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Supreme Court: पूर्व बसपा सांसद अफजाल अंसारी को ‘सुप्रीम’ राहत, दोषसिद्धि सशर्त निलंबित; बहाल होगी सांसदी

Thu, 14 Dec 2023 10:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 14 Dec 2023 10:08 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्तूबर को मामले में दोषसिद्धि के निलंबन का अनुरोध करने वाली अफजाल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि अदालत को मामले के हर पहलू को देखना चाहिए। क्योंकि अगर उनकी दोषसिद्धि को निलंबित नहीं किया गया तो उनका गाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र लोकसभा में प्रतिनिधित्वहीन हो जाएगा।

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Former BSP MP Afzal Ansari will get a big relief from the Supreme Court, his MP will be reinstated
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा के पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गुरुवार को 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में अफजाल की दोषसिद्धि सशर्त निलंबित कर दिया। इससे पहले, पीठ ने पूर्व सांसद अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि अपनी याचिका में अफजाल अंसारी ने 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में अपनी दोषसिद्धि को निलंबित करने की मांग की थी।

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 लोकसभा सदस्यता का रास्ता साफ
पूर्व बसपा सांसद अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। इससे उनकी लोकसभा सदस्यता के बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि 2:1 के बहुमत से दिए 75 पेज के फैसले में अदालत ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर क्षेत्र से पूर्व सांसद अंसारी लोकसभा में मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते और न ही सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। साथ ही वह सदन की कार्यवाही में भी भाग नहीं ले सकते हैं। इसके अलावा, पीठ ने  इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ की गई अफजाल अंसारी की आपराधिक अपील का 30 जून 2024 तक निपटारा करने का निर्देश दिया है। पीठ कहा कि गाजीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र उपचुनाव की अधिसूचना तब तक जारी नहीं होगी, जब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला नहीं आ जाता। जस्टिस दत्ता ने कहा कि उनकी राय बहुमत से दिए फैसले से अलग है और वह अंसारी की अपील खारिज करते हैं। 
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पीठ ने यह निर्देश भी दिए
इस मामले में पीठ ने यह भी कहा कि क्षेत्र में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपीएलएडी) योजनाओं को जारी रखा जाए। स्थानीय संसदीय प्रतिनिधि की गैरमौजूदगी में भी योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में आपराधिक अपील लंबित रहने के दौरान अंसारी को भविष्य में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा और निर्वाचित होने पर ऐसा चुनाव अपील के नतीजे के अधीन होगा।
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31 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रखा था
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्तूबर को मामले में दोषसिद्धि के निलंबन का अनुरोध करने वाली अफजाल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि अदालत को मामले के हर पहलू को देखना चाहिए। क्योंकि अगर उनकी दोषसिद्धि को निलंबित नहीं किया गया तो उनका गाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र लोकसभा में प्रतिनिधित्वहीन हो जाएगा। वह संसद की विभिन्न स्थायी समितियों के सदस्य थे, जब वे सांसद नहीं रहेंगे तो वहां वह योगदान नहीं दे पाएंगे। इसके अलावा, एमपीएलएडी योजना से चलने वाली कई योजनाएं प्रभावित होंगी। वह पांच बार विधायक हैं और दो बार विधायक रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि मामले में हाल के फैसले का जिक्र भी किया। 

29 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाई थी चार साल की सजा
गाजीपुर की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने इस साल 29 अप्रैल को अफजाल अंसारी और उनके भाई मुख्तार अंसारी को 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में दोषी ठहराया था। मामले में अफजाल अंसारी को चार साल जेल की सजा सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद गाजीपुर से सांसद रहे अंसारी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इसके बाद, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था।  जहां 24 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली थी। लेकिन, सजा पर रोक नहीं लगाई थी, जिसके चलते अफजाल अंसारी की सांसदी बहाल नहीं हुई।


दोनों भाइयों पर 29 नवंबर, 2005 को गाजीपुर के तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या और 1997 में वाराणसी के व्यापारी नंद किशोर रूंगटा के अपहरण-हत्या के सिलसिले में यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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