Assam: वन विभाग पर गैंडों की संख्या को बढ़ाकर दिखाने का आरोप, अधिकारी ने कहा- पार्क को बदनाम करने की कोशिश
बुधवार को आरटीआई एक्टिविस्ट चौधरी ने मंत्रालय को एक पत्र लिखकर कहा कि वन विभाग ने 2022 की गणना में काजीरंगा नेशनल पार्क में गैंडों की आबादी 2,634 बताई है, जबकि असल आंकड़ा 2,042 होना चाहिए था। शिकायत पर मंत्रालय ने वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। असम वन प्रमुख यादव ने मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा कि चौधरी पार्क को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
विस्तार
असम वन विभाग ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। पत्र में वन विभाग ने एक आरटीआई एक्टिविस्ट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। एक्टिविस्ट पर आरोप है कि उसने काजीरंगा नेशनल पार्क को बदनाम करने के लिए पार्क पर गैंडों की संख्या को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को लिखे पत्र में असम वन प्रमुख और के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एम के यादव ने कहा कि एक्टिविस्ट रोहित चौधरी ने गैंडों की संख्या से संबंधित एसओपी को गलत तरीके से पढ़ा है।
यह है पूरा मामला
दरअसल, बुधवार को चौधरी ने मंत्रालय को एक पत्र लिखकर कहा कि वन विभाग ने 2022 की गणना में काजीरंगा नेशनल पार्क में गैंडों की आबादी 2,634 बताई है, जबकि असल आंकड़ा 2,042 होना चाहिए था। शिकायत पर मंत्रालय ने वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। असम वन प्रमुख यादव ने मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा कि चौधरी पार्क को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। वह बिना अनुमान लगाने की प्रक्रिया और तरीके को समझे बिना आरोप लगा रहे हैं। नेशनल पार्क की गणना को उन्होंने अजीब कहा है। इससे वह अपने इरादों को दिखा रहे हैं, जो बेहद निंदनीय है।
चौधरी ने विभाग पर लगाया गलत आंकड़ों का आरोप
चौधरी ने मंत्रालय को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि पिछले साल 26-27 मार्च में नेशनल पार्क के 22 रेंडम ब्लॉकों में एक सर्वेक्षण किया था। इस दौरान 1064 गैंडों की आबादी दिखाई गई, लेकिन असल में गिनती 472 गैंडों की हुई थी। चौधरी ने कहा था कि अंतिम गणना में 22 ब्लॉकों के मूल डाटा को हटा दिया गया है। सभी 80 ब्लॉकों में गैंडों की आबादी 2634 बताया। जबकि, अनुमानित कुल संख्या और असल संख्या 2042 है।
वन प्रमुख ने कहा कि आरोप निराधार हैं
वन प्रमुख यादव ने कहा कि चौधरी के आरोप निराधार हैं, क्योंकि प्रक्रिया में 26-27 मार्च को देखे गए गैंडों की गिनती शामिल है न कि वास्तविक गिनती। 28 मार्च को एक और गणना हुई थी, जो पहले दिन पूरी नहीं हो पाई थी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एसओपी के तहत एक सींग वाले गैंडों की गणना की निगरानी के लिए एक ही क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर डबल काउंट किया जा सकता है। इससे गणना के दौरान गलतियों को कम नहीं किया जा सकता। 1991 से केएनपी में गैंडों की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है। 2022 तक कुल 714 गैंडों की मौत हुई है। इनमें से 51 गैंडे शिकारियों के हत्थे चढ़े हैं।