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विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला बोले : अफगानिस्तान में हो रहे बदलाव के प्रभावों को लेकर चिंतित है भारत
Tue, 21 Sep 2021 03:17 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 21 Sep 2021 03:17 AM IST
सार
विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला जेपी मॉर्गन ‘इंडिया इंवेस्टर समिट’ को संबोधित करते हुए कहा, अफगानिस्तान के पड़ोसी होने के नाते भारत का उस देश में हुए हालिया बदलाव और क्षेत्र पर उसके असर को चिंतित होना स्वाभाविक है।
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विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला
- फोटो : ANI
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विस्तार
विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान के पड़ोसी होने के नाते भारत का उस देश में हुए हालिया बदलाव और क्षेत्र पर उसके असर को चिंतित होना स्वाभाविक है।
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विदेश सचिव ने कहा, चीन से संबंधों की प्रगति पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और आपसी हितों पर निर्भर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अफगानिस्तान पर पारित प्रस्ताव का जिक्र कर उन्होंने कहा कि इसमें लंबित मुख्य मुद्दों को उठाया गया है और मांग की गई कि अफगान सरजमीं का आतंकियों के प्रशिक्षण, शरण, साजिश या फिर वित्तीय पोषण के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
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विदेश सचिव जेपी मॉर्गन ‘इंडिया इंवेस्टर समिट’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोस में खासकर अफगानिस्तान और पूर्वी सीमा पर चीन के हालात हमें नई वास्तविकताओं के बारे में याद दिलाते हैं कि परंपरागत सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न गतिरोध पर उन्होंने कहा कि पिछले साल चीन ने क्षेत्र में यथास्थिति को एकतरफा बदलने की कोशिश की जिससे सीमावर्ती इलाकों में शांति की स्थिति बिगड़ी।
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हमने चीनी पक्ष से यह दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि हमारे संबंधों की प्रगति के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और धैर्य बहुत आवश्यक है। भारत-चीन संबंधों की प्रगति केवल पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों पर आधारित हो सकते हैं।
अफगानिस्तान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नई दिल्ली पड़ोसी मुल्क में आए हालिया बदलाव का भारत और क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है। एक पड़ोसी होने के नाते हम स्वाभाविक रूप से अफगानिस्तान के अंदर हालिया परिवर्तनों और इसके हम पर और क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का तत्कालिक ध्यान वहां से भारतीय नागरिकों को निकालने पर था और अगस्त में ज्यादातर भारतीय नागरिकों को काबुल से निकालने में सफल भी रहे। इसमें अल्पसंख्यकों समेत अफगान नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि एयरपोर्ट पर सुरक्षा हालात के चलते यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। काबुल एयरपोर्ट से आंशिक तौर पर उड़ान सेवाएं शुरू हुई हैं। हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं।