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खाद्य सुरक्षा : प्रवासी मजदूरों ने की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग, सीजेआई ने कहा- देखता हूं

Thu, 20 Jan 2022 07:06 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 20 Jan 2022 07:06 AM IST
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Food security: Migrant laborers demand early hearing on petition In Supreme Court, CJI NV Ramana said I will see
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से कोरोना की तीसरी लहर में भी परेशानी में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए खाद्य सुरक्षा व अन्य कल्याणकारी कदम सुनिश्चित करने की याचिका पर जल्द ही सुनवाई कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को कहा, मैं देखता हूं।

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दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, अंजलि भारद्वाज और जगदीप छोकर की याचिका पर भूषण ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी। भूषण ने दलील दी थी कि यह प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन का विषय है। सूखे राशन की आपूर्ति और सामुदायिक रसोई से संबंधित स्वत: संज्ञान लेते हुए दाखिल की गई याचिका पर इस अदालत ने निर्देश जारी किए थे। 
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आखिरकार सात माह गुजर गए और किसी निर्देश को लागू नहीं किया गया है। अब इस ओमिक्रॉन स्वरूप के कारण व लॉकडाउन जैसी पाबंदियों की वजह से प्रवासी मजदूर फिर से मुश्किलों में घिर गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने नए आवेदन में केंद्र को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वह पिछले साल जून में दिए गए फैसले के अनुरूप निर्देशों के अनुपालन के संबंध में स्थिति रिपोर्ट जमा करे।
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आवेदन में अनुरोध किया गया है कि निर्देशों का अनुपालन कराया जाए जिनमें अधिकारियों से कहा गया था कि, मुफ्त राशन योजना के तहत आने वाले लोगों की कुल संख्या का निर्धारण करने के लिए ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ के तहत पहल करें।

सरकार के आलोचकों को देशद्रोही बता जेलों में डाल रहे : नरीमन
देशद्रोह कानून खत्म होना चाहिए, सरकार की आलोचना करने वालों को देशद्रोह कानून में कैद किया जा रहा है, यह कहना है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रोहिंटन नरीमन का। उन्होंने चिंता जताई कि दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से युवा नागरिकों, विद्यार्थियों, हास्य कलाकारों आदि को केंद्र सरकार के खिलाफ कुछ कहने पर जेल में डाला जा रहा है।

पूर्व जस्टिस नरीमन ने कहा कि देशद्रोह कानून उपनिवेशवादी दौर का है, जिसकी हमारे संविधान में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर नफरती भाषण देने वालों की संख्या बढ़ रही है, वे एक पूरे समुदाय के नरसंहार के लिए लोगों से कह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति ने भी नफरती भाषणों को अपराध और संविधान के खिलाफ बताया है, जो अच्छी बात है। जस्टिस नरीमन की यह टिप्पणी एक धर्मगुरु यति नरसिंहानंद के संदर्भ में है, जिसने हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाने व नरसंहार के लिए लोगों से कहा था।

ईवीएम इस्तेमाल को चुनौती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने जन प्रतिनिधित्व कानून के उस प्रावधान को चुनौती वाली जनहित याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें मतपत्र से चुनाव के बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वकील एमएल शर्मा ने ईवीएम की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता वकील ने अपनी याचिका को सूचीबद्ध करने की गुहार लगाई और कहा कि 10 फरवरी से यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव को देखते हुए इस पर सुनवाई जरूरी है।

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