फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Former CJI R M Lodha said The premier investigating agency has to be given independence

सीबीआई विवाद: पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा ने पूछा- बिना स्वतंत्रता के तोता कैसे उड़ेगा

Sat, 12 Jan 2019 12:13 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 12 Jan 2019 12:13 PM IST
विज्ञापन
Former CJI R M Lodha said The premier investigating agency has to be given independence
जस्टिस आरएम लोढ़ा

केंद्र सरकार ने सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद से हटाकर उन्हें फायर सर्विस का निदेशक बना दिया था। जिसके बाद उन्होंने डीजी फायर सर्विस का चार्ज लेने से इनकार करते हुए सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा था कि उनके मामले में प्राकृतिक न्याय को समाप्त कर दिया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने टिप्पणी की है। 

विज्ञापन


जस्टिस लोढ़ा ही वह शख्स है जिन्होंने सीबीआई के लिए 'पिंजरे में कैद तोता' शब्द को गढ़ा था क्योंकि जांच एजेंसी को सरकार की इच्छाओं की गुलाम है। शुक्रवार को जस्टिस लोढ़ा ने कहा, 'तोता तब तक आसमान में पूरी तरह से नहीं उड़ सकता जब तक उसे खुला नहीं छोड़ा जाएगा। समय आ गया है जब कुछ किया जाना चाहिए और होनो चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीबीआई उच्चस्तरीय जांच एजेंसी बन सके।'
विज्ञापन


इस स्वतंत्रता को कैसे सुरक्षित किया जाए इसपर उन्होंने कहा, 'ऐसी विधियां और तरीके हैं जिनके द्वारा यह किया जा सकता है। हर सरकार सीबीआई का प्रयोग करती है और उसे प्रभावित करती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह मामला न्यायालय के अधीन है। यह कोयला घोटाले के दौरान सामने आया था और इसके बाद यह जारी रहा। कोर्ट के जरिए या फिर किसी और माध्यम से सीबीआई की स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।'
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्मा के ट्रांसफर पर जस्टिस लोढ़ा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की तरफ इंगित किया था कि समिति से सलाह नहीं ली गई। केंद्र सरकार ने सीबीआई के मुखिया का तबादला करने के लिए इसका प्रयोग किया।' मई 2013 में कोल आवंटन मामले की सिनवाई करते हुए तत्कालीन जज रहे जस्टिस लोढ़ा ने सरकार के वकील से पूछा था कि उन्हें पिंजरे में कैद तोते को खुला छोड़ने में कितना समय लगेगा और इसके लिए उसकी आवाज को दबाना बंद करें।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा, 'जांच एजेंसी को स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। समय आ गया है कि इसे राजनीतिक कार्यकारिणी से अलग किया जाए। जब तक इसपर राजनीतिक कार्यकारिणी नियंत्रण करती रहेंगी, चाहे जो भी सत्ता में हो तबतक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।'



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed