Kerala Nun Rape Case: केरल नन रेप केस क्या है? इस केस से किन मुद्दों की ओर ध्यान खींचा था?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 14 Jan 2022 07:23 PM IST

सार

तब बिशप ने अपने बचाव में कहा था कि उनके खिलाफ 'मनगढ़ंत' आरोप लगाए जा रहे  हैं और उनसे बदले की भावना के तहत यह कार्रवाई की गई है।
 
बिशप फ्रैंकों मुलक्कल
बिशप फ्रैंकों मुलक्कल - फोटो : ANI
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विस्तार

केरल नन रेप केस में राज्य की एक अदालत ने आरोपी बिशप फ्रैंकों मुलक्कल को शुक्रवार को बरी कर दिया है। 57 वर्षीय फ्रैंको मुलक्कल भारत के ऐसे पहले कैथोलिक बिशप थे, जिन्हें नन से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फ्रैंकों मुलक्कल को बरी किए जाने पर ननों के एक समूह ने कोर्ट के इस फैसले पर हैरानी और निराशा जताई है। समूह की ननों ने कहा है कि वे पीड़ित के समर्थन में खड़ी हैं और उसे न्याय मिलने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। 
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केस क्या था?
जून, 2018 में कुराविलंगड पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी के मुताबिक एक कैथोलिक चर्च की वरिष्ठ नन ने जालंधर के तत्कालीन बिशप फ्रेंको मुलक्कल पर उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। एफआईआर के मुताबिक 2014 और 2016 के बीच कुराविलंगड में मिशन कॉन्वेंट में  पीड़ित को 13 बार अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।

Nun Rape Case
Nun Rape Case
ननों ने की थी भूख हड़ताल  
प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही समय बाद, सितंबर 2018 में, पीड़िता के करीबी ननों के एक समूह ने मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कोच्चि में केरल उच्च न्यायालय परिसर के सामने भूख हड़ताल शुरू की। ननों के इस विरोध प्रदर्शन की वजह से मुलक्कल को जालंधर से कोच्चि लाया गया। पुलिस ने तीन दिनों तक बिशप से पूछताछ की और आखिरकार विशेष जांच दल ने उन्हें उसी महीने गिरफ्तार कर लिया था।

उन पर नन को गलत तरीके से बंधक बनाने, दुष्कर्म करने, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। करीब एक महीने बाद वह जमानत पर छूट गए। बंद अदालत में करीब 105 दिनों तक चली सुनवाई के बाद उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने उन्हें बरी करते समय सबूतों के अभाव का हवाला दिया।

Kerala nun rape case
Kerala nun rape case
क्यों अहम है यह मामला?
यह पहली बार है जब किसी कैथोलिक बिशप को भारत में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया और उस पर मामला दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद मुलक्कल को जालंधर में उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया था। यह घटना लोगों का ध्यान इस ओर लेकर आई कि क्या चर्च के भीतर ननें यौन-दुर्व्यहार का शिकार हो रही हैं और उनके शिकायतों के निवारण के लिए कोई तंत्र मौजूद नहीं है?

महिला संगठनों और ननों के समूह का मानना है कि अक्सर पादरियों के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायतों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है और प्रबंधन के लोगों पर ऐसे मामलों को दफन कर देने के आरोप लगते रहते हैं। महिला संगठनों का कहना है कि चर्च के भीतर की सत्ता संरचना में महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह होनी चाहिए। 

Kottayam court
Kottayam court - फोटो : ANI
ननों के समूह का क्या कहना है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण केरल जिले के कुराविलांगड कॉन्वेंट में रहने वाली पीड़ित के समर्थक नन समूह का कहना है कि वे इस मामले में न्याय लेकर रहेंगी। पीड़ित के न्याय की लड़ाई में चली आ रही लड़ाई का चेहरा रहीं सिस्टर अनुपमा ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा कि वे निश्चित रूप से फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगी और अपने सहयोगी की लड़ाई को वे आगे लेकर जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे अपनी लड़ाई तब तक जारी रखेंगी जब तक कि हमारी बहन को न्याय नहीं मिल जाता। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने हमारे साथ न्याय किया लेकिन हमें न्यायपालिका से अपेक्षित न्याय नहीं मिला।
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