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केरल विधानसभा चुनाव: मुलायम की पार्टी भी है इधर चुनावी मैदान में
सुदीप ठाकुर/अमर उजाला, कुडंगलूर
Updated Wed, 04 May 2016 06:30 PM IST
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Kerala election
- फोटो : amar ujala
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मुलायम सिंह यादव और उनके मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती भले ही उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव हों। मगर सुदूर केरल में एक पार्टी अपने नेता के साथ ही सपा सुप्रीमो के नाम पर भी वोट मांग रही है।
दरअसल यह केरल विधानसभा चुनाव में हाथ आजमा रहा चौथा फ्रंट है। इसमें सपा के अलावा एक और पार्टी है सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीएफ)। त्रिशुर से करीब पैंसठ किलोमीटर दूर कुडंगलुर विधानसभा सीट पर पार्टी उम्मीदवार ए के मनफ के प्रचार अभियान में जुटे उनके चुनाव संयोजक अब्दुल मजीद कहते हैं, हम फोर्थ फ्रंट हैं।
पहला और दूसरा फ्रंट है यूडीएफ तथा एलडीएफ तीसरा एनडीए और चौथा हमारा फ्रंट है। उनका तर्क है कि हमें भले ही सीटें न मिले लेकिन हमारा वोट बढ़ रहा है। एसडीपीआई को पिछले पंचायत चुनाव में 40 सीटें मिली थीं।
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सपा केरल में 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और करीब 80 सीटों पर एसडीपीआई। पार्टी के पोस्टरों और बैनरों में पार्टी के नेताओं के साथ ही मुलायम सिंह यादव की तस्वीरे भी नजर आती हैं। एसडीपीआई असल में प्रभावशाली मुस्लिम संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का ही राजनीतिक फ्रंट है।
संघवाद से आजादी के नाम पर वोट
एर्णाकुलम और त्रिशुर के बीच स्थित इस छोटे से गांव में शायद ही कोई व्यक्ति आपको मिलेगा जो हिंदी बोल पाता हो। मगर आप अचानक लाउडस्पीकर पर सुनाई दे रहे 'संघवाद से आजादी' का नारा सुनकर चौंक सकते हैं।
यह गांव केरल की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नट्टिका विधानसभा सीट का हिस्सा है। मंगलवार शाम को यहां लेफ्ट पार्टी के इस पारंपरिक गढ़ में सीपीआई उम्मीदवार और मौजूदा विधायक गीता गोपी के समर्थक नुक्कड नाटक करते नजर आए। नाटक के दौरान ही एक पात्र हैदाराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के आत्महत्या कर लेने वाले छात्र रोहित वेमुला के द्वारा लिखे अंतिम पत्र का मलयालम में लिखा पूरा तर्जुमा पढ़ गया।
यों तो नाटक के पूरे संवाद मलयालम में ही बोले जा रहे थे, लेकिन रोहित वेमुला का जिक्र बार-बार आ रहा था। तभी नेपथ्य में खड़े एक कार्यकर्ता ने रोमन में लिखी हिंदी पढ़कर नारा लगाया, 'संघवाद से आजादी। मनुवाद से आजादी।' और उसके बाद तो हिंदी में पूरा गाना ही बजा दिया गया। वहां मौजूद युवा इंजीनियर रेखिल कहते हैं, कि यहां लोगों को हिंदी भले नहीं आती, लेकिन उन्हें रोहित वेमुला और जेएनयू में हुए विवाद के बारे में पता है। वह कहते हैं रोहित यहां के युवाओं के हीरो हैं।
असल में इस सीट पर अच्छी खासी दलित आबादी है। वैसे इस सीट से लेफ्ट उम्मीदवार गीता गोपी के मुकाबले कांग्रेस के के वी दासन और भाजपा के टीवी बाबू भी मैदान में हैं। वामपंथियों का पारंपरिक गढ़ होने के बावजूद एवनीसेरी त्रिशुर जिले की अकेली ऐसी पंचायत है, जहां भाजपा ने जीत दर्ज की थी। पंचायत की कुल 14 में से सात सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी तो कांग्रेस को चार और लेफ्ट फ्रंट को तीन सीटें मिलीं।
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दरअसल यह केरल विधानसभा चुनाव में हाथ आजमा रहा चौथा फ्रंट है। इसमें सपा के अलावा एक और पार्टी है सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीएफ)। त्रिशुर से करीब पैंसठ किलोमीटर दूर कुडंगलुर विधानसभा सीट पर पार्टी उम्मीदवार ए के मनफ के प्रचार अभियान में जुटे उनके चुनाव संयोजक अब्दुल मजीद कहते हैं, हम फोर्थ फ्रंट हैं।
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पहला और दूसरा फ्रंट है यूडीएफ तथा एलडीएफ तीसरा एनडीए और चौथा हमारा फ्रंट है। उनका तर्क है कि हमें भले ही सीटें न मिले लेकिन हमारा वोट बढ़ रहा है। एसडीपीआई को पिछले पंचायत चुनाव में 40 सीटें मिली थीं।
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सपा केरल में 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और करीब 80 सीटों पर एसडीपीआई। पार्टी के पोस्टरों और बैनरों में पार्टी के नेताओं के साथ ही मुलायम सिंह यादव की तस्वीरे भी नजर आती हैं। एसडीपीआई असल में प्रभावशाली मुस्लिम संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का ही राजनीतिक फ्रंट है।
संघवाद से आजादी के नाम पर वोट
एर्णाकुलम और त्रिशुर के बीच स्थित इस छोटे से गांव में शायद ही कोई व्यक्ति आपको मिलेगा जो हिंदी बोल पाता हो। मगर आप अचानक लाउडस्पीकर पर सुनाई दे रहे 'संघवाद से आजादी' का नारा सुनकर चौंक सकते हैं।
यह गांव केरल की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नट्टिका विधानसभा सीट का हिस्सा है। मंगलवार शाम को यहां लेफ्ट पार्टी के इस पारंपरिक गढ़ में सीपीआई उम्मीदवार और मौजूदा विधायक गीता गोपी के समर्थक नुक्कड नाटक करते नजर आए। नाटक के दौरान ही एक पात्र हैदाराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के आत्महत्या कर लेने वाले छात्र रोहित वेमुला के द्वारा लिखे अंतिम पत्र का मलयालम में लिखा पूरा तर्जुमा पढ़ गया।
यों तो नाटक के पूरे संवाद मलयालम में ही बोले जा रहे थे, लेकिन रोहित वेमुला का जिक्र बार-बार आ रहा था। तभी नेपथ्य में खड़े एक कार्यकर्ता ने रोमन में लिखी हिंदी पढ़कर नारा लगाया, 'संघवाद से आजादी। मनुवाद से आजादी।' और उसके बाद तो हिंदी में पूरा गाना ही बजा दिया गया। वहां मौजूद युवा इंजीनियर रेखिल कहते हैं, कि यहां लोगों को हिंदी भले नहीं आती, लेकिन उन्हें रोहित वेमुला और जेएनयू में हुए विवाद के बारे में पता है। वह कहते हैं रोहित यहां के युवाओं के हीरो हैं।
असल में इस सीट पर अच्छी खासी दलित आबादी है। वैसे इस सीट से लेफ्ट उम्मीदवार गीता गोपी के मुकाबले कांग्रेस के के वी दासन और भाजपा के टीवी बाबू भी मैदान में हैं। वामपंथियों का पारंपरिक गढ़ होने के बावजूद एवनीसेरी त्रिशुर जिले की अकेली ऐसी पंचायत है, जहां भाजपा ने जीत दर्ज की थी। पंचायत की कुल 14 में से सात सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी तो कांग्रेस को चार और लेफ्ट फ्रंट को तीन सीटें मिलीं।