खड़िया से क्लाउड सर्वर तक: कागज के पहाड़ से छुटकारा, भारत की पहली पेपरलेस जनगणना; हैकिंग-सेंधमारी से सुरक्षित
Census 2027: भारत की जनगणना अब पूरी तरह डिजिटल हो रही है। घर की खड़िया या कागज के भारी रजिस्टर की जगह मोबाइल एप और हाई-टेक क्लाउड सर्वर लेंगे। आंकड़ों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय साइबर कवच तैयार किया गया है, जो हैकिंग और सेंधमारी से सुरक्षित रहेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत में आबादी की गिनती का तरीका अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। घरों की दीवारों पर खड़िया या कोयले या फिर गेरू से निशान लगाने का दौर अब इतिहास बन चुका है। अब होने वाली जनगणना में तकनीक का ऐसा दखल होगा कि कागज-कलम की जगह मोबाइल ऐप, टैबलेट और हाई-टेक सर्वर लेंगे। इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी बल्कि आंकड़ों की सुरक्षा के लिए इसमें अभेद्य साइबर कवच भी तैयार किया गया है। पिछली जनगणना (2011) में लगभग 8577 मीट्रिक टन कागज और हजारों लीटर स्याही का इस्तेमाल हुआ था।
डाक विभाग ने देशभर के 17 हजार शहरों और गांवों तक जनगणना सामग्री पहुंचाने के लिए 18 प्रिटिंग प्रेसों से 27,500 मीट्रिक टन सामान ढोया था। इस बार तैयारी कागजी पहाड़ को छोटा करने की है। अब गणनाकर्मी के हाथ में भारी-भरकम रजिस्टर नहीं, बल्कि मोबाइल एप होगा। जैसे ही जानकारी एप में भरी जाएगी, वह तुरंत मुख्य सर्वर पर दर्ज हो जाएगी। इसका फायदा यह कि आंकड़ों के मिलान में लगने वाले वर्षों का वक्त बच सकेगा।
ये भी पढ़ें:- Census 2027: सरकार ने जारी किए जनगणना से जुड़े 33 सवाल, लिव-इन कपल्स को शादीशुदा मानने का प्रावधान; जानें सबकुछ
सात लाख डिजिटल मानचित्र तैयार
जनगणना की शुद्धता हमेशा सटीक मानचित्रों पर निर्भर रही है। 1872 में जब पहली बार गिनती हुई, तब हाथ से बने प्रशासनिक नक्शों का सहारा लिया गया था। आजादी के बाद 1961 में पहली बार जनगणना एटलस जारी किया गया। अब इस प्रक्रिया को वेब मैपिंग जीआईएस तकनीक से जोड़ा गया है। सरकार ने 7 लाख से ज्यादा डिजिटल मानचित्र पोर्टल पर अपलोड किए हैं। इनके जरिये घर-घर पहुंचकर गिनती करना आसान होगा और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी दूर-दराज का इलाका या घर गिनती से छूट न जाए।
हैकिंग रोकने के लिए बहुस्तरीय घेराबंदी
करोड़ों नागरिकों की निजी जानकारी डिजिटल माध्यम से सर्वर पर जाएगी। ऐसे में डाटा की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार ने इसके लिए विशेष साइबर सुरक्षा तंत्र तैयार किया है। डेटा सेंटर को अब अति महत्वपूर्ण सूचना ढांचा घोषित किया गया है। इसकी सुरक्षा का ऑडिट देश की प्रतिष्ठित एजेंसियां करेंगी। मोबाइल से सर्वर तक डाटा भेजने के दौरान उसे ऐसे सुरक्षित कोड (एंड-टू-एंड डेटा सुरक्षा) में बदला जाएगा जिसे हैक करना लगभग नामुमकिन होगा।
कोविड के बाद डिजिटल जनगणना की चुनौती
इतिहास गवाह है कि दो विश्व युद्धों, भीषण अकाल और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद हर दस साल में होने वाली जनगणना का सिलसिला कभी नहीं टूटा। लेकिन कोविड-19 वैश्विक महामारी ने इस पर पहली बार ब्रेक लगाया। मार्च 2020 में ही 2021 की जनगणना को स्थगित करना पड़ा था। उस समय इसे देश की पहली डिजिटल जनगणना के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन महामारी के चलते सारी तैयारियां धरी रह गईं। अब नए सिरे से होने वाली यह कवायद तकनीकी रूप से पहले से कहीं अधिक उन्नत होगी।
तकनीक का पहरा
डिजिटल जनगणना में आपकी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने कुछ ऐसी तकनीकें लगाई हैं, जो अदृश्य बॉडीगार्ड की तरह काम करेंगी...
- डिजिटल पहरेदार (डब्ल्यूएएफ): अगर कोई हैकर सर्वर में घुसने की कोशिश करता है तो यह तकनीक उसे पहचान कर तुरंत रास्ता रोक देती है।
- सुरक्षा की दीवार (फायरवॉल) : यह किसी किले की मजबूत दीवार जैसा है। यह पहले से तय नियमों के आधार पर तय करती है कि कौन सी जानकारी अंदर आएगी और कौन सी बाहर जाएगी। अनचाहे खतरों को यह दीवार के बाहर ही रोक देती है।
- घुसपैठ रोकने वाला तंत्र (एनआईपीएस) : यह एक आधुनिक अलार्म सिस्टम जैसा है। अगर नेटवर्क में कोई अनजान घुसपैठिया या वायरस घुसने की कोशिश करता है, तो यह उसे खत्म कर देता है।
- ट्रैफिक मैनेजमेंट (लोड बैलेंसिंग): जब करोड़ों लोग एक साथ अपना डाटा एप पर अपलोड करेंगे तो सर्वर पर बहुत बोझ पड़ता है। यह तकनीक उस बोझ को अलग-अलग मशीनों पर बराबर बांट देती है।
संबंधित वीडियो:-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.