Freight corridor: रेलवे के DFCCIL ने चीनी फर्म के खिलाफ 234 करोड़ रुपये का दावा ठोका
2020 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) ने अनुबंध समाप्त कर दिया। एक अधिकारी ने कहा कि कमजोर प्रदर्शन का हवाला देते हुए यह फैसला लिया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को एक चीनी फर्म के खिलाफ 234.25 करोड़ रुपये का जवाबी दावा पेश किया। चीनी कंपनी ने दो साल पहले अनुबंध समाप्त होने के बाद 443.77 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण से संपर्क किया है। चाइना रेलवे सिग्नलिंग एंड कम्युनिकेशन (CRSC) रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ने 2016 में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर सिग्नलिंग और दूरसंचार कार्य के लिए 471 करोड़ रुपये का ठेका हासिल किया था। 2020 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) ने अनुबंध समाप्त कर दिया। एक अधिकारी ने कहा कि कमजोर प्रदर्शन का हवाला देते हुए यह फैसला लिया था।
चीनी फर्म ने 2021 में सिंगापुर में इंटरनेशनल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स नियमों के तहत एक मध्यस्थता अपील दायर की थी। मध्यस्थता के अनुरोध के अनुसार, दावेदार (चीनी फर्म) ने जनवरी 2021 में 279 करोड़ रुपये का दावा दायर किया था। चीनी फर्म ने अब 443.77 करोड़ रुपये के संशोधित दावे के साथ आईटी स्टेटमेंट ऑफ क्लेम (एसओसी) पेश किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को डीएफसीसीआईएल से मध्यस्थ सदस्य के रूप में नामित किया गया है। चीनी फर्म ने पहले दिल्ली उच्च न्यायालय 2020 में एक याचिका दायर की थी। अदालत का आदेश डीएफसीसीआईएल के पक्ष में था। चीनी फर्म ने दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
अधिकारियों ने कहा कि हालांकि अनुबंध 2020 में समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कंपनी को 14 दिनों के नोटिस के बाद समाप्ति पत्र जारी किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन के मुद्दों के अलावा चीनी कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लॉजिक डिजाइन जैसे अनुबंध समझौते के अनुसार तकनीकी दस्तावेज प्रस्तुत करने में भी अनिच्छा दिखाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के पास परियोजना स्थल पर इंजीनियर या अधिकृत कर्मचारी नहीं थे जो एक गंभीर चिंता का विषय था। उन्होंने कहा कि कंपनी स्थानीय एजेंसियों के साथ गठजोड़ करने में भी विफल रही, जिसने काम की भौतिक प्रगति को नुकसान पहुंचाया।