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Hindi News ›   India News ›   Foreign Secretary Harsh Vardhan Shringla says relationship with China has to be based in 3 mutuals ahead of military level talks over issues in Eastern Ladakh

भारत-चीन: श्रृंगला ने संबंधों के लिए इन तीन जरूरतों को बताया अनिवार्य, 11 मार्च को होगी 15वें दौर की वार्ता 

Wed, 09 Mar 2022 06:56 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 09 Mar 2022 06:56 PM IST
सार

पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को लेकर भारत और चीन के बीच 15वें दौर की वार्ता से ठीक दो दिन पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा है कि दोनों देशों के संबंधों में बेहतरी के लिए तीन पारस्परिक जरूरतें अनिवार्य हैं। दोनों देशों के बीच 11 मार्च को सैन्य स्तरीय वार्ता होनी है और चीन ने इसे लेकर खासी उम्मीद जताई है।

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Foreign Secretary Harsh Vardhan Shringla says relationship with China has to be based in 3 mutuals ahead of military level talks over issues in Eastern Ladakh
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला - फोटो : facebook/HarshVShringla

विस्तार

भारत ने चीन के सामने यह साफ कर दिया है कि सीमाई इलाकों में सभी द्विपक्षीय समझौतों और संबंधों में बेहतरी के लिए शांति और स्थिरता अनिवार्य है। इसे पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और हितों पर आधारित होना चाहिए। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बुधवार को यह जानकारी दी।

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इसके साथ ही विदेश सचिव श्रृंगला ने यह भी कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ भी अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन ऐसा सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकता है। विदेश सचिव लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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उनकी यह टिप्पणी पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को लेकर कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ताओं के 15वें दौर से ठीक दो दिन पहले आया है। वहीं, अफगानिस्तान के साथ संबंधों को लेकर श्रृंगला ने कहा कि हमने देश के मित्रवत लोगों के साथ विशेष संबंध बनाए रखे हैं।
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विदेश सचिव ने कहा, 'अफगानिस्तान में मानवीय हालात और जरूरतों को देखते हुए भारत सरकार ने अफगान नागरिकों को 50 हजार टन गेहूं उपहार के रूप में देने का फैसला किया है। भारत की इस मानवीय सहायता की पहली खेप पिछले महीने अटारी बॉर्डर से रवाना कर दी गई थी।' 

श्रृंगला ने म्यांमार के साथ भारत के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, हम म्यांमार से जुड़े हुए हैं। यह ऐसा देश है जिसके साथ हमारी लगभग 1700 किमी लंबी सीमा है। अपनी भागीदारी में, हमने म्यांमार की लोकतंत्र में जल्द से जल्द वापसी देखने में भारत की रुचि पर जोर दिया है।

'हमारी विदेश नीति में पड़ोसी देशों को प्राथमिकता'
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में पड़ोस सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण स्थान पर आता है। पड़ोसी देशों के प्रति यह नीति अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल मालदीव, म्यांमार, श्रीलंका और पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान के अलावा इन सभी देशों के साथ हम नजदीकी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोस में स्थित देशों का भारत के लिए विशेष महत्व है। इन देशों के साथ हमारे संबंध साझा इतिहास और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। हम एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं। 

चीन को वार्ता का 15वां दौर सफल रहने की उम्मीद
उधर, चीन ने बुधवार को उम्मीद जताई कि 11 मार्च को सैन्य स्तरीय वार्ता के 15वें दौर में भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में बचे हुए संघर्ष के बिंदुओं पर ऐसे समाधान पर पहुंचने में सफल होंगे, जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य होंगे। चीन ने कहा कि हमें इस ओर एक और कदम बढ़ाने की उम्मीद है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने इस वार्ता की पुष्टि करते हुए एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि वार्ता के पिछले दौर में दोनों पक्षों ने सीमा के पश्चिमी सेक्टर पर बचे हुए मुद्दों के हल के लिए गहन चर्चा की थी। हमें उम्मीद है कि अगली वार्ता में हम इस ओर एक और कदम बढ़ाएंगे।


इन वार्ताओं के जरिए अभी तक पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों, गलवां और गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाकों में विवाद का समाधान किया जा चुका है। दोनों देशों के बीच 14वें दौर की सैन्य वार्ता 12 जनवरी को हुई थी। हालांकि, इस वार्ता का कोई खास परिणाम देखने को नहीं मिला था। 

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