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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह बोले, प्रधानमंत्री को चीन की षडयंत्रकारी कोशिश को सहायता नहीं पहुंचानी चाहिए

Mon, 22 Jun 2020 11:58 AM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 22 Jun 2020 11:58 AM IST
सार

  • शालीन भाषा में मनमोहन ने दिखाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आईना
  • भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता
  • वक्त की चुनौतियों का सामना करे केंद्र सरकार, जनादेश से विश्वासघात ठीक नहीं

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Former PM Manmohan Singh said, Prime Minister Modi should not help China's conspiratorial effort
Narendra Modi and Manmohan Singh - फोटो : File Photo

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत दी है। मनमोहन ने कहा है कि प्रधानमंत्री को अपने बयान से चीन के षडयंत्रकारी रुख को बल नहीं देना चाहिए। अपनी शालीन भाषा में मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री को कूटनीति, विदेश नीति के मामले में आईना दिखाया है।

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पूर्व प्रधानमंत्री सिंह का यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रविवार को सीडीएस, तीनों सेना प्रमुखों के साथ हुई बैठक के बाद आया है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्वदलीय बैठक में दिए गए वक्तव्य और 17 घंटे बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी की गई सफाई के बाद सामने आए हैं।
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। प्रधानमंत्री का इस बैठक में बयान अपने ही विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के बयान से पूरा विरोधाभास रखता है।
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इतना ही नहीं 17 घंटे बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से आई सफाई भी न तो वर्तमान और पूर्व सैन्य कमांडरों के गले उतर रही है और न ही कूटनीति के जानकारों पूर्व और वर्तमान राजनयिक इससे इत्तेफाक रख पा रहे हैं।

कैसे चीन की षडयंत्रकारी कोशिश को बल दे रहा है प्रधानमंत्री का वक्तव्य?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की जमीन पर न तो कोई घुसपैठ हुई है, और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी के कब्जे में है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान और काफी कुछ कहा है। लेकिन चीन ने इस बयान को हाथों हाथ ले लिया है। वहां की सोशल मीडिया, वीचैट एप, वहां के अखबार, न्यूज में तेजी से वायरल हुआ है। चीन का षडयंत्र भी देखिए।

प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से 17 घंटे बाद दी गई सफाई पर पड़ोसी देश, उसके विदेश मंत्रालय ने ध्यान ही नहीं दिया। उसे एक तरह से खारिज कर दिया। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के बयान के इस अंश को चीन लद्दाख से जोड़ रहा है।

कुछ पूर्व राजनयिक इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण भी मान रहे हैं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक राजनयिक ने कहा कि विदेश मंंत्री एस जयशंकर जैसा कूटनीति का मझा हुआ व्यक्तित्व और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला जैसे डायनमिक लोगों के होने के बाद भी इस तरह की बड़ी भयानक चूक हुई है।

यह तो बहुत बड़ी भूल है। पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव के अनुसार प्रधानमंत्री के वक्तव्य ने भारत-चीन सीमा विवाद को 60-70 के दशक में पहुंचा दिया है। इसी को आधार बनाकर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'सरेंडर मोदी' कहा है।

चीन ने घुसपैठ करके कब्जा किया है

यह जमीनी हकीकत है। चीन ने गलवां नदी घाटी क्षेत्र में में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलसीए) के इधर भारतीय भू-भाग को पूरी तरह से खाली नहीं किया है। सैन्य सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच में 15-16 जून को हिंसक झड़प हुई थी।

हिंसक झड़प का कारण ही भारतीय भू-भाग को चीन की घुसपैठ से मुक्त कराना था। यह गलवां नदी घाटी का किनारा ही था। चीन ने पैंगाोंग त्सो के आसपास भारतीय क्षेत्र में 8 किमी की लंबाई में सैन्य संरचना, स्थाई बंकर आदि बना लिए हैं।

अप्रैल महीने से लेकर जून तक उसने लगातार इसे अंजाम दिया है। चीन की सेना फिंगर 1-3 तक गश्त करती थी। भारतीय सुरक्षा बल फिंगर 4-से 8 तक निगरानी करते थे।

फिंगर 4 पर  आईटीबीपी की निगरानी पोस्ट थी। अब चीन के सैनिक भारतीय सुरक्षा बलों को फिंगर 4 से आगे की तरफ नहीं जाने दे रहे हैं।

इस तरह से देखा जाए तो सैन्य सूत्रों के मुताबिक करीब 60 वर्ग किमी का भारतीय भू-भाग चीन के कब्जे में है और चीन इसे खाली करने या मामले को सुलझाने के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नसीहत

मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन को पांच नसीहतें दी हैं। पहली सीख है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने बयान से चीन के षडयंत्रकारी रूख को बल नहीं देना चाहिए।

  • सरकार के सभी अंगों को इस खतरे से निबटने और ज्यादा गंभीर होने से रोकने के लिए परस्पर तालमेल और सहमति से काम करना चाहिए। यहां पूर्व प्रधानमंत्री का इशारा साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय,रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय में कहीं न कहीं तालमेल का अभाव है।
  • पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि यही समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट होना है। संगठित होकर हम सबको चीन के इस दुस्साहस का जवाब देना है। ऐसा माना जाना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने वर्तमान प्रधानमंत्री को उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान कसे गए चीन की आंखों में लाल आंखें डालकर जवाब देने का जवाब दिया है।
  • प्रधानमंत्री को सीख भी दी है। मनमोहन सिंह ने कहा है कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। पिछलग्गू सहयोगियों के प्रचारित झूठ के आडंबर से सच्चाई को नहीं दबाया नहीं जा सकता। मनमोहन ने कहा जनादेश से विश्वासघात ठीक नहीं। पूर्व प्रधानमंत्री का यह भाजपा और प्रधानमंत्री की राजनीतिक डिजाइन पर बड़ा तंज माना जा रहा है।
  • पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से समय की चुनौतियों का सामना करने का आग्रह किया है। शहीद कर्नल बी. संतोष और उनके साथियों की शहादत का सम्मान तथा क्षेत्रीय सुरक्षा, अखंडता राष्ट्रीय संप्रभुता अक्षुण्ण रखने की गुजारिश की है।

 

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