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चुनाव आयोग जवाबदेही तय करे, वरना प्रासंगिकता पर उठेंगे सवाल

Sun, 21 Apr 2019 07:04 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 21 Apr 2019 07:04 AM IST
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Former Chief Election Commissioner answer on matching EVM with VVPat Slip
एसवाई कुरैशी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, आयोग ईवीएम का वीवीपैट पर्ची से 50 फीसदी मिलान करने में सक्षम

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लोकसभा चुनाव 2019 में चुनाव आयोग लगातार विवादों के घेरे में दिख रहा है। योगी, आजम, माया पर कार्रवाई से लेकर ताबड़-तोड़ आयकर छापों और आयोग की रिकार्ड जब्ती जैसे मुद्दों पर पूनम मेहता ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी से बात की...

विपक्षी नेताओं के यहां आयकर, ईडी और वित्त एजेंसियों के ताबड़तोड़ छापे पड़ रहे हैं। आप क्या कहते हैं 
 
बस इतना ही कहना है कि अगर चुनाव आयोग ने इस पर अपनी जवाबदेही तय नहीं की तो उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगेंगे। चुनाव में काले धन का प्रयोग रुके, इसके लिए छापामारी नियमित प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन जिस तरह से राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है, यह जरूरी हो जाता है कि आयोग तय करे कि कार्रवाई में भेदभाव न हो। तटस्थ तथा निष्पक्ष कार्रवाई हो। जो आरोप लग रहे हैं, आयोग को उनका जवाब देना चाहिए। 
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बड़े पैमाने पर धन जब्त हो रहा है, क्या चुनावों में काले धन का प्रयोग बढ़ गया है। 

ऐसा नहीं है। आयोग पिछले कई सालों से एक सिस्टम पर काम कर रहा है। इसी का नतीजा है कि इतने बड़े पैमाने पर धरपकड़ हो रही है। ऐसा आयोग की सख्ती के चलते हो पा रहा है। हमने एक सिस्टम की नींव डाली थी जो अब सुचारु रूप से काम कर रहा है। सतर्कता के चलते इस बार राजनीतिक पार्टियों के पैसा, शराब, ड्रग्स आदि पर काफी हद तक अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है। 
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विवादों के बाद आयोग ने कुछ बड़े चेहरों पर कार्रवाई की है, आप इसे किस तरह से देखते हैं? 

आयोग की इस सख्ती से कुछ उम्मीद जगी है। जनता को हक है यह जानने का, कि नियमों का मखौल उड़ाने वालों पर क्या कार्रवाई हो रही है। नियम तोड़ने पर सब एक समान कार्रवाई के हकदार हैं। 

मायावती-आजम कह रहे हैं कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला।   

देखिए, नेता अंगुली उठाते हैं। किस तरह के केस थे, क्या बात हुई, इस पर कहना मुनासिब नहीं है। अगर वह कह रहे हैं कि सुनवाई नहीं हुई तो यह आरोप गंभीर है। क्योंकि अगर पक्ष सुना जाता तो हो सकता है दूसरी बात होती। 

ईवीएम को लेकर बहुत शिकायतें आ रही हैं। आंध्र के सीएम ने आरोप लगाया है कि घंटों सुनवाई नहीं हुई।

ईवीएम को लेकर शिकायतें नाकाबिले मंजूर है, क्योंकि आयोग का नियम है कि ईवीएम की तकनीकी दिक्कत या खराबी पर इसे ठीक करने या बदलने के लिए 30 मिनट का समय तय होता है। मुझे नहीं लगता कि आयोग ने लापरवाही बरती, लेकिन जनता को आयोग की नीयत पर शक हो तो उसका जल्द समाधान देना चाहिए।

ईवीएम हैकिंग और वीवीपैट पर्ची मिलान को लेकर सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद भी विपक्ष संतुष्ट नहीं। आपकी राय   

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की हैकिंग पर बहस अक्तूबर 2010 में खत्म हो जाना चाहिए थी, जब सर्वदलीय बैठक में वीवीपैट को अपनाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। 2017 से सभी चुनाव वीवीपैट के साथ हो रहे हैं। प्रत्येक विधानसभा में औचक मिलान भी हुआ। एक भी बेमेल पर्ची नहीं मिली। 23 विपक्षी दलों ने  50 फीसदी वीवीपैट पर्ची से मिलान की मांग की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक विधानसभा के पांच बूथों पर व्यवस्था लागू करने का स्वागत योग्य फैसला दिया है। लेकिन आयोग के पक्ष पर मैं कहना चाहूंगा कि विपक्ष की मांग को आयोग आसानी से मान सकता था। 50 फीसदी मिलान में थोड़ा वक्त लगता लेकिन यह असंभव नहीं है। 


क्या चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं? 

आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए जाना जाता है। ऐसे में अगर आप नियमों को लेकर सजग नहीं रहते, पारदर्शी व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू नहीं करते तो जनता के सामने आपकी छवि धूमिल होगी। सीधा असर आपकी कार्य प्रणाली पर पड़ता है। वर्तमान परिपेक्ष्य में यही हो रहा है। यह भारतीय संवैधानिक परंपराओं के लिहाज से चिंता का विषय है।

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