{"_id":"58be4d7f4f1c1bc04fdc3ecb","slug":"five-weeks-211-rallies-for-akhilesh-yadav-in-up-poll","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी चुनावः जानिए रैली करने के मामले में कौन रहा अव्वल?","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
यूपी चुनावः जानिए रैली करने के मामले में कौन रहा अव्वल?
amarujala.com- Presented by : अजय कुमार सिंह
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:06 PM IST
विज्ञापन
अखिलेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी विधानसभा चुनाव का प्रचार तो थम गया लेकिन रिजल्ट का सबको इंतजार है। जिस बेसब्री से नेता रिजल्ट का इंतजार में बैठे हैं, उससे कम जनता में भी दिलचस्पी नहीं है। क्योंकि पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण यूपी भी इन राज्यों में शामिल है। जिसका परिणाम राज्य की सत्ता से देश की सत्ता तक असर डालेगा। इसलिए यूपी के चुनावी रण में मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई नेता पीछे नहीं रहे।
विज्ञापन
पीएम मोदी हो या सीएम अखिलेश, राहुल गांधी हो या मायावती। सबने अपनी ताकत झोंक दी। लेकिन तबाड़तोड़ रैलियां करने में सीएम अखिलेश यादव आगे रहे। उन्होंने 221 रैलियां कीं। जबकि दूसरे नंबर पर यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या रहे, जिन्होंने 150 जनसभाएं कीं।
विज्ञापन
सीएम अखिलेश यादव ने सुल्तानपुर जिले से रैलियों की शुरूआत की थी। 24 जनवरी को यहां पहली चुनावी सभा को संबोधित किया। उसके बाद लगातार 36 दिनों से उनका ये क्रम जारी रहा। 36 दिनों में 221 रैलियां कर सबको चौका दिया। पार्टी की पूरी कमान उनके ही हाथ में थी। अखिलेश के लिए ये चुनाव परिवार, पार्टी और खुद की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। इसलिए उन्होंने कोई कसर नहीं रहने दी। यहां तक कि उनकी पत्नी डिंपल यादव भी चुनावी मैदान में उतर गईं और कई सभाओं को संबोधित किया।
विज्ञापन
प्रचार के अंतिम दिन जौनपुर के केराकाट में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि ये चुनावी सभा अंतिम है, क्योंकि चुनाव प्रचार समाप्त हो रहा है। इसलिए मैं आप सब से अपील कर रहा हूं कि सपा को वोट करें और मदद दें।
उनके पिता मुलायम सिंह यादव इस चुनाव से बाहर ही रहे। उन्होंने केवल सिर्फ चार सभाएं की। पिछले विधानसभा चुनाव में मुलायम ने 300 से ज्यादा सभाएं की थीं। वहीं, शिवपाल यादव भी इस बार जसवंत नगर तक ही सीमित रहे।
अब परिणाम बताएगा कि अखिलेश की ये धुंआधार रैलियां पब्लिक के बीच कितना असर की है।