समुद्र में चीन की हेकड़ी निकालने के लिए साथ आए भारत समेत चार देश
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अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के नौसेना के जनरल पहली बार रायसीना डायलॉग के जरिए एक साथ सामने आए और हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर में समुंद्री सुरक्षा, शांति, समृद्धि और स्वतंत्र भयरहित नौवहन को लेकर अपनी चिंता जताई है। अमेरिका के प्रशांत कमान के एडमिरल हैरी हैरिश ने इसे सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में साहसिक कदम उठाने पर भी जोर दिया। जापान के एडमिरल कात्सूतोशी क्वानो, ऑस्ट्रेलिया के वाइस एडमिरल टिम बैरेट और भारत के नौसेनाध्यक्ष एडमिरल लांबा ने अपनी चिंताएं जताई।
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने चतुष्कोणीय समूह के नौसैनिक समूह के जनरलों के रायसीना डॉयलाग के माध्यम से दिए गए संदेश को दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की हेकड़ी निकालने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। आब्जर्वर रिसर्च फाऊंडेशन द्वारा कराए इस संवाद को पिछले साल नवंबर के महीने में मनीला में चारों देशों के विदेश विभाग के संयुक्त सचिव के बीच बनी सहमति के बाद के स्वरूप में देखा जा रहा है। समझा जा रहा है कि इससे संयुक्त सैन्य अभ्यास और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ रही धमक को रोकने के लिए अन्य प्रयासों में तेजी आ सकती है। इस डॉयलाग में सभी जनरलों ने समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, शांति, समृद्धि और विकास को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून की अनुपालना और पारदर्शी व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया।
भारतीय नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने इस दौरान बोलते हुए समान विचारधारा वाले देशों के साथ नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल है। ऐसे में विश्वास की कमी और भय का वातावरण देखा जा रहा है। इसे दूर करने के लिए विश्वास बहाली के उपायों पर जोर देने की आवश्यकता है। ताकि समुद्री क्षेत्र में शांति की स्थापना के साथ-साथ भयरहित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। जनरल लांबा ने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन हो और पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाए।
साहसिक कदम उठाएंगे
साहसिक कदम उठाएंगे
अमेरिका के प्रशांत कमान के एडमिरल हैरी हैरिश ने कहा कि चतुष्कोणीय समूह ने काफी प्रगति की है। एडमिरल हैरिश ने कहा कि समुद्री सुरक्षा, शांति और स्वतंत्र नौवहन की भावी चुनौतियों को देखते हुए इस साल कुछ साहसिक कदम उठाए जाएंगे। एक सवाल के जवाब में एडमिरल हैरिश ने कहा कि यदि इस क्षेत्र में खुलापन, शांति और सुरक्षा का वातावरण हो तो अमेरिका के लिए इस क्षेत्र में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे में माना यह जा रहा है कि पिछले सालों की तरह अमेरिका इस बार भी दक्षिण चीन सागर में अपना जंगी बेड़ा, लड़ाकू विमान आदि भेज सकता है। वहीं जापान के एडमिरल कात्सूतोशी क्वानों ने कहा कि चीन पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में आक्रामक नीतियां अपना रहा है। वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन नहीं कर रहा है।
एडमिरल क्वानों ने कहा कि चीन की यह नीतियां उसे आइसोलेट करती जा रही है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में उनका देश विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन किया जाना चाहिए और पारदर्शिता अपनाने पर सभी देशों को जोर देना चाहिए। एडमिरल क्वानो ने कहा कि क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा के लिए चारों देशों की यह पहल पूरे विश्व समुदाय के लिए काफी अहम है। ऑस्ट्रेलिया के वाइस एडमिरल टिम बैरेट ने भी सभी देशों को मिलकर विश्वास का माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।