Forgery: इस 420 ने पीएमओ, केंद्रीय मंत्रियों और जांच एजेंसी तक को नहीं बख्शा, साथ रहती थी नोट गिनने की मशीन
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक ऐसे मामले पर्दाफाश किया है, जिसमें एक '420' यानी जालसाज ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रियों और यहां तक कि जांच एजेंसियों तक को नहीं बख्शा। उसने ठगी करने के मकसद से प्रधानमंत्री कार्यालय का बखूबी इस्तेमाल किया। वह अपने निशाने पर रहे लोगों को पीएमओ से आए निमंत्रण पत्र दिखाता था। केंद्रीय मंत्रियों के साथ उठना बैठना, ये साबित करने के लिए फोटो पेश करता था। इसके बाद जब किसी बड़े व्यवसायी के साथ ठगी करनी होती, तो वह खुद को ईडी और दूसरी जांच एजेंसियों के शीर्ष अफसरों का करीबी बताता था। आम जनता से जबरन वसूली के मामले में जालसाज मोहम्मद काशिफ के खिलाफ ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट, गाजियाबाद के समक्ष अभियोजन शिकायत दर्ज कराई है। विशेष न्यायालय ने 31 जुलाई को अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लिया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जालसाज मोहम्मद काशिफ, प्रधानमंत्री मोदी सहित उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों और दूसरे बड़े नेताओं के साथ अपनी एडिटेड फोटो, सोशल मीडिया में साझा करता था। गत अप्रैल में मोहम्मद काशिफ को यूपी एसटीएफ और लोकल पुलिस की टीम ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला कि मोहम्मद काशिफ ने अपने जाल में अनेक लोगों को फंसा रखा था। वह लोगों को फोन करता था। उनसे कहता था कि उनका कोई भी बड़ा काम वह करा सकता है। शुरू में लोगों ने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। बाद में उसने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी फोटो साझा की। इतना ही नहीं, उसने कई ऐसे निमंत्रण भी सोशल मीडिया में डाल दिए, जो केवल वीवीआईपी लोगों को ही प्राप्त होते हैं। इसमें पीएमओ के निमंत्रण पत्र भी शामिल थे। इसके बलबूते पर वह लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने में कामयाब हो गया।
इसके बाद काशिफ ने लोगों के काम कराने शुरू कर दिए। इसके बदले वह मोटी रकम लेता था। सरकारी नौकरी, तबादला या टेंडर दिलाना, वह ये सब काम करने लगा। इतना ही नहीं, उसने कुछ उद्योगपतियों को अपने जाल में फंसाया। उन्हें सरकार में शीर्ष लोगों के साथ अपनी फोटो दिखाई। इसके बाद वह जांच एजेंसियों का हवाला देने लगा। ईडी, सीबीआई व डीआरआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों में उसने अपने संबंधों का हवाला दिया। ठगी के एक मामले में जब मोहम्मद काशिफ, सूरजपुर में किसी से मिलने आया तो एसटीएफ और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके ठिकाने पर उप राष्ट्रपति के यहां से निमंत्रण पत्र आदि बरामद हुए थे। पीएम मोदी के लंच डिनर का निमंत्रण और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का न्योता, ऐसे कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे थे। ये निमंत्रण पत्र और कार्ड नकली बनाए गए थे। बाद में ईडी ने मोहम्मद काशिफ के खिलाफ उत्तर प्रदेश के पीएस सूरजपुर में यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की।
ईडी द्वारा पीएमएलए, 2002 के तहत शुरू की गई जांच के दौरान, उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-107 में स्थित मोहम्मद काशिफ के आवास पर तलाशी ली गई। उसमें 1,10,50,000/- रुपये की नकदी मिली। नोट गिनने की मशीन भी बरामद हुई। वह मशीन को अपने साथ ही रखता था। कई जगह पर मशीन ले जाई गई थी। आरोपी के कब्जे से डीआरआई, सीमा शुल्क, ईडी, आईसीएआई आदि द्वारा की जा रही जांच से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। लाखों करोड़ों रुपये की उगाही के मामले सामने आए। ईडी द्वारा जांच किए जा रहे एक मामले में मदद करने के बदले में उसने एक व्यवसायी के परिवार से 1 करोड़ रुपये मांगे थे। मोहम्मद काशिफ ने 1.78 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी थी। उसने 1.05 करोड़ रुपये नकद चुकाए थे। पैसे के किसी भी वैध स्रोत के बिना उसने कई देशों की यात्राएं की। उसके पास लग्जरी कारें और घड़ियां थीं।