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ISRO: आदित्य एल1 की लॉन्चिंग पर याद आए पूर्व अध्यक्ष राव, शुरुआती चरणों को साकार करने में निभाई थी अहम भूमिका

Sat, 02 Sep 2023 05:49 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 02 Sep 2023 05:49 PM IST
सार

इसरो की वेबसाइट पर प्रोफेसर राव को दी गई श्रद्धांजलि में कहा गया, प्रो. राव के सौजन्य से आदित्य-एल1 भारत का पहला मिशन बन जाएगा जो लैग्रेंजियन पॉइंट एल1 में स्थापित होगा।

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Former ISRO chairman UR Rao key role in realising early stages of Aditya-L1 mission recalled
इसरो के पूर्व अध्यक्ष यूआर राव (फाइल फोटो)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के महत्वाकांक्षी सौर मिशन आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के साथ पूर्व इसरो अध्यक्ष प्रोफेसर यूआर राव के सपने और शुरुआती चरणों में इसे साकार करने में योगदान को प्रेमपूर्वक याद किया गया। इसरो के अनुसार, प्रोफेसर राव को प्यार से भारत के उपग्रह कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। वह विशेष रूप से आदित्य मिशन को लेकर उत्साहित थे और उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि इस अभियान को और अधिक सार्थक और समकालीन बनाने के लिए इसके कक्षीय मापदंडों सहित मिशन के उद्देश्यों में पूरी तरह से सुधार किया जाए।

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इसरो ने प्रोफेसर राव को दी श्रद्धांजलि, कही यह बात
इसरो की वेबसाइट पर प्रोफेसर राव को दी गई श्रद्धांजलि में कहा गया, प्रो. राव के सौजन्य से आदित्य-एल1 भारत का पहला मिशन बन जाएगा जो लैग्रेंजियन पॉइंट एल1 में स्थापित होगा। लैग्रेंजियन पॉइंट पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित कक्षीय विन्यास में मुक्ति बिंदुओं में से एक है। जहां स्थापित होने पर एक सैटेलाइट का सूर्य के संबंध में पृथ्वी के समान कोणीय वेग होगा और इसलिए सूर्य के साथ वही स्थिति बनी रहेगी जैसे कि पृथ्वी से देखा जा रहा हो। पीएसएलवी-सी57 (PSLV-C57) प्रक्षेपण यान से आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण शनिवार को इसरो द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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प्रक्षेपण यान ने सैटेलाइट को उसकी इच्छित कक्षा में स्थापित कर दिया है, जहां से वह 125 दिनों की यात्रा के दौरान सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन पॉइंट एल1 की ओर आगे बढ़ेगा। अंतरिक्ष यान को अंततः सूर्य-पृथ्वी सिस्टम के लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा। एल-1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे गए उपग्रह को सूर्य को बिना किसी रुकावट या ग्रहण के दौरान भी लगातार अवलोकन करने का प्रमुख लाभ मिलता है। इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव को देखने का लाभ मिलेगा।

सफल प्रक्षेपण के बाद बोलते हुए आदित्य-एल1 परियोजना की निदेशक निगार शाजी ने प्रोफेसर यूआर राव का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समय मैं प्रोफेसर यूआर राव को याद करना चाहूंगी, जिन्होंने इस मिशन के लिए बीज बोया था।


प्रोफेसर राव ने दिया था एल-1 पर जाने का सुझाव
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के प्रोफेसर जगदेव सिंह ने मिशन के लिए गंतव्य के रूप में एल-1 को निर्धारित करने में राव द्वारा निभाई गई भूमिका को याद किया। जगदेव सिंह ने ही आदित्य एल1 के प्राथमिक पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) को विकसित किया है। उन्होंने कहा, इसरो ने सबसे पहले हमें (आईआईए) 50 सेमी का एक छोटा प्लेटफॉर्म प्रदान किया था... बाद में जब हम पेलोड बनाने के आधे रास्ते पर थे, उस समय यह विचार आया कि क्या हम दिन के 24 घंटे और साल के 365 दिन सूर्य का अध्ययन करना चाहते हैं। ऐसे में जब हम पृथ्वी की निचली कक्षा में जाते हैं और सैटेलाइट को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करते हैं, तब सूर्य पर ग्रहण लगने पर कुछ समस्या आएंगी और हम पृथ्वी की निचली कक्षा में सूर्य का निरीक्षण नहीं कर पाएंगे। तो फिर इसरो, विशेष रूप से प्रोफेसर यू आर राव ने सुझाव दिया था कि पृथ्वी की निचली कक्षा के बजाय, हम एल-1 पर जा सकते हैं।

उन्होंने कहा, इसके बाद अंतरिक्ष यान को एल-1 में स्थापित करने की योजना के साथ वीईएलसी के साथ अन्य छह पेलोड जोड़े गए और सैटेलाइट के साथ-साथ मिशन भी बड़ा हो गया। इसके अलावा ऐसे कई वैज्ञानिक मुद्दे थे जो प्रोफेसर राव का ध्यान आकर्षित कर रहे थे जैसे सूर्य के क्रोमोस्फीयर, संक्रमण क्षेत्र, कोरोना और इसकी हीटिंग समस्या का अध्ययन। इसरो ने कहा, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह अपने पसंदीदा मिशन को सफल होते देखने के लिए जीवित नहीं रह सके। राव 1984-1994 के बीच इसरो के अध्यक्ष थे। उनका 2017 में 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उन्हें उसी वर्ष पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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