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Gaganyaan Mission: 21 अक्तूबर को पहली परीक्षण उड़ान भरेगा गगनयान, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी जानकारी
Wed, 11 Oct 2023 07:36 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 11 Oct 2023 07:36 AM IST
सार
अगले साल के अंत में मानव अंतरिक्ष उड़ान के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रखने वाले क्रू मॉड्यूल का परीक्षण करने के लिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से परीक्षण वाहन विकास उड़ान (टीवी-डी 1) को अंजाम दिया जाएगा।
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गगनयान
- फोटो : ISRO
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विस्तार
भारत के गगनयान मिशन के लिए 21 अक्तूबर को पहली परीक्षण उड़ान हो सकती है। इसके परिणामों के आधार पर बाकी परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षण में क्रू मॉड्यूल को परखा जाएगा, जिसमें क्रू एस्केप प्रणाली भी शामिल है। गगनयान का यह हिस्सा तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने में उपयोग होगा।
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केंद्रीय विज्ञान, तकनीक व अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह परीक्षण श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इसमें क्रू मॉड्यूल की उड़ान, उसे वापस उतारने और समुद्र से रिकवर करने की प्रक्रियाएं शामिल होंगी। मॉड्यूल को वापसी में बंगाल की खाड़ी में उतारा जाना है। इसे भारतीय नौसेना रिकवर करेगी।
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इसके लिए नौसैनिकों का गोताखोर दल बनाया गया है, एक जहाज को भी तैयार किया गया। चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग और सूर्य के लिए आदित्य यान एल1 के सफल प्रक्षेपण के बाद गगनयान मिशन भारत को खगोल विज्ञान पर काम कर रहे अग्रणी देशों में शामिल करवा सकता है।
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क्रू-एस्केप से बचेगा जीवन
इसरो ने बताया था कि फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन1 की तैयारियां जारी हैं। मिशन में किसी अनहोनी की दशा में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने में यह क्रू-एस्केप प्रणाली काम आएगी। उड़ान भरते समय अगर मिशन में गड़बड़ी हुई तो यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल के साथ यान से अलग हो जाएगी, कुछ समय उड़ेगी और श्रीहरिकोटा से 10 किमी दूर समुद्र में उतरेगी। इसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को नौसेना की ओर से समुद्र से सुरक्षित वापस लाया जाएगा।
अगले साल भेजा जा सकता है गगनयान
गगनयान भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है, इसे अगले साल के आखिर या 2025 की शुरुआत तक भेजा जा सकता है। 2024 में मानव रहित परीक्षण उड़ान होगी, जिसमें एक व्योममित्र रोबोट भेजा जाएगा।
इसरो इंजीनियरों का था अभिनंदन कार्यक्रम
सिंह ने चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशन में शामिल इसरो इंजीनियरों के अभिनंदन कार्यक्रम में बताया कि परीक्षण में मॉड्यूल को बाहरी अंतरिक्ष में लॉन्च करना, इसे पृथ्वी पर वापस लाना और बंगाल की खाड़ी में उतरने के बाद इसे पुनर्प्राप्त करना शामिल है। उन्होंने बताया कि नौसेना ने मॉड्यूल को पुनर्प्राप्त करने के लिए मॉक ऑपरेशन पहले ही शुरू कर दिया है।
"क्रू एस्केप" प्रणाली का भी होगा परीक्षण
जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि क्रू मॉड्यूल के साथ, टीवी-डी1 "क्रू एस्केप" प्रणाली का भी परीक्षण करेगा, जिससे अंतरिक्ष में चढ़ते समय अंतरिक्ष यान को किसी समस्या का सामना करने पर चालक दल को पृथ्वी पर वापस लाने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि परीक्षण की सफलता पहले मानवरहित "गगनयान" मिशन और अंततः, निचली-पृथ्वी की कक्षा में बाहरी अंतरिक्ष के लिए मानवयुक्त मिशन के लिए मंच तैयार करेगी।