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Business News: खाद्य पदार्थों की डिलिवरी से छोटे शहरों में मिल रहे ज्यादा रोजगार, 65% लोगों ने की अधिक कमाई

Tue, 29 Aug 2023 06:42 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 29 Aug 2023 06:42 AM IST
सार

एनसीएईआर के प्रोफेसर डॉ. बोर्नली भंडारी ने कहा, इस प्रकार प्लेटफॉर्म से जुड़े कार्य ने सभी श्रमिकों को दुर्घटना बीमा देकर रोजगार को औपचारिक स्वरूप प्रदान किया है।

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Food delivery is providing more jobs in small towns 65% people earn more Latest Business News in hindi
व्यापार समाचार - फोटो : Social Media

विस्तार

देश के दूसरे और तीसरे स्तर के छोटे शहरों में खाद्य पदार्थों को पहुंचाने वाली कंपनियों से रोजगार में तेज बढ़ोतरी हो रही है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने एक सर्वे में कहा, खाद्य वितरण प्लेटफार्मों ने युवा कर्मचारियों (35 वर्ष से कम आयु) के लिए नौकरियां पैदा करने में मदद की है, जिससे वे समय का उत्पादक रूप से उपयोग करने में सक्षम हुए हैं। इन प्लेटफॉर्मों ने दूसरे और तीसरे स्तर यानी छोटे शहरों में रोजगार निर्माण किया है। अधिकांश कर्मचारियों को उनके गृह जिले में ही काम मिल जाता है। एनसीएईआर के प्रोफेसर डॉ. बोर्नली भंडारी ने कहा, इस प्रकार प्लेटफॉर्म से जुड़े कार्य ने सभी श्रमिकों को दुर्घटना बीमा देकर रोजगार को औपचारिक स्वरूप प्रदान किया है। लंबे समय तक काम करने का विकल्प चुनने वाले कम से कम 65 फीसदी कामगारों ने इस दौरान अधिक कमाई की। 

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खुदरा महंगाई को स्थायी रूप से केंद्रीय बैंक के दायरे में लाने की जरूरत : वर्मा
महंगाई को स्थायी रूप से केंद्रीय बैंक के 2-6 फीसदी के दायरे में लाया जाना चाहिए। मुद्रास्फीति पर लड़ाई धीमा करने से पहले चार फीसदी की ओर इसका झुकाव होना चाहिए। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य जयंत वर्मा ने कहा कि महंगाई को मध्यम अवधि के लक्ष्य तक लाने की जगह केंद्रीय बैंक के दायरे में लाने की कहीं अधिक जरूरत थी। यह तब होता है जब अनुमानित महंगाई 5 फीसदी से नीचे निरंतर आधार पर गिरती है। वास्तविक रेपो दर अत्यधिक ऊंची होने लगती है। अगर मौद्रिक नीति प्रतिबंधात्मक है तो खाद्य महंगाई अस्थायी हो जाती है। मैं जुलाई की खुदरा महंगाई के आंकड़ों से आश्चर्यचकित नहीं हूं और उम्मीद है कि अगस्त में भी महंगाई इसी तरह उच्च स्तर पर रहेगी। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 15 महीने के शीर्ष पर थी। 

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विकास के बलिदान से बचने की जरूरत
मौद्रिक नीति समिति के सदस्य ने कहा, महंगाई को स्थायी तौर पर आरबीआई के दायरे में लाने के अंतिम प्रयासों के तहत हमें विकास दर की बलि देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, दिसंबर तिमाही से ही खुदरा महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।

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पहली तिमाही में 10 अरब डॉलर का रह सकता है चालू खाता घाटा
देश का चालू खाता घाटा (सीएडी) पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक फीसदी या 10 अरब डॉलर रह सकता है। इंडिया रेटिंग के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में समान तिमाही में यह घाटा 18 अरब डॉलर या 2.1% पर था।
एजेंसी का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, क्योंकि वस्तु निर्यात में कमी आई है और यह 100 अरब डॉलर से नीचे चला गया है। आयात 163 अरब डॉलर रहेगा। इससे कुल व्यापार घाटा 64 अरब डॉलर रह सकता है। इंडिया रेटिंग ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी से जून के बाद से सेवाओं की मांग घटी है। वैश्विक सेवा पीएमआई जुलाई में पांच माह के निचले स्तर 52.7 पर रहा। 

अदाणी समूह ने नियमों का किया उल्लंघन
सेबी ने अदाणी समूह की जांच में सूचीबद्ध संस्थाओं के खुलासा नियमों के उल्लंघन और ऑफशोर फंड की हिस्सेदारी में गड़बड़ियां पाई है। इस मामले में सेबी अदाणी समूह पर जुर्माना लगा सकता है।मामले की सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी है। 

गोफर्स्ट की उड़ानें 31 अगस्त तक रद्द
गोफर्स्ट एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें 31 अगस्त तक के लिए रद्द कर दी है। कंपनी ने सोमवार को कहा, इस फैसले से यात्रियों को होने वाली दिक्कतों के लिए वह माफी मांगती है। मई की शुरुआत से ही कंपनी का परिचालन बंद है।

बैंक जमाओं की वृद्धि दर छह साल के उच्च स्तर पर
बैंकों में जमा वृद्धि की दर 11 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में बढ़कर 6 साल के उच्च स्तर 13.5 फीसदी पर पहुंच गई है। 2017 के बाद यह पहली बार है, जब बैंकों में जमा की वृद्धि दर 12.5 फीसदी के स्तर के पार पहुंच गई है।

केयर एज रेटिंग्स के मुताबिक, कुछ महीनों में जमा वृद्धि की दर कर्ज में बढ़ोतरी की आधी रही है। यही कारण है कि कई कर्जदाताओं को जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है। 11 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में कर्ज की वृद्धि दर 19.7 फीसदी पर पहुंच गई। रेटिंग एजेंसी ने कहा,  कर्ज वृद्धि को लेकर परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। इसमें आर्थिक विस्तार, पूंजीगत खर्च में वृद्धि, पीएलआई योजना व खुदरा कर्ज को बढ़ाने के सरकार के प्रयास की बड़ी भूमिका है।

पीएलआई से बढ़ी रफ्तार, 2030 तक तीसरे स्थान पर होगा घरेलू वाहन उद्योग
देश का वाहन उद्योग 2030 तक दुनिया में तीसरे स्थान पर होगा और यह उस दिशा में आगे बढ़ रहा है। वाहन और गाड़ियों के कलपुर्जों के लिये 25,938 करोड़ की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाएं इस क्षेत्र के विकास को गति दे रही हैं।

एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इन योजनाओं के बेहतरीन प्रभाव से वाहन उद्योग आगे बढ़ेगा। देश में वाहन उद्योग अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से है। सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान बढ़कर लगभग 7.1% है, जो 1992-93 में 2.77% था। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 1.9 करोड़ से अधिक रोजगार प्रदान करता है। भारत का लक्ष्य वर्ष 2024 के अंत तक ऑटो उद्योग का आकार दोगुना कर 15 लाख करोड़ रुपये करना है। 


आईटी हार्डवेयर: 58 कंपनियों का पंजीकरण
आईटी हार्डवेयर पीएलआई के लिए कुल 58 देसी और विदेशी कंपनियों ने पंजीकरण कराया है। पीएलआई योजना के तहत इस क्षेत्र के लिए 17,000 करोड़ रुपये का आवंटन होना है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अल्केश कुमार शर्मा ने कहा, आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई-2 योजना को उम्मीद से ज्यादा प्रतिक्रिया मिली है।

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