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पूर्व सीजेआई ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए चार वरिष्ठ जजों की आलोचना की
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 20 May 2018 10:40 AM IST
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देश के पूर्व चीफ जस्टिस (सीजेआई) टीएस ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा 12 जनवरी को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की शनिवार को आलोचना की। उन्होंने कहा कि जजों को अपनी संस्थागत समस्याओं के समाधान के लिए बाहरी मदद की ओर देखने की जरूरत नहीं थी। उनका इशारा जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ द्वारा मौजूदा सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरफ था। इन चारों ने सीजेआई मिश्रा पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि लोकतंत्र खतरे में है।
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पूर्व सीजेआई ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को परेशान करने वाली घटना करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर लाकर मीडिया और राजनीतिज्ञों को चर्चा करने का एक मौका दे दिया, जिनका समाधान सुप्रीम कोर्ट के अंदर ही किया जाना चाहिए था। परंपरा को तोड़कर सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने कुछ मुद्दों को सार्वजनिक कर दिया। किसी राजनीतिक दल या मीडिया हाउस या राजनेता को विवेकाधिकार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जब सुप्रीम कोर्ट के जज सार्वजनिक रूप से बयान दें कि देश में लोकतंत्र खतरे में है।
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पूर्व सीजेआई एनजीओ ग्लोबल जूरिस्ट के इंडिपेंडेंस ऑफ ज्यूडिशियरी नामक विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जज चाह रहे थे कि मुद्दों पर देश फैसला करे जबकि इनका फैसला उन्हें खुद करना चाहिए था। ऐसे में कोई भी यह घटनाक्रम देखकर परेशान होगा कि उच्च न्यायपालिका अपने कामकाज से संबंधित मामलों का फैसला लेने में असमर्थ है और वह उसे जनता के पास लेकर जा रही है।
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उन्होंने कहा कि देश से मदद की अपील के बजाए चारों जजों को समस्याओं का समाधान खोजने के लिए सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध जबरदस्त प्रतिभाओं के संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए था। देश को उनकी बुद्धिमत्ता पर भरोसा है और वे यह देखकर खुश होते यदि वे दूसरों की ही नहीं बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भी इसका इस्तेमाल करते।