बाढ़ से बेहाल : मध्यप्रदेश के 394 गांवों में स्थिति गंभीर, ओडिशा में 17 लोगों की मौत
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मध्य भारत के कई हिस्सों में पिछले दो दिन से हो रही भारी बारिश और उफनाई नदियों के चलते विकट स्थिति बन गई है। नदियां उफना रही हैं और कई राज्य भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। मध्यप्रदेश के 394 से ज्यादा गांवों में बाढ़ ने तबाही मचाई है तो ओडिशा में बाढ़ की वजह से कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है।
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, सिवनी, होशंगाबाद और हरदा जिलों में अत्यधिक बारिश हुई है। यहां के चौराई में रिकॉर्ड 41 सेंटीमीटर बारिश हुई है। अत्यधिक भारी वर्षा का पैमाना 20 सेंटीमीटर है। सिवनी जिले में वैनगंगा नदी उफना रही है जिससे भीषण बाढ़ की स्थिति बन गई है। जबलपुर के गदरवाड़ा में नर्मदा नदी की भी यही स्थिति है।
मध्यप्रदेश के कई जिलों में बाढ़
मध्यप्रदेश में पिछले दो दिन से जारी मूसलाधार बारिश के कारण होशंगाबाद सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों में बाढ़ आ गई है। प्रदेश में स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि जलमग्न क्षेत्रों से लोगों को बचाने के लिए शनिवार को सेना और एनडीआरएफ को उतारा गया। राज्य के नौ जिलों के 394 से ज्यादा गांवों में बाढ़ ने तबाही मचाई है। अब तक 7000 से अधिक लोगों को बचाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।
छिंदवाड़ा में बाढ़ में फंसे पांच लोगों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया है। वायुसेना के दो हलीकॉप्टर होशंगाबाद, सीहोर और रायसेन के लिए आने वाले थे पर खराब मौसम के कारण उनको रास्ते से ही बाहर लौटना पड़ा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पूरी तरह से लगी हुई हैं। राज्य के हालात को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की।
बालाघाट जिले में वायुसेना ने तीन लोगों को बचाया
भारतीय वायुसेना के एक हेलीकॉप्टर ने मध्यप्रदेश में बाढ़ प्रभावित बालाघाट जिले में रविवार को तीन लोगों को बचाया। बचाए गए लोगों को चिकित्सकीय देखभाल के लिए जिला प्रशासन को सौंप दिया गया। वायु सेना ने ट्वीट कर कहा, ‘आज सुबह आईएएफ ने मध्यप्रदेश के बालाघाट के मोवाड गांव में डूबे घरों से दो युवकों और एक वृद्ध को बचाने के लिए एमआई17वी5 हेलीकॉप्टर भेजा। उनके घर वेनगंगा नदी के किनारे पर स्थित हैं।’
ओडिशा में 14 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
ओडिशा में बाढ़ के चलते कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 हजार से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। प्रदेश सरकार ने रविवार को बताया कि राज्य के 20 जिलों के 3,256 गांवों के 14 लाख 32 हजार 701 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ओडिशा आपदा त्वरित प्रतिक्रिया बल के कर्मचारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे कई लोगों को बचाया है। प्रभावित लोगों को राहत शिविर में भेजा गया है। राज्य के कई पुल जलमग्न हो गए हैं, जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
Odisha: Around 2,000 people from low-lying areas of Sambalpur city have been shifted to the flood relief centers, after water entered many areas causing flood-like situation, following the discharge of huge volume of water from Hirakud Dam pic.twitter.com/Bt5kjPsKct
— ANI (@ANI) August 30, 2020
यहां हीराकुड बांध के 64 में से 44 गेट खोल दिए गए हैं। इस बांध के जलाशय का स्तर 630 फुट है और यहां स्तर इस समय 625.65 फुट हो गया है। यहां जल के भारी प्रवाह और जल स्तर में वृद्धि के कारण जलाशय से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। ओडिशा की सबसे बड़ी नदी महानदी के बेसिन क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इससे पुरी, खुर्दा, कटक, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा के कुछ हिस्सों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
असम के 28 जिले बाढ़ से प्रभावित
असम में पिछले काफी समय से बाढ़ की वजह से स्थिति खराब बनी हुई है। पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार बरसात और नदियों का जलस्तर बढ़ने से विकट स्थिति बनी है। असम में अभी तक बाढ़ की वजह से कम से कम 140 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के 28 जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
महाराष्ट्र : नागपुर भारी बारिश से पुल ढहा
उधर महाराष्ट्र में भी भारी बारिश समस्या का सबब बनी हुई है। राज्य के नागपुर में रामटेक में भारी बारिश के चलते पुल का एक हिस्सा ढह गया। पुल ढह जाने ने आवागमन बाधित हो गया है।
Maharashtra: Portion of a bridge collapses in Ramtek, Nagpur district, following heavy rainfall in the region pic.twitter.com/t3QmjhRqSa
— ANI (@ANI) August 30, 2020
गुजरात के कच्छ में भारी बारिश
भारी बारिश के कारण गुजरात के भरूत जिले में भी नर्मदा नदी के जलस्तर बढ़ गया है। इस वजह से यहां भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। राजकोट में भारी बारिश के चलते आजी नदी उफना रही है। यहां के कच्छ जिले के कई इलाकों में भारी बारिश हो रगी है। विदर्भ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ लोगों को सुरक्षित निकालने का काम कर रहा है।
#WATCH Rainwater flows on streets in a village under Rapar Tehsil in Kutch, Gujarat following heavy rainfall. pic.twitter.com/hg1yfwwP8X
— ANI (@ANI) August 30, 2020
गुजरात में भरूच के कलेक्टर ने बताया है कि सरदार सरोवर बांध से 9.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अंकलेश्वर, भरूच और झगड़िया के निचले इलाके इससे प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि 2500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ के दो दल बचाव कार्य के लिए तैनात हैं।
9.50 lakh cusecs of water discharged from Sardar Sarovar Dam. Low-lying areas of Ankleshwar, Bharuch, Jhagadia to be affected. Over 2,500 people evacuated to safer places. Two NDRF teams on standby: Bharuch Collector, #Gujarat pic.twitter.com/mr5a3ZYfZp
— ANI (@ANI) August 30, 2020
दिल्ली : चेतावनी स्तर के पास बह रहा है यमुना में जलस्तर
राजधानी दिल्ली में रविवार सुबह चेतावनी स्तर के नजदीक बह रही यमुना नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘सुबह नौ बजे पुराने रेलवे पुल पर जलस्तर 203.98 मीटर था। यह शनिवार रात सात बजे 204.14 मीटर और शुक्रवार शाम पांच बजे 204.41 मीटर था।’ चेतावनी स्तर 204.50 मीटर और खतरे का निशान 205.33 मीटर है।
हरियाणा के यमुनानगर जिले के हथनीकुंड बैराज से सुबह 8 बजे 4,353 क्यूसेक की दर से यमुना में पानी छोड़ा जा रहा था। शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे प्रवाह की दर 11,445 क्यूसेक थी, जो पिछले 24 घंटों में अधिकतम थी। अधिकारी ने कहा, ‘पिछले दो दिनों से प्रवाह की दर 4,000 क्यूसेक और 15,000 क्यूसेक के बीच बनी हुई है, जो बहुत अधिक नहीं है।’ एक क्यूसेक 28.32 लीटर प्रति सेकंड के बराबर होता है।
बैराज से छोड़ा गए पानी को आम तौर पर राजधानी तक पहुंचने में दो-तीन दिन लगते हैं। इस पानी से दिल्ली को पेयजल मिलता है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में बारिश के कारण शुक्रवार को जलस्तर बढ़ गया था। पूर्वी दिल्ली जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने के लिए 24 नौकाएं तैनात की हैं। इनमें से प्रत्येक पर दो गोताखोर तैनात हैं। साथ ही अतिरिक्त नौकाएं और गोताखोर तैयार रखे गए हैं।