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MEA: भारत-चीन में 17वें दौर की वार्ता, देपसांग और डेमचक का मुद्दा जल्द सुलझाने पर भारत-चीन सहमत
Thu, 22 Dec 2022 04:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 22 Dec 2022 04:08 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस वार्ता करके बताया कि भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की 17वीं दौर की बैठक 20 दिसंबर को चुशुल मोल्दो में चीनी पक्ष द्वारा आयोजित हुई थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में LAC के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया
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अरिंदम बागची, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
तवांग में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। इस बीच भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 17वीं दौर की बैठक 20 दिसंबर को हुई है। कोर कमांडर स्तर की 17वीं दौर की बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है।
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भारत और चीन ने लद्दाख सीमा पर शांति और स्थायित्व बनाए रखने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख के मुद्दों को निपटाने के लिए मंगलवार को 17वें दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता हुई। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में पिछले हफ्ते हुई हिंसक झड़प के बाद हुई इस बातचीत में देपसांग और डेमचक से चीनी सेना के पीछे हटने का मसला मुख्य एजेंडा था। हालांकि, इस बातचीत में कोई ठोस हल तो नहीं निकला, लेकिन दोनों पक्ष संपर्क में रहते हुए इसे जल्द सुलझाने पर सहमत हुए। कोर कमांडर स्तर की यह वार्ता चुशूल-मोल्डो में चीनी सीमा में हुई। लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व किया। सूत्रों के मुताबिक, चीन देपसांग और डेमचक के मसले को मई, 2020 में शुरू हुए ताजा विवाद से पहले का मानते हुए उस पर ठोस प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। ब्यूरो
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एलएसी पर शांति और स्थिरता पर सहमति
विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को मीडिया को बताया कि दोनों देशों की ओर से तय दिशा-निर्देशों के आधार पर खुलकर और गहराई से बात हुई। मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, कोर कमांडर स्तर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने पश्चिमी सेक्टर में संबंधित मुद्दों के खुले और सकारात्मक तरीके से समाधान के लिए विचार रखे।
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nबागची ने बताया कि बचे मुद्दों को जल्द सुलझाने के लिए काम करने पर सहमत हुए ताकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता स्थापित हो सके और द्विपक्षीय संबंधों में विकास सुनिश्चित हो सके। दोनों पक्ष किसी भी स्थिति को बातचीत से सुलझाएंगे।
अब तक पांच जगहों से हट चुकी हैं दोनों सेनाएं
यह वार्ता पीएम नरेंद्र मोदी व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच जी-20 सम्मेलन में हाथ मिलाने के एक माह बाद हुई है। पूर्वी लद्दाख में मई, 2020 में तनातनी के बाद अब तक 5 तनातनी वाले जगहों से दोनों सेनाएं पीछे हट चुकी हैं। फरवरी, 2021 को पैंगोंग झील के दोनों तरफ व गोगरा-हॉटस्प्रिंग इलाके के पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी)-15 व 17 से अगस्त में दोनों सेनाएं पीछे हटी थीं।
चीन के दिशानिर्देशों का पालन करें वहां रहने वाले भारतीय
इस दौरान चीन में बढ़ते कोरोना मामलों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम चीन में कोविड की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। हम दुनिया की फार्मेसी हैं और उस रूप में हमेशा दूसरे देशों की मदद की है। हमें अभी ट्रैवल एडवाइजरी जारी करना है, लेकिन फिलहाल लोगों को उस देश में स्थानीय दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए जहां वे रह रहे हैं।
भारत ने लगातार अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा का समर्थन किया
अफगानिस्तान में लड़कियों की विश्वविद्यालय शिक्षा पर लगे बैन को लेकर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। इस मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में लगातार महिला शिक्षा का समर्थन किया है। मैं यूएनएससी संकल्प 2593 को भी याद करना चाहूंगा, जो मानव अधिकारों को बरकरार रखता है जो महिलाओं के लिए समान भागीदारी का आह्वान करता है।