फ्रंटफुट पर खेल रहे पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के रुख से हैरान है विदेश मंत्रालय
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कूटनीति की पिच पर फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। वह लगातार भारत को शांतिपूर्ण संबंधों का आमंत्रण दे रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के इस रूख का अभी भारतीय कूटनीतिज्ञ जवाब तलाश रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के पास भी इसका कोई सटीक जवाब नहीं सूझ रहा है।
सूत्रों का मानना है कि अभी तक भारत हमेशा पाकिस्तान के सामने आतंकवाद पर लगाम कसने और शांति पूर्ण पहल की गेंद फेंकता रहा है। भारत की इस पहल पर पाकिस्तान लगातार क्लीन बोल्ड होता रहा, लेकिन अब भारत के इसी दांव पर पाकिस्तान ने पहल तेज कर दी है।
हालांकि भारतीय कूटनीतिज्ञ इसे पाकिस्तान की गुगली ही मान रहे हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इसे इमरान खान की गुगली करार दिया। विदेश मंत्री स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान इसके जरिए खुद को बेनकाब कर रहा है। भारत की नीति है कि आतंकवाद और शांति वार्ता दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।
इसलिए पाकिस्तान को पहले अपनी जमीन से चल रहे आतंकवाद पर लगाम कसने का भरोसा देना होगा। उसे सीमापार से जारी आतंकियों घुसपैठ रोकनी होगी और मुंबई तथा पठानकोट में हुए आतंकी हमले के दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करनी होगी।
सेना की कठपुतली हैं इमरान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान वहां की सेना और आईएसआई के इशारों पर नाच रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक सूत्र का कहना है कि इमरान की इस पहल पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान पहले भी कई बार शांति प्रक्रिया की पहल कर चुका है।
जब भी शांति प्रक्रिया की शुरुआत होती है, उससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर सीमापार के आतंकी दहशतगर्दी को अंजाम दे देते हैं। माना जा रहा है कि भारतीय रणनीतिकार पाकिस्तान के इस दांव की सही काट तलाश रहे हैं। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावों की सच्चाई का भी आकलन किया जा रहा है।
पाकिस्तान दुनिया को दे रहा है संदेश
भारत के साथ शांति वार्ता और अच्छे रिश्तों का निमंत्रण देकर पाकिस्तान दुनिया को अपने रुख का संदेश दे रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान की कोशिश यह साबित करने की है कि पाकिस्तान भारत के साथ अच्छे रिश्तों का इच्छुक है और भारत अड़ियल रुख अपनाकर एक अवसर नहीं दे रहा है।
इसके सामानांतर पहले भारत इस नीति पर चल रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा, पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से कारगिल संघर्ष के बाद वार्ता की पहल, 2003 में सीमा पर संघर्ष विराम समझौता और बाद में यूपीए-1 और यूपीए-2 के समय में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहल इसी के केन्द्र में थी।
भारत ने पाकिस्तान से दुनिया के देशों द्वारा मिलने वाली आर्थिक मदद का आतंकवाद में उपयोग होने का आरोप लगाकर बड़ी सफलता हासिल की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शुरुआत में पाकिस्तान से अच्छे संबंधों की ही पहल की थी।
क्या कहते हैं पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की पहल से हैरान हैं। हालांकि उन्हें भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावों में सफलता की उम्मीद कम नजर आ रही है। हैदर का कहना है कि यह कूटनीतिक शरारत ज्यादा लग रही है। यह केवल दुनिया के देशों को भ्रम में रखने का तरीका भी हो सकता है।
हैदर के अनुसार पाकिस्तान की कथनी और करनी में हमेशा फर्क रहा है। वहां फौज काफी मायने रखती है। धार्मिक संगठन और धार्मिक राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों की कमी नहीं है। इसलिए पाकिस्तान में मुश्किलात काफी हैं। इसलिए इमरान खान जिस तरह की पहल कर रहे हैं उस पर यकीन नहीं किया जा सकता।
सलमान हैदर का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान को यह पहल करने के पहले आतंकवाद के खिलाफ कुछ ठोस निर्णय लेने चाहिए। ताकि पता चल सके कि उनमें कितनी सच्चाई है या फिर वह क्या कर पाएंगे। हैदर यही सलाह भारत सरकार और विदेश मंत्रालय को भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को इमरान खान की पाकिस्तान में स्थिति तोलकर ही इस पर कोई रुख तय करना चाहिए।