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India-UK FTA: भारतीय महिलाओं को सशक्त बनाएगा एफटीए, देगा वैश्विक मंच: टेक्सटाइल और शिल्प कारोबार को नई उड़ान

Fri, 25 Jul 2025 06:22 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 25 Jul 2025 06:22 AM IST
सार

भारत-ब्रिटेन एफटीए से भारतीय महिलाओं को टेक्सटाइल, शिल्प और स्टार्टअप में मिलेगा वैश्विक बाजार, व्यापार बढ़ाने और फाइनेंस तक आसान पहुंच से आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया बल। अब वे यूके के 23 अरब डॉलर के बाजार में बिना शुल्क सामान भेज सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कदम से कदम मिला पाएंगी।

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FTA will change the future of women, Indian handicrafts will get a big opportunity in the UK market
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

भारत और ब्रिटेन ने कारोबारी रिश्तों में नया अध्याय लिखते हुए गुरुवार को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से वैश्विक बाजार में भारतीय महिलाओं को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह समझौता हथकरघा, पारंपरिक शिल्प, टेक स्टार्टअप और स्वच्छ निर्माण जैसे क्षेत्रों में काम कर रहीं महिलाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने का रास्ता खोलेगा। इससे उन्हें न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता और कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा, बल्कि यूके के 23 अरब डॉलर के बाजार में कपड़ा, चमड़ा और जूते जैसे उत्पाद शुल्क मुक्त भेजने की सुविधा भी मिलेगी। इस कदम से भारतीय महिलाएं बांग्लादेश, पाकिस्तान और कंबोडिया जैसे देशों की कंपनियों से बराबरी की होड़ में उतर सकेंगी। यह समझौता महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और वैश्विक पहचान की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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महिलाओं की शिल्प विरासत को मिलेगा सम्मान
भारत का जीवंत वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र महिलाओं के कौशल पर टिका है,फिर चाहे वह कांचीपुरम, भागलपुर, जयपुर या वाराणसी की बुनकर, कढ़ाई करने वाली, रंगाई करने वाली या डिजाइनर हों। इस एफटीए से अब वे वैश्विक फैशन और डिजाइन की दुनिया में अपनी पहचान कायम कर पाएंगी।

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कोल्हापुरी चप्पल को वैश्विक पंख
महाराष्ट्र और आस-पास के इलाकों में महिलाओं की हाथ से बनाई जाने वाली कोल्हापुरी चप्पलें अब यूके के प्रीमियम बाजार में बगैर शुल्क के बिक सकेंगी। इससे इनका ब्रांड बढ़ेगा, संस्कृति सुरक्षित रहेगी,आय बढ़ेगी और टिकाऊ चमड़े के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमईजी को बढ़त
इस एफटीए से देष में महिलाओं के चलाए जा रहे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमईजी) को अब सरल नियम,प्रशिक्षण समर्थन और व्यापार वित्त में मदद मिलेगी। गुजरात, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के क्लस्टर अब अधिक प्रतिस्पर्धी और यूके के लिए तैयार होंगे।

महिलाओं को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व का मौका
चाहे वो वाराणसी के करघे हों, हैदराबाद की डिजिटल प्रयोगशालाएं, राजस्थान के शिल्प समूह हो या फिर बंगलूरू के स्टार्टअप यह समझौता महिलाओं को वैश्विक व्यापार के केंद्र में लाता है। यह सिर्फ शुल्क में कटौती नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं के नेतृत्व, नवाचार और इतिहास गढ़ने का अवसर है।

FTA will change the future of women, Indian handicrafts will get a big opportunity in the UK market
भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट - फोटो : X @PiyushGoyal

पेट्रोल-डीजल की बड़ी गाड़ियों और महंगे ई-वाहनों पर ही ब्रिटेन को मिलेगी छूट
समझौते के तहत ब्रिटेन की वाहन कंपनियों को भारत में सिर्फ बड़े पेट्रोल-डीजल और महंगे इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर ही शुल्क में रियायत मिलेगी। घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश कंपनियों की मध्यम-छोटी कारों और कम कीमत वाले ईवी पर शुल्क छूट नहीं दिया जाएगा। समझौते के पहले पांच साल में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी।

दोनों पक्षों के वाहन आयात पर शुल्क कोटा 10 फीसदी 10 हो जाएगा, जो वर्तमान में 110 फीसदी है। प्रस्तावित कोटा और शुल्क में छूट बड़ी इंजन क्षमता श्रेणियों (3,000 सीसी पेट्रोल/2,500 सीसी डीजल से ऊपर) पर अधिक है। घरेलू कंपनियों को अपने मजबूती वाले क्षेत्र छोटे (1,500 सीसी तक) और मध्यम श्रेणी (1,500-3,000 सीसी पेट्रोल/2,500 सीसी तक डीजल) में विस्तार, नवोन्मेष और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। शुल्क घटाकर 10 फीसदी करने का काम कोटा के साथ पांच वर्षों में किया जाएगा। कोटा से बाहर शुल्क में 50 फीसदी की कटौती 10 साल में की जाएगी।

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93.5 लाख से महंगे वाहनों को ही राहत
40,000 ब्रिटिश पाउंड (करीब 46.5 लाख रुपये) से कम कीमत वाले वाहनों के लिए कोई बाजार पहुंच नहीं प्रदान की गई है। इससे बड़े पैमाने पर बाजार में आने वाले इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को पूर्ण सुरक्षा मिलती है, जिसमें भारत वैश्विक नेतृत्व चाहता है। ईवी में बाजार पहुंच 80,000 ब्रिटिश पाउंड (करीब 93.5 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाले महंगे वाहनों के लिए दी गई है।

ब्रिटेन से होने वाला आयात 60% बढ़ने का अनुमान
ब्रिटिश अधिकारियों का अनुमान है कि इस समझौते के बाद लंबी अवधि में भारत को होने वाला ब्रिटेन का निर्यात लगभग 60 फीसदी बढ़ जाएगा। इसमें एक खरीद सेगमेंट भी शामिल होगा, जिससे ब्रिटिश कंपनियां भारत में केंद्र सरकार के स्तर पर सरकारी अनुबंधों के लिए बोली लगा सकेंगी। ब्रिटिश वित्तीय सेवा कंपनियों के साथ घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के समान व्यवहार किया जाएगा।

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