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Bihar: विधानसभा अध्यक्ष को लेकर आए अविश्वास प्रस्ताव में क्या हुआ, किस पक्ष के साथ कौन गया?

Mon, 12 Feb 2024 02:20 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 12 Feb 2024 02:20 PM IST
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सार
Floor Test Bihar: पिछले महीने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नीतीश ने एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। सोमवार को विधानसभा में सरकार का बहुमत परीक्षण है।
 
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Floor Test: How did the politics of Bihar change from Nitish's resignation to the meeting of MLAs
बिहार की राजनीति - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बिहार की राजनीति के लिए सोमवार का दिन काफी अहम है। दरअसल, बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को बहुमत परीक्षण से गुजरना है। पिछले दिनों जदयू महागठबंधन से अलग होकर एनडीए में शामिल हो गई थी। इसके साथ ही नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 


महागठबंधन सरकार टूटने के बाद से ही राज्य में तमाम नेता 'खेला' होने का दावा करते रहे हैं। इसके अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से विधायकों के बैठकों में शामिल न होने की बातें कही गईं। सोमवार को बहुमत परीक्षण से पहले विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। राजद के खेमे में सत्ता पक्ष ने सेंध लगा दी वहीं, सत्ता पक्ष में भी सेंध लग गई।




आइये जानते हैं कि नीतीश ने महागठबंधन सरकार से इस्तीफा कब और क्यों दिया था? नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार में क्या-क्या हुआ? अभी क्या हो रहा है? बहुमत परीक्षण के लिए गणित क्या है? बिहार विधानसभा में  बहुमत परीक्षण के दिन सदन में क्या-क्या हुआ?
 

नीतीश कुमार ने सौंपा राज्यपाल को इस्तीफा।
नीतीश कुमार ने सौंपा राज्यपाल को इस्तीफा। - फोटो : अमर उजाला
पहले जानते हैं नीतीश ने महागठबंधन सरकार से इस्तीफा कब और क्यों दिया था?
पिछले महीने तक बिहार में महागठबंधन की सरकार थी। इस सरकार में जदयू, राजद, कांग्रेस, वाम दल शामिल थे। 28 जनवरी के दिन बिहार के सियासत की तस्वीर एक बार फिर बदल गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया। 

नीतीश कुमार ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद मीडिया से बातचीत में कहा 'हमने इस्तीफा दे दिया। जो सरकार थी, उसे समाप्त करने के लिए गवर्नर को लिखकर दे दिया। इधर ठीक नहीं चल रहा था, पुराने अलायंस के साथ फैसला करेंगे।'
 

सीएम पद की शपथ लेते नीतीश कुमार
सीएम पद की शपथ लेते नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार में क्या-क्या हुआ? 
28 जनवरी को ही नीतीश कुमार ने राज्यपाल को भाजपा के समर्थन का पत्र सौंपा। इसके बाद साफ हो गया कि बिहार में नीतीश कुमार एक बार फिर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाएंगे। विधानसभा में भाजपा के 78, जदयू के 45 और हम के चार विधायक हैं। इसके आलावा एक निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह ने भी एनडीए को समर्थन दे दिया। 243 सदस्यीय विधानसभा में तीनों दलों और एक निर्दलीय को मिलाकर यह आंकड़ा 128 होता है, जो बहुमत के 122 के आंकड़े से छह ज्यादा है।

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
नौंवी बार नीतीश मुख्यमंत्री बने
नीतीश कुमार ने 28 जनवरी की सुबह इस्तीफा देने के बाद शाम को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। यह नौंवी बार था जब नीतीश राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके साथ आठ अन्य ने मंत्री पद की शपथ ली। विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं डॉ. प्रेम कुमार, विजय चौधरी, विजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, संतोष कुमार सुमन (हम) और निर्दलीय विधायक सुमित सिंह ने मंत्री के रूप में शपथ ली। 

उधर, महागठबंधन सरकार टूटते ही राजद और जदयू में बयानबाजी तेज हो गई। सियासी उलटफेर के बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में खेला अभी बाकी है। जनवरी के अंत में संसदीय कार्य विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सरकार विधानमंडल के दोनों सदनों में राज्यपाल के संबोधन के बाद बजट सत्र के पहले दिन विश्वास मत हासिल करेगी। अधिसूचना में कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राज्य का बजट 12 फरवरी को पेश किया जाएगा। 

तेजस्वी आवास पर विधायक
तेजस्वी आवास पर विधायक - फोटो : अमर उजाला
बहुमत परीक्षण से पहले कांग्रेस ने हैदराबाद भेजे अपने विधायक 
बिहार कांग्रेस के विधायकों में टूट की आशंका के बीच पार्टी ने 4 फरवरी को अपने विधायकों को तेलंगाना भेज दिया। बताया गया कि विधायक 11 फरवरी तक वहीं रहेंगे। करीब एक हफ्ता हैदाराबाद में गुजारने के बाद 11 फरवरी को कांग्रेस के 16 विधायक पटना पहुंचे। हैदराबाद से फ्लाइट के जरिए पटना एयरपोर्ट पहुंचे कांग्रेसी विधायक सीधे तेजस्वी यादव के आवास पर पहुंचे। राजद के विधायक भी यहीं रहे। 

11 फरवरी को ही नीतीश कुमार ने जदयू विधायकों की बैठक की। बिहार में जारी सियासी घमासान के बीच सीएम नीतीश कुमार के करीबी और मंत्री विजय चौधरी के आवास पर भोज का आयोजन किया गया। यहां पर सभी जदयू विधायक, पार्षद और पार्टी के नेता पहुंचे। सीएम नीतीश कुमार भी अपने विधायकों से मिलने पहुंचे। हालांकि, दावा किया गया कि जदयू के कई विधायक भोज में शामिल नहीं हुए। मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि दो से तीन विधायक नहीं पहुंचे हैं। लेकिन, वह हमारे संपर्क में हैं। किसी इमरजेंसी में होने के कारण वह यहां नहीं पहुंच सके। उधर फ्लाेर टेस्ट से पहले भाजपा के विधायकों और विधान पार्षदों का बोधगया में एकत्र हुए। इस बैठक में भी कुछ विधायकों के न पहुंचने की जानकारी सामने आई। 

अभी क्या है समीकरण? 
बिहार विधानसभा में सोमवार को नीतीश कुमार सरकार का बहुमत परीक्षण का दिन है। बिहार के मौजूदा सियासी समीकरण पर नजर डालें तो 243 सदस्यीय विधानसभा में 79 सीटों के साथ राजद सबसे बड़ा दल है। इसके बाद भाजपा के 78 विधायक, जदयू के 45, कांग्रेस के 19, सीपीआई (एमएल) के 12, हम के 04, सीपीआई के 02, सीपीआईएम के 02 विधायक हैं। एआईएमआईएम का एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक है। 

 

विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव में दोनों पक्षों में लगी सेंध
सोमवार को बहुमत परीक्षण से पहले विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। इस दौरान राजद के तीन विधायकों ने पाला बदलकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला। इन विधायकों में बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी और मोकामा विधायक नीलम देवी, बाहुबली आनंद मोहन के बेटे और  शिवहर विधायक चेतन आनंद और लखीसराय जिले की सूर्यगढ़ा से राजद विधायक प्रह्लाद यादव शामिल हैं। वहीं, बहुमत से पहले हुए इस टेस्ट में सत्ता पक्ष को भी झटका लगा। सदन में सदस्यों की संख्या और राजद के तीन विधायकों के पाला बदलने के बाद सत्ता पक्ष को संख्याबल के मुताबिक 131 विधायकों का समर्थन होना चाहिए था। उपाध्यक्ष के मतदान में भाग नहीं लेने पर यह संख्या 130 होती है। लेकिन, अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में केवल 125 विधायकों ने वोट डाला। यानीं, सत्ता पक्ष के पांच विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे। 

वहीं, विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के पास 114 विधायकों का समर्थन था। तीन विधायकों के पाला बदलने के बाद यह संख्या घटकर 111 हो गई। इसके बाद भी अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 112 विधायकों ने वोट डाला। माना जा रहा है कि एक अतरिक्त वोट एआईएमआईएम विधायक का है। 
 
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