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हिंद-प्रशांत वार्ता सम्मेलन : विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- हिंद प्रशांत क्षेत्र जीवन की वास्तविकता, इसे नकार नहीं सकते
Thu, 28 Oct 2021 02:29 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 28 Oct 2021 02:29 AM IST
सार
हिंद प्रशांत क्षेत्रीय वार्ता सम्मेलन में जयशंकर ने कहा, जैसे जैसे वैश्वीकरण का विस्तार होगा और यह अधिक विविधतापूर्ण होगा इससे एक दूसरे पर निर्भरता बढ़ेगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र ‘जीवन की वास्तविकता’ है और इसलिये एकरूपता का प्रश्न वास्तविकता से अधिक अनुभूति है।
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डॉ. एस. जयशंकर
- फोटो : ANI
विस्तार
हिंद प्रशांत क्षेत्र को जीवन की वास्तविकता बताते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा इसे नकारा नहीं जा सकता। हिंद प्रशांत क्षेत्रीय वार्ता सम्मेलन में जयशंकर ने कहा, जैसे जैसे वैश्वीकरण का विस्तार होगा और यह अधिक विविधतापूर्ण होगा इससे एक दूसरे पर निर्भरता बढ़ेगी। साथ ही इससे जुड़े व्यापक प्रभाव को बढ़ावा मिलेगा। हिंद प्रशांत क्षेत्र यही अभिव्यक्त करता है।
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विदेश मंत्री ने कहा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र ‘जीवन की वास्तविकता’ है और इसलिये एकरूपता का प्रश्न वास्तविकता से अधिक अनुभूति है। यहां तक जिनकी जाहिर तौर पर आपत्तियां हैं, वे भी ऐसे व्यवहार एवं काम करते हैं जो हिंद-प्रशांत को सत्यापित करते हैं। आप सभी जानते हैं कि यह सत्यापन इसकी निर्बाधता और अंतर प्रवेश से जुड़ा है।
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जयशंकर ने कहा, यह भी सच है कि राजनीति ने कदाचित इसे स्वीकार करने में कुछ अनिच्छा की स्थिति भी पैदा की है। लेकिन इसका जवाब शायद सोच में है और संभवत: उनकी असुरक्षा है। जयशंकर ने कहा, अगर कोई शीत युद्ध के विचार में उतर कर देखे और उसका लाभ लें तब यह आसानी से स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि दूसरे दुनिया को काफी अलग तरीके से देखेंगे। खासतौर पर अगर उद्देश्य साझी अच्छाई को हासिल करने की व्यापक, अधिक सहयोगी तथा अधिक लोकतांत्रिक पहल का हो।
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक भूराजनीति व अर्थतंत्र का मुख्य केंद्र : करमबीर सिंह
नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को भूराजनीति और आर्थिक तंत्र का मुख्य केंद्र बताते हुए कहा कि यह दुनिया की 61 फीसदी आबादी का घर है और यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 62 फीसदी का योगदान करता है। इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत समुद्री कानून 1982 को लेकर सभी देशों के अधिकारों का भारत सम्मान करता है।
करमबीर सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2021 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए कहा, जब हम हिंद-प्रशांत की रूपरेखा के बारे में बात करते हैं तो हम सभी इसकी बढ़ती हुई प्रासंगिकता के बारे में भी जानते हैं। नौसेना प्रमुख ने कहा कि जब इस क्षेत्र को परिभाषित करने की बात आती है, तो इसको सीमाओं में बांधना महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर देश हिंद-प्रशांत के बारे में अपनी रणनीति को अभिव्यक्त कर रहे हैं और उसकी पुनर्रचना कर रहे हैं।