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VS Arunachalam: पूर्व DRDO प्रमुख वीएस अरुणाचलम का निधन, 87 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; जानें उनके बारे में

Wed, 16 Aug 2023 09:47 PM IST
स्वप्निल शशांक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 16 Aug 2023 09:47 PM IST
सार

अरुणाचलम ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला और रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला में कई पदों पर अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। 

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Former DRDO chief V S Arunachalam passes away in US Latest News Update
वीएस अरुणाचलम - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक वीएस अरुणाचलम का बुधवार को निधन हो गया। उन्होंने 87 साल की उम्र में अमेरिका में आखिरी सांस ली। उनके परिवार ने एक बयान में कहा कि बड़े दुख के साथ हम डॉ. वीएस अरुणाचलम के निधन की सूचना दे रहे हैं। कैलिफोर्निया में करीबी परिवार के बीच उन्होंने अंतिम सांसें लीं। 2015 में अरुणाचलम को वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए DRDO के लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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उन्होंने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला और रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला में कई पदों पर अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। अरुणाचलम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख रह चुके थे। वे 1982-92 तक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार भी थे। इंजीनियरिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उनके योगदान के लिए उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (1980), पद्म भूषण (1985) और पद्म विभूषण (1990) से सम्मानित किया गया था।
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रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (यूके) के पहले भारतीय फेलो होने के अलावा अरुणाचलम ने मैटेरियल्स रिसर्च सोसाइटी बुलेटिन सहित कई विश्वविद्यालयों, फाउंडेशनों के सलाहकार और संपादकीय बोर्ड के सदस्य के रूप में भी काम किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस. अरुणाचलम के निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। वह रक्षा, प्रौद्योगिकी और परमाणु मामलों पर कई लोगों के गुरु थे।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राजा रमन्ना के बाद अरुणाचलम ने 1982-92 के दौरान एक दशक तक डीआरडीओ का मार्गदर्शन किया और उसे आकार दिया। उसके बाद इस पद पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रहे। डॉ. अरुणाचलम के विशेष रूप से प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ बहुत मधुर संबंध थे। वह बीएआरसी और सीएसआईआर में एक विशिष्ट करियर के बाद डीआरडीओ आए थे। उनमें अद्भुत हास्य की भावना थी।
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