Hindi News ›   India News ›   France Rafale deal with India Judicial inquiry in France begins for allegations of corruption and biasness

भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच: फ्रांस में भारत के साथ राफेल सौदे पर कार्रवाई शुरू

एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 04 Jul 2021 02:03 AM IST

सार

  • पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई प्रमुख हस्तियों से पूछे जाएंगे सवाल
  • 59,000 करोड़ रुपये के इस सौदे में हुई धांधली की शिकायत की जांच के लिए फ्रांसीसी जज की नियुक्ति
राफेल लड़ाकू विमान
राफेल लड़ाकू विमान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

भारत के साथ 59,000 करोड़ रुपये के राफेल जंगी विमानों के सौदे को लेकर अब फ्रांस में न्यायिक जांच शुरू हो गई है। फ्रांसीसी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एक जज को इस बेहद संवेदनशील सौदे की जांच का जिम्मा सौंपा है, जो सौदे में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की जांच करेंगे। फ्रांसीसी खोजी वेबसाइट मीडियापार्ट ने यह रिपोर्ट देते हुए कहा है कि इस मामले में देश की बड़ी हस्तियाें से पूछताछ की जा सकती है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में राफेल सौदे के समय राष्ट्रपति रहे फ्रांस्वा ओलांद और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी पूछताछ की जा सकती है। मैक्रों सौदे के वक्त वित्त मंत्री थे, ऐसे में उनके कामकाज को लेकर सवाल किए जाएंगे। वहीं, तत्कालीन रक्षा मंत्री और अब फ्रांस के विदेशी मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियान से भी पूछताछ हो सकती है। मीडियापार्ट के मुताबिक, इस न्यायिक जांच के आदेश फ्रांस की राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक (पीएनएफ) के दफ्तर ने दिए थे।


जांच में 2016 में विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन के 36 राफेल सौदे की जांच होगी। मीडियापार्ट ने कहा है कि 2016 में अंतर सरकारी सौदे की जांच की जाएगी, जिसे औपचारिक तौर पर इस साल 14 जून को शुरू किया गया था। इस जांच के आदेश फ्रांसीसी गैर सरकारी संगठन शेरपा की शिकायत और मीडियापार्ट की अप्रैल में सौदे में धांधली की रिपोर्टों के आधार पर दिए गए हैं। शेरपा को वित्तीय अपराध से जुडे़ मामलों में गहरी पैठ है।

2019 में दी गई थी पहली शिकायत, पीएनएफ प्रमुख ने दबा दी
मीडियापार्ट के पत्रकार यैन फिलिपपिन ने राफेल सौदे को लेकर एक के बाद एक कई रिपोर्ट दी थी। इसमें दावा किया गया था कि इस मामले में पहली शिकायत 2019 में दी गई थी, मगर तत्कालीन पीएनएफ प्रमुख एलियने हाउलेते ने इस शिकायत को दबा दिया था। यैन ने ट्वीट कर यह जानकारी देते हुए कहा, मीडियापार्ट की राफेल पेपर्स नाम से शुरू किए गए खुलासों के बाद आखिरकार न्यायिक जांच शुरू हो गई। अब पीएनएफ के नए प्रमुख जीन फ्रैंकोइस बोहर्ट ने जांच का समर्थन करने का फैसला किया है।

भारतीय बिचौलिए को दिए गए थे 9 करोड़ रुपये, डसॉल्ट ने नाकारा
मीडियापार्ट ने अप्रैल में देश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी द्वारा कराई गई जांच का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि दसॉल्ट एविएशन ने राफेल सौदे की एवज में भारतीय बिचौलिए को 10 लाख यूरो (करीब नौ करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। हालांकि, दसॉल्ट एविएशन ने भ्रष्टाचार के आरोपाें को खारिज कर दिया है और कहा है कि सौदे में किसी प्रकार का कोई उल्लंघन नहीं किया गया था।

यह हैै मामला
भारत की एनडीए सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांसीसी विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 59,000 करोड़ रुपये का करार किया था। इस सौदे से सात साल पहले कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए गठबंधन सरकार ने वायुसेना के लिए 126 मध्यम बहुआयामी युद्धक विमानों की खरीद के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, मगर योजना परवान नहीं चढ़ सकी।

कांग्रेस ने सरकार पर इस सौदे को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए थे। पार्टी का कहना था कि यूपीए सरकार द्वारा एक राफेल की कीमत 526 करोड़ रुपये तय करने के बावजूद एनडीए सरकार ने एक विमान को 1,670 करोड़ में खरीदा। हालांकि, इस सौदे में धांधली के आरोपों को सिरे से नकार चुकी है।

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