितना जल्द हो सकेगा, पीछे हटने और तनाव कम करने की कोशिश करेगा। विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत के दौरान जोर दिया कि मतभेदों से उबरने के लिए दोनों पक्षों को मौजूदा तंत्रों के जरिए बातचीत, परस्पर संवाद तथा समन्वय (तालमेल) की प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए।

चीन बताए आगे उसे कैसा रिश्ता रखना है?
सेना मुख्यालय के अफसरों में काफी गुस्सा है। सैन्य कमांडर पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर गलवां नाला (नदी) के पास साढ़े तीन घंटे तक चली झड़प को नहीं भूल पा रहे हैं। बताते हैं चीन की सेना की तैयारी पूर्व सुनियोजित थी। चीन की तरफ से थर्मल इमेजिंग ड्रोन के जरिए वहां का लगातार जायजा लिया जा रहा था। भारतीय सैन्य कमांडरों के अनुसार कमांडिंग आफिसर कर्नल संतोष बाबू नियम और प्रोटोकॉल के तहत वहां गए थे। भारतीय सैनिक निहत्थे थे और उनका मकसद दोनों देशों के सैन्य अफसरों में बनी सहमति की अनुपालना को देखना था। लेकिन भारतीय सैनिकों की तुलना में पांच गुणा से अधिक कंटीली लाठियों आदि से लैस सैनिकों ने घेरकर भारतीय सैन्य टुकड़ी पर धावा बोल दिया। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार यह अब तक की सबसे वीभत्स हिंसक घटना है। सैन्य सूत्र कहते हैं कि अब तो चीन को ही बताना है कि उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास किस तरह का रिश्ता रखना है। भारतीय सैन्य बल हर चुनौती के लिए तैयार है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना को अपनी मर्यादा का पता है और हमारे सुरक्षा बल कभी भी इसका उल्लंघन नहीं करते।

दुनिया के सामने चीन हुआ बेनकाब
राजनयिक गलियारे के सूत्रों का कहना है कि चीन एक बार फिर अपनी दोहरी और अविश्वसनीय नीति के लिए दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। भारत और चीन के तनाव पर दुनिया के देशों की नजर हैं। बताते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य को दुनिया के देशों ने सुना और जाना है। भारत ने इस निंदनीय घटना को अन्य देशों के साथ भी साझा करने का मन बनाया है। रूस के साथ भी भारत इसको साझा करेगा। 23 जून को भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्री के बीच में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बैठक होने वाली है। समझा जा रहा है कि विरोध स्वरुप भारत इस बैठक का बहिष्कार कर सकता है। भारत ने साफ किया है कि वह हर द्विपक्षीय मुद्दे का समाधान संवाद और चर्चा के माध्यम से करने का पक्षधर है, लेकिन अपने सीमाओं की रक्षा, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए वह पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड से लेकर अरुणाचल तक सैन्य बल हाई अलर्ट पर
चीन ने भारत से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पहले से ही सैनिकों का दबाव बना रखा है। उत्तराखंड में बाराहोती के पास उसके हेलीकाफ्टर भारतीय हवाई सीमा का उल्लंघन कर चुके हैं। लाहौल स्फीति से लेकर लेह लद्दाख में गलवां नाला (नदी), पैगॉग त्सो लेक, फिंगर प्वाइंट 4-8 तथा दुरबक श्योक दौलत बेग ओल्डी के पास तक वह सैन्य दबाव बनाए है। नाथुलॉ पास, से लेकर पूर्वी अरुणाचल तक चीन के सैनिकों की स्थिति, भारी सैन्य वाहन, हेलीकाप्टर आदि की आवाजाही देखकर भारतीय सेना भी उच्च स्तर की सतर्कता बरत कर चल रही है। वायुसेना, नौसेना किसी भी चुनौती से निबटने में सक्षम है। सैन्य तैयारी को केन्द्र में रखकर रांची की माऊंटेन डिवीजन से लेकर सुकना, लेह-लद्दाख, जम्मू-कश्मीर तक भारतीय सेना हर आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

एसओपी में हो सकता है बदलाव
भारतीय रक्षा मामलों के रणनीतिकार और सैन्य कमांडर चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपनाए जा रहे स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर को बदल सकते हैं। फिलहाल सीमा पर दोनों देशों के सैन्य अफसरों के बीच में वार्ता प्रक्रिया रोक दी गई है। सेना ने गश्त, निगरानी बढ़ा दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत के निहत्थे सैनिकों पर चीन के सैनिकों के हमले को देखते हुए यह बदलाव संभव है। हालांकि अभी भी भारतीय सुरक्षा मामले के विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोली न चलने के सिद्धांत को प्रमुखता दी जानी चाहिए, लेकिन इस तरह के कारगर उपाय हने चाहिए कि इस तरह के घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस तरह की स्थिति आने पर भारतीय सैनिकों को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। समझा जा रहा है कि भारतीय सेना के कमांडर इस साल की कमांडर कांफ्रेस में भी इसका समाधान निकाल लेंगे।

क्या आईटीबीपी को रक्षा मंत्रालय के अधीन लाना चाहिए?
भारत-चीन सीमा पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस(आईटीबीपी) तैनात रहती है। आईटीबीपी चीन के सुरक्षा बलों का सामना करने में काफी अभ्यस्त है। सूत्र बताते हैं कि यह भी एक विचारणीय प्रश्न है कि आईटीबीपी को रक्षा मंत्रालय के अधीन कर दिया जाना चाहिए। ताकि सैन्य बलों के तालमेल बनाकर भारत-चीन सीमा पर आवश्यकतानुसार गश्त और सुरक्षा हितों को पूरा किया जा सके। इस बारे में आईटीबी के सूत्र कहते हैं कि उनका कामकाज सैन्य बलों के समकक्ष ही है। वह उसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जैसा भारतीय सेना के सश जवान करते हैं। इसलिए इस तरह का बदलाव सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed