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पांच साल में संसद में 296 दिन मौजूद रहे भाजपा के लौहपुरुष आडवाणी, बोले बस 365 शब्द
Sat, 09 Feb 2019 10:46 AM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Sat, 09 Feb 2019 10:46 AM IST
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LK Advani
भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और पार्टी को हर बार संकट से उबारने वाले लाल कृष्ण आडवाणी इन दिनों केवल सक्रीय राजनीति से ही दूर नहीं बल्कि मौन भी हैं। उनकी खामोशी की तस्दीक 16वीं लोकसभा के आंकड़े करते हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बगल में आगे की सीट पर बैठने वाले आडवाणी की सदन में उपस्थिति 92 फीसदी से ज्यादा है मगर बीते पांच साल में संसद में उन्होंने केवल 365 शब्द ही बोले हैं।
यूपीए-2 की सरकार में 2009 से 2014 की तुलना में वह मोदी सरकार के कार्यकाल में सदन में उनकी आवाज 99 फीसदी कम सुनाई दी है। 15वीं लोकसभा में जहां आडवाणी ने 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया था और 35,926 शब्द बोले थे। 2014-19 तक पार्टी के लौहपुरुष आडवाणी 296 दिन लोकसभा में मौजूद रहे और सिर्फ 5 बार चर्चा और कार्यवाही में हिस्सा लिया। इस दौरान वह 3 मिनट से भी कम बोले। आडवाणी की उपस्थिति का आंकड़ा कई मंत्रियों, आज की भाजपा के शीर्ष वक्ताओं और विपक्ष के नेताओं से कहीं अधिक हैं।
ऐसा नहीं कि कम बोलते हैं आडवाणी
तारीख थी 8 अगस्त 2012, संसद में असम में बढ़ती गैरकानूनी घुसपैठ और हो रही जातीय हिंसा पर शोर शराबा मचा था। विपक्ष की तरफ से बोलते हुए अडिग आडवाणी से तमाम अवरोधों के बावजूद जारी रखा और 4957 शब्दों का भाषण दिया। विपक्ष का प्रस्ताव भले ही ठुकरा दिया गया मगर तबतक आडवाणी अपना काम कर चुके थे।
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लालकृष्ण आडवाणी के पास कहने को कितना कुछ है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने अपनी आत्मकथा 'मेरा देश, मेरा जीवन' (माय कंट्री, माय लाइफ) लिखी तो अपने जीवन पर 1000 से अधिक पन्ने लिख डाले।
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यूपीए-2 की सरकार में 2009 से 2014 की तुलना में वह मोदी सरकार के कार्यकाल में सदन में उनकी आवाज 99 फीसदी कम सुनाई दी है। 15वीं लोकसभा में जहां आडवाणी ने 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया था और 35,926 शब्द बोले थे। 2014-19 तक पार्टी के लौहपुरुष आडवाणी 296 दिन लोकसभा में मौजूद रहे और सिर्फ 5 बार चर्चा और कार्यवाही में हिस्सा लिया। इस दौरान वह 3 मिनट से भी कम बोले। आडवाणी की उपस्थिति का आंकड़ा कई मंत्रियों, आज की भाजपा के शीर्ष वक्ताओं और विपक्ष के नेताओं से कहीं अधिक हैं।
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ऐसा नहीं कि कम बोलते हैं आडवाणी
तारीख थी 8 अगस्त 2012, संसद में असम में बढ़ती गैरकानूनी घुसपैठ और हो रही जातीय हिंसा पर शोर शराबा मचा था। विपक्ष की तरफ से बोलते हुए अडिग आडवाणी से तमाम अवरोधों के बावजूद जारी रखा और 4957 शब्दों का भाषण दिया। विपक्ष का प्रस्ताव भले ही ठुकरा दिया गया मगर तबतक आडवाणी अपना काम कर चुके थे।
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लालकृष्ण आडवाणी के पास कहने को कितना कुछ है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने अपनी आत्मकथा 'मेरा देश, मेरा जीवन' (माय कंट्री, माय लाइफ) लिखी तो अपने जीवन पर 1000 से अधिक पन्ने लिख डाले।
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2008 से 2018 सरकार बदली और बदले आडवाणी
बीते सालों में केवल संसद में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी आडवाणी की आवाज गुम सी हो गई। पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज से धीरे-धीरे अपने लौहपुरुष के नाम की पोस्ट आने कम होते चले गए। साल दर साल शेयरिंग का आंकड़ा लुढ़कता चला गया। पिछले आम चुनाव से ठीक पहले साल 2013 में पार्टी के फेसबुक पेज पर आडवाणी का नाम 43 बार टैग किया गया और उनके नाम के पोस्ट हुए। 2014 में 3 पोस्ट में, 2015 में 4 पोस्ट में, 2016 में 1, 2017 में एक भी नहीं, 2018 में 2 और 2019 में अभी तक एक भी पोस्ट में आडवाणी का जिक्र नहीं हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद जून 2014 से जनवरी 8 जनवरी 2019 के बीच 16 सत्र हुए हैं। 321 दिन कार्यवाही चली। इनमें 6 सत्र में उनकी उपस्थिति 100% रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद जून 2014 से जनवरी 8 जनवरी 2019 के बीच 16 सत्र हुए हैं। 321 दिन कार्यवाही चली। इनमें 6 सत्र में उनकी उपस्थिति 100% रही।
लोकसभा सत्र और चर्चाओं की संख्या
| लोकसभा | साल | चर्चा में हिस्सा |
| 12वीं और 13 वीं | 1998-2004 | 179 बार |
| 14वीं | 2004-2009 | 74 बार |
| 15वीं | 2009-2014 | 42 बार |
| 16वीं | 2014-2019 | 5 बार |
स्त्रोत: लोकसभा वेबसाइट