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Gujarat: ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले में पूर्व नेवी अफसर समेत दो गिरफ्तार, जवानाें के डाटा से बनाते थे फर्जी डीएल

Sat, 17 Jun 2023 09:19 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 17 Jun 2023 09:19 PM IST
सार

पुलिस ने बताया कि पिछले चार सालों से अहमदाबाद में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट चल रहा था, जिसे गुजरात क्राइम ब्रांच ने मिलिट्री इंटेलिजेंस और दक्षिणी कमांड से जानकारी मिलने के बाद पकड़ा था। घटनास्थल से 284 ड्राइविंग लाइसेंस, 97 सर्विस मोटर ड्राइविंग लाइसेंस बुक, नौ नकली रबड़ स्टांप, तीन लैपटॉप, चार फोन, 37 एनओसी, नौ सेवारत प्रमाणपत्र, पांच पुष्टि पत्र और 27 स्पीड पोस्ट स्टिकर जब्त किए गए हैं।

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Former naval officer arrested for making fake license in gujarat linked with jammu kashmir
गुजरात पुलिस (File Photo) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात में सुरक्षा बलों के विवरण का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। नौसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के साथ ही दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और भारी मात्रा में नकली दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह चार साल से अहमदाबाद में चल रहा था। दक्षिण कमान के सैन्य खुफिया विभाग से मिली जानकारी के आधार पर गुजरात पुलिस की अपराध शाखा ने गिरोह का पर्दाफाश कर दोनों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान पूर्व नौसेना अधिकारी संतोष सिंह और गांधीनगर आरटीओ दफ्तर में काम करने वाले धवल रावत के रूप में हुई है।
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अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से 284 ड्राइविंग लाइसेंस, 97 सर्विस मोटर ड्राइविंग लाइसेंस बुक, नौ फर्जी रबर मुहरें, तीन लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, 37 अनापत्ति प्रमाण पत्र, नौ सर्विंग सर्टिफिकेट, पांच कंफर्मेशन लेटर, स्पीड पोस्ट के 27 स्टीकर और डिजिटल पेन बरामद किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। इससे पहले, 2017 में जम्मू-कश्मीर में हथियारों के लाइसेंस का बड़ा घोटाला पकड़ा गया था, जिसकी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच कर रहा है। इसमें गलत तरीके से 2.78 लाख हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए थे।
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1,000 से अधिक लाइसेंस जारी किए
अभियुक्तों ने बताया कि उन लोगों ने अब तक 1,000 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस अपने हैंडलरों को दिए हैं। अभियुक्तों ने यह भी बताया कि वे इशफाक, वसील और नासर मीर के लिए काम करते थे, जो जम्मू-कश्मीर के उरी में ड्राइविंग स्कूल चलाते हैं। आरोपियों ने यह भी बताया कि उन्होंने इस साल 50 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है और वे चार साल से यह काम कर रहे थे।

सुरक्षा बलों के नाम पर डीएल गंभीर खतरा
इस मामले की जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े फर्जी दस्तावेज पर ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने का मामला गंभीर चिंता का विषय है। इस डीएल के आधार पर देश के दुश्मन पासपोर्ट जैसे कई अन्य अहम दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी डीएल बनाने के लिए भी इस गिरोह का फायदा उठाया गया होगा।


पहले सैनिकों के लाइसेंस बनवाता था आरोपी अफसर
अधिकारियों ने बताया कि मूल रूप से मध्य प्रदेश निवासी संतोष सिंह पहले गांधीनगर में सुरक्षा बलों की विभिन्न बटालियन के सैनिकों के लिए डीएल बनवाता था। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर के तीन और अन्य लोगों ने उससे जवानों और सुरक्षा बलों की बटालियन के विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी डीएल बनाने के लिए संपर्क किया था। अधिकारियों ने बताया कि सिंह ने सुरक्षा बलों की बटालियन की मुहरें बनवाने के लिए ऑनलाइन एक मशीन मंगवाया था।

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