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Election: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक बोले, जाट-सिख और मुसलमानों को एक साथ जोड़ मोदी को घेरने की बन रही रणनीति
सार
Former Governor Satyapal Malik: मलिक का दावा है कि यदि यह विचार जमीन पर उतरता है तो हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान के लगभग दस जिलों में यह संगठन प्रभावी भूमिका अदा करेगा।
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पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि जाटों-सिखों और मुसलमानों को एक साथ एक मंच पर लाकर 2029 में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा की राह रोकने की रणनीति बन रही है। इसके लिए विभिन्न समुदाय के नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है और कई नेताओं ने इस मुद्दे पर साथ आने का आश्वासन भी दिया है। जल्द ही इस मंच की घोषणा की जा सकती है। यदि यह योजना सफल रही तो आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
कई राज्यों के राज्यपाल का पद संभाल चुके सत्यपाल मलिक ने आरोप लगाया है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा नेता यही दावा कर रहे हैं कि जाटों के बिना भी उन्होंने जीत हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा जाटों को अलग रखने की रणनीति पर जीत हासिल कर रही है तो वे अब सिखों और मुसलमानों को एक साथ लाकर भाजपा के मुकाबले बड़ी राजनीतिक ताकत खड़ी करने की कोशिश करेंगे। इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
मलिक का दावा है कि यदि यह विचार जमीन पर उतरता है तो हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान के लगभग दस जिलों में यह संगठन प्रभावी भूमिका अदा करेगा। हरियाणा में लोकसभा की दस सीटें हैं। पंजाब की 13, राजस्थान की 25 और पश्चिमी यूपी की 29 में लगभग 25 सीटों पर यह समीकरण अपना असर डाल सकता है।
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दरअसल, इसके पीछे विचार यह है कि चौधरी चरण सिंह के असर वाले क्षेत्रों में जाटों-मुसलमानों को एक साथ रखकर ही आरएलडी ने अपनी राजनीतिक जमीन बनाई थी। बाद में यह गठबंधन कमजोर पड़ गया। मुसलमान सपा-बसपा के पास चले गए तो जाट भी राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा के खाते में चले गए। मुजफ्फरनगर दंगे ने दोनों समुदायों में जो दो फाड़ की, उसे आज तक नहीं भरा जा सका। लेकिन अब ये नेता इस खाई को पाटते हुए नया समीकण पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
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कई राज्यों के राज्यपाल का पद संभाल चुके सत्यपाल मलिक ने आरोप लगाया है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा नेता यही दावा कर रहे हैं कि जाटों के बिना भी उन्होंने जीत हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा जाटों को अलग रखने की रणनीति पर जीत हासिल कर रही है तो वे अब सिखों और मुसलमानों को एक साथ लाकर भाजपा के मुकाबले बड़ी राजनीतिक ताकत खड़ी करने की कोशिश करेंगे। इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
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मलिक का दावा है कि यदि यह विचार जमीन पर उतरता है तो हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी के साथ-साथ राजस्थान के लगभग दस जिलों में यह संगठन प्रभावी भूमिका अदा करेगा। हरियाणा में लोकसभा की दस सीटें हैं। पंजाब की 13, राजस्थान की 25 और पश्चिमी यूपी की 29 में लगभग 25 सीटों पर यह समीकरण अपना असर डाल सकता है।
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दरअसल, इसके पीछे विचार यह है कि चौधरी चरण सिंह के असर वाले क्षेत्रों में जाटों-मुसलमानों को एक साथ रखकर ही आरएलडी ने अपनी राजनीतिक जमीन बनाई थी। बाद में यह गठबंधन कमजोर पड़ गया। मुसलमान सपा-बसपा के पास चले गए तो जाट भी राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा के खाते में चले गए। मुजफ्फरनगर दंगे ने दोनों समुदायों में जो दो फाड़ की, उसे आज तक नहीं भरा जा सका। लेकिन अब ये नेता इस खाई को पाटते हुए नया समीकण पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।