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Pak-China: पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा- अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन से पाक-चीन को कोई लाभ नहीं हुआ

Sun, 12 Feb 2023 03:11 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 12 Feb 2023 03:11 AM IST
सार

पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने ‘इंडियन वीमेन प्रेस कोर’ (आईडब्ल्यूपीसी) में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान को वैसा कूटनीतिक या रणनीतिक लाभ नहीं मिला, जिसकी पाकिस्तानियों ने उम्मीद की थी। आज भारत से वे जितना खतरा मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा उन्हें अफगानिस्तान से पैदा हो गया है।

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Former foreign secretary Shyam Saran said no diplomatic gains for Pak and China after regime change in Kabul
पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने शनिवार को कहा कि अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद पाकिस्तान और चीन को कोई कूटनीतिक लाभ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हुए सत्ता परिवर्तन का लाभ उठाने में न सिर्फ असफल रहा है, बल्कि इसके उलटे भारत से वे जितना मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा अफगानिस्तान से पैदा हो गया है। सरन ने कहा कि चीन को भी अफगानिस्तान में तालिबान शासन का लाभ नहीं मिला, क्योंकि चीन को पूर्वी तुर्केस्तान (चीन का पश्चिमी इलाका) में अलगाववादियों से निपटने में काबुल का उतना सहयोग नहीं मिला, जितने की उसने उम्मीद की थी। शिनजियांग के एक बड़ हिस्से को अलगाववादी पूर्वी तुर्केस्तान के नाम से आजाद कराना चाहते हैं।

सरन ने ‘इंडियन वीमेन प्रेस कोर’ (आईडब्ल्यूपीसी) में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन से पाकिस्तान को वैसा कूटनीतिक या रणनीतिक लाभ नहीं मिला, जिसकी पाकिस्तानियों ने उम्मीद की थी। आज भारत से वे जितना खतरा मानते हैं, उससे कहीं बड़ा खतरा उन्हें अफगानिस्तान से पैदा हो गया है। सरन ने याद किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी का समर्थन किया था। उनका तर्क था कि काबुल में मित्र सरकार ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अबतक न तो पाकिस्तान ने और न ही चीन ने तालिबान शासन को मान्यता दी है।

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उन्होंने कहा कि यह रेखांकित करता है कि स्थिति पूर्व के अनुमान से कहीं अधिक जटिल है। पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में घुसपैठ करने के लिए चीन के लिए एक सूत्रधार की भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहा था। सरन ने कहा कि पाकिस्तान के चश्मे से परे भारत का अफगानिस्तान के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है और यह नई दिल्ली की विश्वसनीय मध्य एशियाई नीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
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पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा भारत के साथ शांति का आह्वान इस्लामाबाद द्वारा संबंधों को सुधारने की शुरुआत हो सकती थी; लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत कदम पीछे खींच लिए।  उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ संबंध को लेकर भारत द्वारा सतर्क रुख अपनाने के वाजिब कारण हैं। सरन ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के लिए कदम बढ़ाए, लेकिन पाकिस्तान में मौजूद ‘कुछ तत्वों’ ने उसे विफल कर दिया।

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