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Assam Flood: बाढ़ के कहर से असम के 22 जिलों में हाहाकार, 24 लोगों की मौत, 7.20 लाख लोग प्रभावित

Sun, 22 May 2022 09:48 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 22 May 2022 09:48 PM IST
सार

असम में भूस्खलन से 24 लोगों की मौत हो चुकी है। 22 जिलों में 7.20 लाख लोग  बाढ़ से प्रभावित हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 91 हजार 518 लोग इस समय 269 राहत शिविरों में रह रहे हैं।

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Flood wreaks havoc in 22 districts of Assam 24 dead
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

असम में बाढ़ का कहर जारी है। यहां भूस्खलन में करीब 24 लोगों की मौत हो चुकी है। असम के 22 जिलों में 7.20 लाख लोग प्रभावित हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 91 हजार 518 लोग इस समय 269 राहत शिविरों में रह रहे हैं। 152 राहत वितरण केंद्र प्रशासन ने स्थापित किए हैं।

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आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ में फंसे हुए करीब 26 हजार 236 लोगों को बचाया गया है। भारतीय सेना, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और  स्वयंसेवक बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में लगे हैं।
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असम में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। बाढ़ में कई पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए, करीब 20 बांध टूट गए। कई सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। जिन पर वाहन चलना अब मुश्किल है। 2 हजार 251 गांवों को बाढ़ ने प्रभावित किया है। जिनमें 43 हजार 090 घर क्षतिग्रस्त हो गए।
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अगर हम असम में बाढ़ वाले जिलों की बात करें तो उनमें विश्वनाथ, दरांग, कछार, बाटपेटा, गोलपारा, गोलाघाट, होजई, धुबरी, धेमाजी, कामरूप (एम), करीमगंज, कामरूप, हैलाकांडी, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग पश्चिम, माजुली मोरीगांव, लखीमपुर, सोनितपुर, नलबाड़ी, उदलगुरी और नगांव शामिल हैं। 


मदरसा और पेट्रोल-डीजल पर असम के सीएम ने दिया यह बयान
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मदरसा ऐसी शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, जो छात्रों को भविष्य में कुछ भी करने का विकल्प दे सके। किसी भी धार्मिक संस्थान में प्रवेश उस उम्र में होना चाहिए जहां वे अपने निर्णय खुद ले सकें। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा शासित प्रदेशों में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम नहीं किया गया है। भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित प्रदेशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर है। विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों में उनकी पहली जिम्मेदारी है कि वैट कम कीजिए।

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