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Covid-19: लॉकडाउन तोड़ने पर दर्ज मुकदमों को यूपी के पूर्व डीजीपी ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Fri, 17 Apr 2020 05:38 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 17 Apr 2020 05:38 AM IST
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Former UP DGP vikram singh challenges lawsuits over breaking lockdown
supreme court - फोटो : ANI

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सरकारी आदेशों की अवहेलना पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) सेक्शन 188 में दर्ज हो रहे मामले रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट जेलों में बंद कैदियों में संक्रमण रोकने के लिए महामारी के समय जेल में उनकी भीड़ कम करने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई से बड़ी संख्या में नागरिक जेल भेजने पड़ेंगे।

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याचिकाकर्ता की मांग है कि लॉकडाउन के समय तक धारा 188 व अन्य छोटे अपराधों में शिकायतें व एफआईआर न दर्ज करने के लिए कहा जाए। विक्रम सिंह के अनुसार एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जेल बंदियों की भीड़ घटाने के लिए निर्देश दिए हैं, वहीं पुलिस द्वारा नई कार्रवाई से न्यायिक व्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है। दोषी साबित होने पर लोगों को जेल भेजना पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस पर भी इन कार्रवाइयों से बोझ बढ़ा है।
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उन्होंने साफ किया कि वे लॉकडाउन तोड़ने को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं, जो लोग जानबूझकर नियम तोड़ रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

क्या है धारा-188

आईपीसी की धारा 188 में उन लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाती है, जिनके द्वारा नियमों का पालन न करने से मानव जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। इसके तहत दोषी को छह महीने तक जेल व एक हजार जुर्माने का प्रावधान है।

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दिल्ली में 848, यूपी में 15379 एफआईआर

एनजीओ सेंटर फॉर अकाउंटिबिलिटी एंड सिस्टमेटिक चेंज के अनुसार दिल्ली के 50 थानों में 23 मार्च से 13 अप्रैल तक 848 एफआईआर दर्ज हुईं। यूपी सरकार के ट्विटर हैंडल के अनुसार 15379 एफआईआर में 48,503 लोगों पर दर्ज की गई हैं। राजधानी और उससे सटे प्रदेश के हालात से देश के बाकी हिस्सों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।

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